मैथिली कए सम्‍मान देबा लेल 1975 मे तैयार भए गेल छलाह अटल

जखन मिथिला मिहिर कए कहने छलाह अटल, संविधान में मैथिली होएत शामिल

आई सं बयालीस साल पहिने हमर पिता श्री पद्म नारायण झा विरंचि आ इंडिनय नेशन कए देवेंद्र पाठक (जे बाद मे अखबारक संपादक सेहो भेलाह) मिथिला मिहिर के लेल पटना में अटलजी के साक्षात्कार लेने छलखिन्ह। ओ साक्षात्कार ओहि समय सेहो न्यूज एजेंसीक माध्यम सं कयक जगह प्रकाशित भेल लेकिन मास धरि बादे आपातकाल के घोषणा भय गैलैक आ एकरा विशेष चर्चा नहि भेटि पेलैक। चर्चो होइक त वाजपेयी द्वारा मैथिली भाषा के अष्टम अनुसूची में देल गेल समर्थन सं बेसी नहि। वाजपेयीके एहि साक्षात्कार में विदेशनीति, कश्मीर समस्या, नेपाल, देशक अंदरूनी राजनीति, भारतीय कम्यूनिस्ट सभहक सोवियत कनेक्शन, अमेरिका, रूस, चीन इत्यादि विषय पर हुनक स्पष्ट दृष्टिकोण सामने अबैत अछि, जहि पर एखनो भारतीय जनता पार्टीके सरकार चलि रहल अछि आ ओहि नीति में निरंतरता आश्चर्यजनक छैक। श्री वाजपेयी द्वारा सन् 2003 में कोसी पुलके शिलान्यास के क्रम में मैथिली के अष्टम अनुसूची में शामिल करबाक घोषणा के पाछू मैथिली-अभियानी सभक आन्दोलन त छलहे, एहि साक्षात्कारक सेहो पैघ योगदान अछि जाहि में वाजपेयी अहि विषय पर सन् 1975 में अपन मंतव्य स्पष्ट कय चुकल छलाह। – सुशांत झा

रवि, 18 मई 1975, मिथिला मिहिर

वर्चस्वी नेता अटल बिहारी वाजपेयी संग विशेष अंतरंग वार्ता: श्री पद्मनारायण झा ‘विरंचि’/ श्री देवेंद्र पाठक

ओना विभिन्न दलक नेता-राजनेतालोकनि अपन-अपन दलक हितक दृष्टिसं जे सार्वजनिक सभा में भाषण दैत छथि किंवा प्रेस-वक्तव्य द्वारा अपन विचार प्रकट करैत छथि से प्रकारांतरसं सतही ओ प्रचार सामग्रीसं भिन्न नहि होइत अछि, किंतु भेंट वार्ताक माध्यमसं आ प्रश्नोत्तरक क्रम में जे विषय वस्तु प्रकट होइत अछि से निश्चिय ओहिसं भिन्न होइत अछि। कारण, प्रश्नकर्ताक सजगता, उत्तर देनिहारकें तर्कक निर्रथक जाल छिड़ियाय कS पड़ाय नहि दैत छनि। आ तें जे गप्प ओ प्रत्यक्षत: स्पष्ट नहि करS चाहैत छथि, प्रकारान्तरसं हुनकासं कहाइये जाइत छनि। भेंटवार्ताक एहि विशिष्टताक कारण एम्हर ‘मिथिला मिहिर’क दिससं  विशेष भेंटवार्ताक आयोजन कयल गेल अछि जकर ई एक विशिष्ट कड़ी थीक। मैथिली सहित देश-विदेशक समस्या पर श्री अटल बिहारी वाजपेयी केहेन विचार रखैत छथि, से पहिले पहिल प्रत्यक्ष वार्ताक रूप में मैथिलीक पाठकत समश्र राखल जा रहल अछि। – सम्पादक

“मैथिली भाषाक के संविधानक अष्टम अनुसूची में अविलम्ब स्थान भेटवाक चाही “- ई उक्ति अछि जनसंघक वर्चस्वी नेता श्री अटल बिहारी वाजपेयीक, जे मिथिला मिहिर के देल गेल एक विशेष भेंटवार्ता में ओ कहलनि अछि।

वाजयेपी जीसं भेंट करवाक हमरालोकनिक प्रमुख उद्येश्य मैथिली भाषाक संबंध में हुनक आ हुनका दलक दृष्टिकोण सं परिचित होयब तथा ओकरा प्रेरिक-प्रभावित करब छल। मैथिलीक प्रसंग सन् 67क संविद सरकारक समय जनसंघ दवारा उर्दूक स्थानपर मैथिलीकें बिहारक द्वितीय राजभाषाक रूप में समर्थनक गप्प उठिते श्री वाजपेयी हुलसि कS बजलाह- “तें की, हमर दल उर्दूके काटबाक उद्येश्य-सं मैथिलीके समर्थन कयने छल?” एक क्षण चुप रहि ओ पुन: बजलाह-मैथिली के समर्थन हमरा लोकनि मैथिलीक क्षमता, एकर विशिष्ट गरिमा आ मिथिलांचलक प्राचीन सांस्कृतिक आधारपर कयने रही। मैथिलीक प्रति जनसंघक समर्थन कोनो अन्य भाषाके प्रति ईर्ष्या अथवा आकोषसं प्रभावित नहि छल।” तहिना सिंधीक मान्यताक प्रश्नपर चर्चा उठैत ओ बजलाह- “मैथिली निश्चित रूपसं सिंधीसं श्रेष्ठ साहित्यक संरक्षक अछि तथा ई भाषा एक गोट व्यापक क्षेत्रक अभिव्यक्तिक माध्यम अछि, जखन कि सिन्धी कोनो क्षेत्र-विशेषक अधिकारिणी नहि रहल। – अहांलोकनि अहि बातकें नोट करू जे मैथिलीकें अविलंब संविधानक अष्टम अनुसूची में स्थान भेंटवाक चाही, ई हमर मांग अछि, हमरा दलक मांग अछि। “

मैं कहां कहता हूं कि मैथिली, हिंदी है। मैथिली, मैथिली है। जनसंघ, मैथिली का समर्थन उसकी क्षमता और विशिष्ट गरिमा के कारण करता है। मैथिली, सिन्धी से श्रेष्ठ साहित्य की संरक्षिका है। भारतीय संविधान में अविलंब मैथिली को सम्मिलित किया जाना चाहिए। – श्री अटल बिहारी वाजपेयी

राष्ट्रीय नेताक सानिध्य

श्री अटल बिहारी वाजपेयी जनसंघक सर्वोच्च नेता नहि, अपितु जानल-मानल राष्ट्रीय नेता के रूप में सेहो ख्याति अर्जित कयने छथि। तें गत सात मईक अपराह्न साढ़े तीन बजेसं संध्या पांच बजे धरिक समय हुनका सानिध्यसं हमरालोकनिक हेतु अविस्मरणीय बनि गेल अछि। स्थानीय अधिवक्ता श्री विष्णुदेव बाबूक ओहि ठाम ओ माथ दर्दक स्थिति में विश्राम करैत छलाह आ तत्काले बाद हुनका गांधी मैदानक सार्वजनिक सभामें भाषण करबाक हेतु जयबाक छलनि । मुदा, ‘मिथिला-मिहिर’क नाम सुनिते ओ तत्क्षण बहरयलाह आ चिर-परिचित जकां हमरासभक स्वागत कयलनि। मैथिलीक प्रति हुनक आवेश कोनो तरहे नुकायल नहि रहल ।

‘मिथिला मिहिर’क प्रति के स्वीकारैत ओ तत्क्षण बजलाह- “वाह!  बहुत बढ़िया पत्रिका अछि। नाम त हमरा पहिनेसं सूनल छल । ” ओ पुन: भीतरक पन्ना उनटबैत आ भिन्न-भिन्न शीर्षकसभकें पढ़बाक प्रयास करैत, यथा: ” मुख्यमंत्री डॉ मिश्रसं विशेष भेंट-वार्ता’ ‘सूतर छी आ ब्याह होइत अछि ‘ तथा ‘तीन गोट कविता'(मिहिर: 27 अप्रैल) मुस्कुराइत बजलाह- “मैथिली हमरा बुझवा में दिक्कति भS रहल अछि, ओना किछु-किछु बुझि जाइत छी।” एकरा उत्तरमें जखन ई कहलियनि जे मैथिली, मैथिली थीक…तं ओ तत्काल ठहक्का लगबैत बजलाह- “हम कहां कहैत छी जे मैथिली हिंदी थीक। वस्तुत: मैथिली, मैथिली थीक।”

राष्ट्रीय प्रश्न: असहमतिक स्वर

जनसंघक सर्वोच्च सूत्रधारसं जाहि आत्मीय वातावरणमें हमरालोकनिक गप्प भS रहल छल ओ राष्ट्रीय प्रश्नसभपर हुनक दृष्टिकोण आ विचार जनवाक एक गोट विशिष्ट अवसर छल । ओ छोट आ पैघ, सब तरहक निश्छल मुस्कराहटि आ आत्मीयताक संग उत्तर देलनि आ किछु प्रश्न एहनो छल जकर उत्तरक क्रममें ओ प्रश्न सेहो ठाढ़ कय देलनि। एहि प्रश्नक उत्तरमें जे जनसंघक घोषित सिद्धांत तं प्रारंभेसं प्रत्येक तरहक अराजकता आ राष्ट्रिय संपत्तिक क्षतिक विरोध में ठाढ़ होयबाक रहलैक अछि, तखन फेर वर्तमान आन्दोलनक समर्थन करबाक पाछां की औचित्य अछि, श्री वाजपेयी बजलाह- “अहां ठीक कहि रहल छी । जनसंघ कथमपि कोनो एहन आन्दोलनक समर्थन नहि कS सकैत अछि  जाहिसं राष्ट्रिय संपत्तिक क्षति अथवा अराजकता पसरबाक संभावना होइक ! हम गत वर्ष आन्दोलनक प्रारंभेमें पटनामें अहि तरहक चेतौनी सेहो देने रही । मुदा, अहि आन्दोलनक हमरा दल द्वारा समर्थनक औचित्य पर अहांके ई विचार करबाक चाही, जे हिंसा आ अराजकताक प्रादुर्भाव अहि आन्दोलनक कारणे भS रहल अछि अथवा  आन्दोलनकें मटियामेट करबाक हेतु एकर विकास भS रहल अछि ? जतय धरि बिहार आन्दोलनक प्रश्न अछि, जनसंघ एकर शांतिपूर्ण चरित्र आ राष्ट्रिय उद्येश्यक कारणसं समर्थन कS रहल अछि।”

हमरालोकनि जनसंघ-नेतासं देशक आन्तरिक समस्यासं संबंधित भिन्न-भिन्न तरहक प्रश्न कयलियनि।

प्रश्न:  प्रतिपक्षी दलक बीच जखन चुनावो लडवाक प्रश्न पर सहमति नहि रहैत अछि, तखन की अपने ई आशा रखने छी जे चुनावक बाद सरकार चलयबाक प्रश्नपर एकमत होयत?

उत्तर: (हंसी) एकताक अभाव में सरकार केहन ?  सरकार संघटित करबाक हेतु सत्तारूढ़ दल कए पराजित करS पड़त, आ ताहि हेतु एकता चाही । सिद्धांतरूप में अहांके कथन सं हमरा कनेको विरोध नहि अछि, मुदा जहां तक कांग्रेसक पराजय आ प्रतिपक्षी दलक एकताक प्रश्न छैक, ओहि संबंध में ई स्मरण राखू जे राजनीतिक दलक आ एकता आ संघर्षक उत्पत्ति ऐतिहासिक परिस्थितिक कारणे होइत छैक ।

प्रश्न: अग्रिम चुनाव में अपनेक दल मार्क्सबादी कम्युनिस्ट पार्टींस चुनाव-समझौता कS सकैत अछि?

उत्तर : मार्क्सबादी सं जनसंघक चुनाव समझौताक कोनो प्रश्ने नहि उठैत अछि।

प्रश्न: सोशलिस्ट पार्टी आ मार्क्सबादी दल आदिक ‘वामपंथी जनतांत्रिक मोर्चा’ जं पुन: सक्रिय भS जाय, तं की एहन स्थिति में जनसंघ, सोशलिस्ट पार्टींस  सेहो समझौता तोड़ि लेत ?

उत्तर: नहि । सोशलिस्ट पार्टीसं हमर चुनाव समझौता कोनो स्थिति में भS सकैत अछि । ओना हम ओकरा सुझाव देबैक जे ओ सीपीएम सं फराक हटि जाय ।

प्रश्न:  राजनीतिक दलSक  बाढ़िक सम्बन्ध में अपनेके की विचार अछि ? वर्तमान व्यवस्था में कोन-कोन दलक औचित्य भS सकैत छैक ?

उत्तर : औचित्यक में हम नहि कहब, तखन एतबा निश्चित जे दलक संख्या में कमी होयबाक चाही । वर्तमान आन्दोलनक प्रभाव राजनीतिक दलक संख्या-वृद्धि पर निश्चित रूपसं पड़त ।

प्रश्न: की निर्दलीय जनतंत्र आ ‘जनता’ उम्मीदवारक अवधारणा में कोनो तरहक साम्य अछि ?

उत्तर : ‘जनता’ उम्मीदवारक अवधारणा वस्तुत: निर्दलीय परिवेशसं बेसी सर्वदलीय सहमतिके प्रकट करैत अछि तथा राजनीतिक दलक सत्ता-लोभकें जनताक गंगा-यमुना मे विसर्जित करबाक प्रयत्न करैत अछि । जखन कि ‘निर्दलीय जनतंत्र’ क अवधारणा एक गोट राजनीतिक दर्शन थीक जे संविधान आ लोकतंत्र क हस्तक्षेप, धमकी आ  दबाव सं मुक्त रखबाक हेतु श्री जयप्रकाश नारायण द्वारा प्रस्तुत कयल गेल अछि । मुदा, अहि निर्दलीय जनतंत्र के स्थापित करबाक हेतु सेहो एक गोट मजबूत दल चाही ।

(ई कहि वाजपेयी हंसि उठलाह, प्राय: तात्पर्य छलनि जे अहि आन्दोलन में जनसंघे मात्र एहन दल अछि जे जयप्रकाशजीक निर्दलीय जनतंत्रक स्थापनाक क्षमता रखैत अछि।)

प्रश्न: सत्तारूढ दलपर अपनेलोकनिक आरोप अछि जे ओ अलोकतांत्रिक आचरण कS रहल अछि-जखन कि प्रतिपक्ष कए अपन बात कहबाक सब तरहक सुविधा एखनो प्राप्त छैक ?

उत्तर : राजनीतिक दलक संग लोकतंत्र में सत्तारूढ़ दलके जाहि तरहक व्यवहार करबाक चाहिएक से आइ कोनो रूप में नहि भ रहल अछि ।  आइ देश में राजनीतिक हत्याक बाढ़ि आबि चुकल अछि-जहल मे राजनीतिक बंदी सभ भिन्न-भिन्न बहान्‍नासं गोलीसं उड़ाओल जाइत अछि । प्रदर्शन आ जुलूसपर एक सय चौआलीस लगा देल जाइत अछि । श्री जयप्रकाश जीक भाषणकें आकाशवाणी पूरा ‘ब्लैकआउट’ कS दैत अछि । अहि तरहें सरकारक लोकतंत्र-विरोधी आचरणक कतेक प्रमाण गनाऊ ?

प्रश्न:  कांग्रेसक वर्तमान नेतृत्वक प्रति अपनेक की विश्लेषण अछि?

उत्तर : कांग्रेसक वर्तमान नेतृत्व अधिनायकवादक रस्तापर जा रहल अछि । पण्डित जवाहरलाल नेहरू संसदक प्रति सर्वाधिक जागरूक रहैत छलाह, जखन कि श्रीमती गांधी उपेक्षापूर्ण दृष्टिकोण रखैत छथि-विरोधी दलक प्रति अत्यधिक असहिष्णु छथि ।

संगहि, वर्तमान नेतृत्व कम्युनिस्ट पार्टीक पक्षधर सेहो अछि तथा एहि तथ्य के ओ सोवियत-भारत मैत्री सं झंपवाक कुचेष्टा करैत अछि । जखन कि सोवियत मैत्री आ भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी दुनू दू वस्तु थीक । कांग्रेस-विभाजनक समय कम्युनिस्ट मित्रताक रहस्य बुझवामें अबितो छल-मुदा आइ अहि गठबंधनक की औचित्य अछि से नहि जानि !

एकर अतिरिक्त वर्तमान नेतृत्व एक एहन राजनीतिक दलक कार्यकलापकें प्रतिबिम्बित क रहल अछि जे नंबर दू के पाइपर पलि रहल अछि तथा भीतर आ बाहरसं चारित्रिक संकटक सामना कS रहल अछि… ।  दलेक भीतर सभके सभ चोर कहैत छैक ।

प्रश्न: आगामी लोकसभा चुनावमें ‘जनता उम्मीदवार’क विजयक बाद की अपने संविधानसभाक पुनर्संघटनक संभावना देखि रहल छी ?

उत्तर :  कोनो कार्यक पाछां ओकर औचित्यपर विचार करS पड़त ।  हमरा विचारसं गत छब्बीस वर्षक अभ्यंतर संविधानकें लागू करबामें कोन-कोन त्रुटि रहल अछि, तकर जांच-पड़ताल होयबाक चाही । सत्ताक विकेंद्रीकरण, केंद्र-राज्य संबंध, राज्यक आर्थिक क्षमता आ ओकर स्रोत, नागरिकक मूल अधिकार आदि समस्या कए दृष्टिमें रखैत संविधानपर आयोगक गठन अवश्य होयबाक चाही । अहि आयोगक अनुशंसाक बादे संबिधानसभाक पुनर्संघटनक मांग उठाओल जा सकैत अछि।

प्रश्न: लोकसभा आ विधानसभा सं प्रतिनिधिकें वापस बजाओल जाय, एहि प्रसंग अपनेके की मन्तव्य अछि?

उत्तर :  सिद्धांतत: हम सहमत छी । मुदा, अहि नागरिक अधिकारक उपयोग कोन संस्थाक माध्यमसं, कोन तरहक परिस्थितिमें  तथा कोन प्रक्रियाक अंतर्गत कयल जाय, से गंभीर विचारणीय विषय । ओना हारलाहा उम्मीदवार सभ मतदानक तत्काले बादसं हस्ताक्षर अभियान चालू कS देत आ फेर विजेता व्यक्तिके लेल मोश्किल भS जयतैक । हं, तुलमोहनक राम  सनक प्रतिनिधिकें कोनो परिस्थिति में अवश्ये बजा लेबाक चाही। (हंसी)

प्रश्न:  कलकत्ता में जयप्रकाशजीपर लाठी प्रहार आ मोरारजी भाइक अनशन पर प्रतिपक्षक अनुकूल प्रतिक्रिया व्यक्त क की श्री शेख अब्दुल्ला पुन: नव भूमिकाक संकेत दS रहल छथि?

उत्तर : शेख अब्दुल्ला जिनगीक व्यापक अनुभव प्राप्त कS चुकल छथि आ सत्ता सं संघर्षक स्थिति में रहल छथि । आइ ओ पुन मुख्य राष्ट्रीय धाराक संग छथि, जकर सत्तारूढ दल आ प्रतिपक्ष भिन्न-भिन्न कछेड़ अछि । ओ अपन विचारक आधार पर कोनो पक्ष ग्रहण कS सकैत छथि । ओनास हालक हुनक वक्तव्य सभ हुनक नब भूमिकासं बेसी हुनक सुदृढ़ चरित्रक परिचय दैत अछि।

प्रश्न: बंग्लादेशक अभ्युदयक बाद श्री शेख अब्दुल्लाक संग दिल्ली में अपनेक जे गुप्त वार्ता भेल छल, तकर बाद सं हुनक दृष्टिकोण मे की कोनो उल्लेखनीय अयलनि अछि ?

उत्तर : जहिया शेखक संग हमर पहिल वार्ता भेल छल ओहि समय में हुनक दृष्टिकोण छलनि पाकिस्तान सं शांति बनाओल रखबाक तथा झंझट सोझरयबाक हेतु जं पाक अधिकृत कश्मीर दS देव पड़य तं से पाकिस्तान के दS देल जाय । संगहि भारतक अभिन्न अंग रहितो कश्मीरक द्वार पाकिस्तानी पर्यटक सभक हेतु खोलि देल जाय । शेखक विचार ईहो छलनि जे श्रीनगर-रावलपिंडी सड़क मार्ग कए चालू राखल जाय, अहि हेतु जे बरफक समय मे  श्रीनगर-जम्मू मार्ग अवरुद्ध भ जाइ छैक आ कश्मीर कए व्यापार मे घाटा उठबS पड़ैत छैक। कखनोकाल तं श्रीनगर मे नोन भेटव सेहो कठिनाह भS जाइत छैक ।…मुदा जहांधरि एखुनका गप्प अछि, त भारत सरकार पाक-अधिकृत कश्मीर कए दखलिअयबाक प्रयास करय तं शेख निश्चिते रूप सं ओहि में सहायक  होयताह।

समहतिक क्षेत्र

एकरा संगे किछु क्षेत्र एहनो अछि, जाहि ठाम वर्तमान व्यवस्था आ ओकरा दृष्टोकोण सं श्री वाजपेयी प्राय: सहमत जकां बुझयलाह । ई क्षेत्र थीक, भारत सरकारक विदेशनीतिक । ओना, किछुए दिन पूर्व चीनी दूतावास पर कांग्रेसी सांसद शशिभूषणक नेतृत्व मे भेल प्रदर्शन पर ओ तीव्र प्रतिक्रिया व्यक्त करैत कहलैन- “चीनी दूतावास पर कांग्रेसी सांसद शशिभूषण द्वारा प्रदर्शनक नेतृत्वक की अर्थ होइत अछि ? अन्ततोगत्वा, अहि मे की रहस्य भS सकैत अछि जे एतेक दिनका बाद कांग्रेसी लोकनि कए तिब्बतक स्वतंत्रताक स्मरण अयलनि अछि ? हम, जयप्रकाशजी, डॉ लोहिया आ कृपलाणीजी आदि तिब्बतक प्रश्न कए उठौने रही तं हमरालोकनिके प्रतिक्रियावादी कहलगेल छल, फेर आइएहि “प्रगतिशील” सभ कए तिब्बतक प्रति सहानुभूति किएक जगलनि ? की, कतहु सोवियत संघक संकेत पर चीनक संग ‘दू-दू हाथ’ करबाक तैयारी भारत सरकार तं नहि कS रहल अछि?

एकर अतिरिक्त वाजपेयीजी सं हम निम्नलिखित प्रश्न कयलयन्हि।

प्रश्न: की अपने भारत सरकारक नेपाल-सम्बन्धी नीतिसं सहमत छी?

उत्तर : सहमति-असहमतिक कोनो विशेष बात नहि अछि । मूल बात ई अछि जे नेपाल एकटा पैघ देशक एहन छोट पड़ोसिया थीक, जकरा दोसर दीस सेहो एकटा पैघ राष्ट्र छैक । एहना स्थिति में नेपालक शंकालु आ चतुर भS जायव स्वभाविक । तखन, एतवा धरि निश्चित जे नेपाल आ भारतक जनता कोनो स्थिति मे एहि दुनू देशके एक-दोसराके विपरीत नहि जाय देतैक ।

प्रश्न:  अमेरिका एखनो धरि अपनाकें विश्व लोकतंत्रक रक्षक बुझि रहल अछि । एहि संबंध में अपनेकें की विचार अछि?

उत्तर :  अमेरिकाक भीतर मे लोकतंत्र अवश्य छैक, मुदा बाहर मे अधिनायकवाद छैक । हम लोकतंत्रक रक्षाक नामपर अमेरिकाक सैनिक अड्डा आ उपनिवेशवादी नीतिक घोर विरोधी छी ।

प्रश्न: सोवियत संघक विदेशनीतिक प्रति अपनेक की विश्लेषण अछि?

उत्तर : हम सोवियत संघसं मित्रता आ सक्रिय सहयोगक प्रशंसक छी। मुदा, आब अमेरिका-रूस के अतिरिक्त चीनक विश्वशक्तिके रूप में पादुर्भावसं सोवियतसंघक नीति में क्रमिक परिवर्तन आबि रहल छैक आ ओ अमेरिकाक संग मीलिकS क्रमश: संसारके अपन प्रभावमें बंटवाक नव तैयारी कय रहल अछि। मध्य-पूर्व एशिया आ भारतक संबंध में अहि तरहक प्रच्छन्न सहमतिक नीतिक एक तरहें जन्म भय चुकल अछि। एकर परिणाम ई होयत जे विकासशील देश सेहो अपन नव भूमिकाक निर्धारण करत।

प्रश्न: वियतनाम युद्धक समाप्ति पर अपनेके की प्रतिक्रिया अछि? की दुनू वियतनामक एकीकरण तत्काल संभव छैक?

उत्तर : वियतनाम युद्ध में राष्ट्रवादी तत्वक विजय भेल अछि। ओना ई बात निश्चित जे एहि राष्ट्रीय संघर्ष में कम्यूनिस्ट तत्वक महत्वपूर्ण योगदान छलैक। तथापि, वियतनामक लोक कोनो विदेशी सेनाकें अपना धरतीपर सहायतार्थ उतरबाक आमंत्रण नहि देलक। जहांधरि एकीरकरणक प्रश्न छैक, ओहि संबंध में कोनो तरहक भविष्यवाणी नहि कयल जा सकैत अछि। ओना, हम चाहव जे चुनावक माध्यमसं जं सरकारक गठन होइक तं वियतनामक अधिकांश आंतरिक समस्याकें सोझरयबामें सहायता भेटतैक।

गति में काव्य

श्री वाजपेयी जें कि जिनगीक प्रारंभ में कवि रहल छलाह तें हेतु हुनकासं ई पूछब स्वभाविक छल जे आब अपने कविता लिखब कियेक छोड़ि देने छी। एहि प्रश्नक उत्तर में वाजपेयीजी बजलाह- “हं, पहिने हम कविता लिखैत रही, मुदा आब छोड़ि देने छी। आब त हमरा गतिए में काव्य बाजि रहल अछि।” किछु क्षण मौन रहि ओ पुन: कहलनि- “सक्रिय राजनीति आ कवितामें बड़ विरोध छैक। कविताक हेतु समय आ एकाग्रता चाही, जे हमरा नहि भेटि पबैत अछि।”

हमरालोकनिक मित्र तथा प्रभावी मैथिली-साहित्यकार श्री मार्कंडेय प्रवासीजी तत्क्षण प्रश्न कयलथिन- “एहि बात पर जं कवि लोकनि अपनेके घेराव करथि तखन?”

-“हम हुनकालोकनिकें कविता सुनब लगवनि”, वाजपेयीजीक उत्तर छल।

नव कविताक संबंध में श्रीवाजपेयीक कहब छलन्हि-“नव कविता हम पढ़ैत छी आ ओ हमरा नीक लगैत अछि। नव कविता में युगक समस्या और ताहू सं अधिक ओकर विभिषिकाक दर्शन होइत अछि।”

वाजपेयीजी अविवाहित छथि, तें एहि संबंध में ककरो जिज्ञासा होयब स्वभाविक। जखन हुनका सं ई पुछलयन्हि जे देश-सेवा करबाक हेतु की पारिवारिक दायित्वसं मुक्त रहबाक स्थिति अधिक आदर्शमूलक अछि, तं वाजपेयी कतेक गंभीर होइत बजलाह- “देश-सेवा करबाक हेतु पारिवारिक दायित्वसं मुक्त रहब एकगोट सुविधाजनकक स्थिति भS सकैत अछि, कारण एहिसं काज करबाक हेतु अधिक समय भेटैत छैक तथा व्यक्तिके सामान्यत: स्वार्थसं पृथक रहबाक अवसर प्राप्त होइत छैक। मुदा, हमरालोकनिसं(अर्थात अविवाहित नेता लोकनिसं) श्रेष्ठ ओ लोकनि छथि जे पारिवारिक दायित्वक वहन करैत देश आ दलक सेवा करैत छथि।”

अन्त में चलबाक समय श्री वाजपेयी अपन शिष्टता आ विनोदक आत्मीय स्वर में कहने बिना नहि रहलाह-“देखब, भगवन! नोन-मेरचाई उक्ति में नहि लगबैत जायब।” जहिना जे कहलहुं अछि,तकरा तहिना छापब। ई कहि ओ पुन: मुक्त कंठ सं हंसि पड़लाह।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

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