विकास लेल भ रहल खामोश क्रांतिक अग्रदूत

आई पटना स ल कए अमेरिका तक बिहार क बदलाव चर्चा क विषय बनल अछि। पिछला लगभग पांच साल स नीतीश कुमार राज्यक मुखिया छथि। एकटा वर्ग एहि लेल हुनका श्रेय द रहल अछि। दोसर वर्ग सडक, बिजली आ उद्योग क हालत देखी विकासक गति मापबाक प्रयास करि रहल अछि। मुदा बिहार मे जे चुपचाप क्रांति भ रहल अछि ओकरा दिस ककरो ध्यान नहि जा रहल अछि। सच मानू त बिहार कए बदलिनिहार ओकर गाम आ शहर क लोक अछि जे बिना कोनो अखबार मे विज्ञापन निकाली अपन काज स अपन आ राज्यक सामाजिक आर्थिक आ राजनीतिक विकास कए रहल अछि। किया कि बिहारक मे जे बदलाव भ रहल अछि ओ कोनो एकटा नेता या एकटा तार्किक सिद्धांत क बल पर नहि भ सकैत अछि। समाद एहने किछु लोकक संबंध मे समय समय पर जानकारी दैत रहल अछि। एहि नव कडी मे प्रस्तुत अछि समदिया क तीन गोट खास रपट जाहि मे एहन बिहार नवनिर्माता क बारे मे बताउल गेल अछि जे अपनो नहि बुझि पाबि रहल अछि जे ओ राज्यक विकास लेल भ रहल खामोश क्रांतिक अग्रदूत छथि।

अपराध स तपल धरती पर सेवा क गंगाजल
बगहा (प.चंपारण) एकटा एहन माइट जतय कायम छल डाकु क आतंक। लोग झेलैत रहल सअ साल बाढ़ि। जूझैत रहल गरीबी स। चहलकदमी करैत एक दोसर क खून क प्यासल। घर स निकलैत महिला। मुदा एहि सब स अलग एहि माइट पर एकटा महिला समाजसेवा क बदौलत बना लेलथि मुकम्मल पहचान। एहि बहादुर महिला क नाम अछि – उर्मिला कुशवाहा। पिपरासी प्रखंड क सेमरा लबेदाहां पंचायत स्थित मंझरिया गांव क रहनिहारि उर्मिला कुशवाहा 1998 मे समाज सेवा क क्षेत्र मे कदम रखलथि। माध्यम बनल स्वयंसेवी संस्था वन विकास भारती आ कार्यक्षेत्र बनल गंडक पार दियारा। वर्ष 2001 तक उर्मिला अपराधक छाहरिक बीच लोक कए स्वास्थ आ शिक्षा क प्रति जागरूक त करैत बाढ़ि स बचबाक हुनर सेहो बेतेलथि। उर्मिला क सेवा क रंग आम लोक पर एहन चढ़ल जे 2001 मे ओ जिला पर्षद क सदस्य चुनल गलीह। पांच वर्ष तक जनता क सेवा मे लागल रहलीह। जिला परिषद क सदस्यता अवधि खत्म भेलाक बाद आब ओ उत्तर प्रदेश क महादेवा स्थित आंगनबाड़ी केन्द्र पर मुख्य सेविका क रूप मे शिक्षा क अलख जगा रहल छथि। उर्मिला कहलथि जे शुरू स हुनकर इच्छा छल जे नारी अबला अछि इ मिथक कए तोड़ल जाए। एहि मिशन क तहत वन विकास भारती क संग जुड़लहुं। संस्था स प्रोत्साहन भेटल आ सेवा क बूते जिला पार्षद मे चुनल गेलहुं। लेकिन राजनीति मे रहि कए समाज लेल बेसी काज करबा दिक्कत बुझाइल ताहि लेल सियासत स तौबा करि समाज सेवा दिस लौट एलहुं।

इ नारी सब पर भारी
कोठिया (शिवहर) । शिवहर शहर स सटल अछि कोठिया गाम। एकटा एहन गाम, जेकर चारूकात केवल हरियाली ये हरियाली अछि। एहि हरियाली मे आब एहि ठामक महिला क सेहो योगदान अछि,, जे पुरुष क लेल सेहो नजीर बनि गेलथि अछिं। सामूहिक खेती क अद्भुत मिसाल कायम करनिहारी इ महिला लोकनि एहि ठाम वर्मी कंपोस्ट तक क उत्पादन करि रहल छथि। हिनकर सफलता क दास्तां बयां करि रहल अछि शिवहर-पिपराढ़ी मुख्य सड़क क कात लागल बीस एकड़ जमीन, जतय नेनुआ, खीरा, टमाटर, भिंडी, बैगन, चुकंदर, मिर्च, लौकी, करैला आदि तरकारी। तरकारी स लहलहा रह खेत देखी हुनकर एहि हुनर कए शिवहर क डीएम सुरेश प्रसाद सिंह सेहो सलाम करैत छथि।

डुमरा क बेरबास क एकटा बागवां
सीतामढ़ी डुमरा प्रखंड क बेरबास गाम क 75 वर्षीय मो. इसराइल। ओ किसी फिल्म क महानायक नहि छथि ने कोनो टेली सीरियल क नायक, मुदा बिहारक बदलैत सामाजिक आ आर्थिक दशा लेल हिनकर गिलहरी प्रयास समाज मे नायक बना देलक अछि। पारिवारिक संबंध क मजबूत बुनियाद आ मेहनत क बल पर आत्मनिर्भर भेल इसराइल बिहारक विकास मे ओहने योगदान द रहल छथि जेहन समुद्र पर राम सेतु बनेबा मे एकटा छोट सन गिलहरि देने छल। मो. इसराइल 64 सदस्यक परिवार क मुखिया छथि, जेकर आजीविका क आधार माछ पोसब अछि। डुमरा प्रखंड क बेरबास गाम मे माछ पोसी कए खुशहाल जिनगी जी रहल इ संयुक्त परिवार इलाका मे मिसाल बनि गेल अछि। इसराइल क सातटा बेटा अछि, जाहि मे छहटा कए ब्याह भ चुकल अछि। पुत्र निजामुद्दीन, महमूद आलम, अली हुसैन, हुमेदूर रहमान, जुबैद, अनवारूल व शहाबुद्दीन क लेल अब्बा क हुक्म अल्लाह-ताला क हुक्म क तरह अछि। इसराइल खुद निरक्षर छथि, मुदा बेटा कए शिक्षित बनौलथि अछि। पौत्र क संग संग पौत्री कए सेहो स्कूल पठा रहल छथि। आइ इ परिवार जेहन अछि किछु साल पहिने तक एहन नहि छल, इ परिवार गरीबी कए काफी लग स जीलक अछि। इसराइल 1962 स माछ क व्यवसाय मे छलाह, मुदा दू सांझक रोटी मुश्किल छल। कहुना कए कर्ज ल एक एकड़ जमीन कीनलाह। फेर 2000 मे सिंडिकेट बैंक स पांच लाख टका ऋण प्राप्त करि राघोपुर बखरी मे सरकारी हैचरी क लग निजी हैचरी स्थापित केलथि। आवंटन क अभाव मे सरकारी हैचरी बंद भ चुकल छल। आइ एक दशक मे इ हैचरी लगातार कामयाबी क इतिहास रचि रहल अछि। सीतामढ़ी, शिवहर आ नेपाल तक क माछ व्यवसायी एहि हैचरी स माछ लकए बेच रहल छथि। मो. इसराइल कहैत छथि किछु मुश्किल नहि अछि बस ठान लेबाक हिम्मत हुए।

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