रिपोर्ट जे लिख नहि सकलहुं

तीन साल पहिने बिहार गेल रही। आइ फेर एक बेर बिहार जेबा लेल दिल्ली स्टेशन पर बैसल छी। धुंधक कारण स ट्रेन लेट अछि। हमरा सन अनेक लोक एहि चिंता स ग्रस्त छथि जे आब अगर ट्रेन लेट भेल त 28 जनवरी कए पटना पहुंचब। 28 कए लालू प्रसाद बिहार बंदक एलान केने छथि। बंद महंगाई क विरोध मे अछि। दिल्लीक लोक लेल इ बुझब कठिन अछि जे महंगाई क लेल आखिर बिहार किया बंद भ रहल अछि, जखनकि बिहार स बेसी महंगाई राजधानी दिल्ली मे अछि।
ट्रेन खुलल त आशा छल जे एहि विषय पर खूब बहस होएत। अपन डिब्बा मे सब बैसक लोक कए देखि राजनीतिक बहसक गौरवपूर्ण इतिहास क आगू बढ़बाक उम्मीद जगल। मुदा एहन किछु नहि भ सकल। बिहार जाइवाला ट्रेनक पहचान रहल राजनीतिक चर्चा एहि बेर मोबाइलक तरह-तरह कए घंटीक बीच कतहु सुनबा मे नहि भेटल।
करीब 26 घंटा लेट ट्रेन आखिरकार 12 बजे दिन मे पटना पहुंचल। अंदेशा छल जे स्टेशन पर राजद कार्यकर्ताक उग्र भीड़ स सामना होएत, मुदा स्टेशन परिसर शांत छल। कुली कहलक जे अलसायल कार्यकर्ता आब घर स निकलत आ दू बजे तक हंगामा भ सकैत अछि। राहत भेटल जे ताबत धरि घर पहुंच जायब। समय छल ताहि लेल रिक्शा पर सवार भ गेलहुं। स्टेशन स जखने बाहर निकलैत रही, राजद कार्यकर्ताक हुजूम स्टेशन दिस आबि रहल छल। रिक्शा दोसर रास्ता स आगू विदा भेल।
बाकीपुर जेलक निशान बचल देखी बुझबा मे आबि गेल जे
शांतिक संदेश देबा लेल बनि रहल बुद्घ स्मृति पार्क क एक दिस स हंगामा करैत आबि रहल राजदक कार्यकर्ता जंगल राज क आखरी निशानी छथि। एहि राज मे भ्रष्टाचार, अपराध आ जातीय उन्माद चरम पर छल शेष भारत क नजरि मे लगभग नौ करोड़ क आबादीवाला बिहार क एकटा वीभत्स छवि छल-खून-खराबा, चोरी आ हिंसा क कहानी स भरपूर। एहन धारणा बनि गेल छल जे स्टेशन पर उतरैत संग गोली क आवाज आ बम धमाका सुनाई देत। देश क अन्य भाग क लोक एहि ठाम एबा स घबरा यात्रा कि नौकरी तक छोडि़ दैत छलाह। प्रवासी सेहो बिहारी बनबाक कल्पना स सिहर उठैत छलाह।
रिक्शा धीरे-धीरे आगू बढि़ रहल छल। राजधानी पटना मे अर्थक उछाल स्पष्ट परिलक्षित अछि। महग कार, फ्लाइओवर आ विदेशी पाहुन देखी इ विश्वास करबा मे देरी नहि भेल जे बिहार बदलि रहल अछि। रोड विज्ञापन स पटल छल। विज्ञापन बता रहल छल जे बिहारक विकास कोना भ रहल अछि। परंपरागत अर्थशास्त्रक कोनो फार्मूला बिहारक विकासक आंकड़ा मे फिट नहि बैस सकैत अछि। ‘4सी’ मे नुकायल बिहारक विकासकछवि तकबा लेल हम विज्ञापन पर नजरि जमा लेलहुं। सेल (मोबाइल), कार, क्लीनिक आ कोचिंग। पटनाक सड़क लागल इ चारि तरहकविज्ञापन बता रहल छल जे बिहार विकास मे कोन क्षेत्रक योगदान अछि।
सही मायने मे देखल जाए त इ चारिटा क्षेत्रक विकासक पाछु सरकार क स्तर पर लेल गेल किछु निर्णय अछि, जाहि स बिहारक लोक कए एहि क्षेत्रक विकास करबा मे महत्वपूर्ण सफलता भेटल।
आइ बिहार विहार योग्य बनल एकर पाछु सरकार स बेसी एहि ठामक जनता क भूमिका रहल। जेकर उदाहरण आयकर चौराहा पर देखबा मे आइल। एहि ठाम राजद कार्यकर्ताक भारी भीड़ छल। प्रशासन सेहो सचेत छल। रिक्शा पर सामान देखि एकटा महिला कार्यकता पूछलक,’बाहर से आए हैं?’ हमर उत्तर हां मे छल। पुलिस कए एबा स पूर्वहि ओ हमर रिक्शा बाला कए एक फटका(लाठी) मारि आगू बढ़बाक हुक्म देलक। ओना एहन आंदोलन मे किछु अराजक तत्व अपन हाथ साफ करि लैत अछि, मुदा राजद कार्यकर्ता मे सहो एहि बेर परिवर्तन देखबा मे भेटल।
इ सब देखि उम्मीद जगल जे बिहार जनता 2005 मे नीतीश कुमार कए जाहि विधि क शासन लेल मुख्यमंत्री बनौलक, नीतीश ओहि जंगल राज कए समूल नष्ट करबा लेल बिहारकजनताक संग छथि।
विधि-व्यवस्था कए पुनस्र्थापित करबा लेल बिहारकजनताकए नीतीश सरकारक सहयोग भेट रहल अछि। 2008 मे अपहरण क मात्र 66 घटना एकर प्रमाण अछि। चार वित्तीय वर्ष मे 31 मार्च, 2009 तक राज्य क वार्षिक विकास दर 10. 5 प्रतिशत रहल। इ राष्ट्रीय औसत स बेसी अछि। कृषि हुए या लघु उद्योग, बिहार क अर्थव्यवस्था अत्यंत अस्थिर छल। 1990 क दशक क मध्य क सालों मे इ दर्शनीय रूप स बढ़ल सेहो। लेकिन, वर्तमान उछाल बेसी दीर्घकालिक अछि। एहन हेबाको चाही, कियाकि विस्तार क एहि दर क बाद सेहो प्रति व्यक्ति आय क मामला मे महाराष्ट्र क समान हेबा मे एखन 18 वर्ष क समय लागि जाएत।
रिक्शा बोरिंग रोड स्थित हमर मकानक आगू छल, मुदा सामने बनल मौर्य टीवीक कार्यालय स मोहल्लाक रूप बदलि चुकल छल। नहि बदलल छल त बस हमर मकान। घर ओहने छल।

रिपोर्टाज क शेष भाग काल्हि…..

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