जमानतो नहि बचा पउलथि कई टा दिग्गज

पटना। 2009 क आम चुनाव क बारे मे इ बहुप्रचारित ठल जे एहि मे न कोनो मुद्दा क आकर्षण अछि, न कोनो चमक। कतहु कोनो लहर नहि। सब किछु साइलेंट, फीका-फीका। मुदा, एहि बिना हवा-बयार कए चुनाव मे प्रदेश क कई दिग्गज चेहरा हवा भ गेल। जनता हुनकर जमानत तक जब्त करवा देलक। नतीजा बता रहल अछि जे एहि चुनाव मे ओवर नहि, अंडर करंट छल। वोट मजे मे छिटकल आ कईटा क हैसियत हाशिया पर लगा देल गेल। हवा क रुख देखि पीठ करबा लेल विख्यात इ नेता लोकनि एहि चुप लहर कए चिन्हबा मे चूकि गेलाह। धरातल पर पकि रहल नव समीकरण, करवट ल रहल जन आकांक्षा क तार शायद ओ पकडि़ नहि सकलाह। लालू प्रसाद, पाटलिपुत्र मे पटका गेलाह। जॉर्ज फर्नाडीज ओहि मुजफ्फरपुर मे जमानत गवां बैसलाह, जतय स ओ पर्याय मानि लेल गेल छलाह। संसदीय चुनाव क्षेत्र बदलि-बदलि कए जीतबा मे माहिर रघुनाथ झा सेहो एहि बेर चारू खाना चित भ गेलाह। ओ 1998 क चुनाव शिवहर स, 1999 मे गोपालगंज स, तो 2004 मे बेतिया स जीत कए संसद गेलाह। ओ फेर क्षेत्र बदलि संसद जेबाक प्रयास मे छलाह। वाल्मीकिनगर क जनता मुदा एहि बेर हुनकर मंशा बुझलग आ हुनकर जमानत तक नहि बचल। प्रदेश मे एहि बेर सेहो पिछला आम चुनाव क जेकां 80 फीसदी स अधिक उम्मीदवार क जमानत जब्त भेल। एहि मे निर्दलीय बहुतायत मे छथि, मुदा दलीय शिनाख्त आ प्रदेश क राजनीति मे मायने रखनिहार कईटा पैघ नाम सेहो एहि कतार मे छथि। अररिया स लगातार जीत क रिकार्ड बना चुकल सुकदेव पासवान कए एहि चुनाव मे मात्र 9015 वोट भेटल। पासवान क ताकत तखन छल, जखन क्षेत्र सुरक्षित छल। एहि बेर संसदीय सीट सामान्य की भेल ओ एकदम धराशायी भ गेलाह। मधुबनी स कांग्रेस क डॉ शकील अहमद सेहो अपन जमानत नहि बचा सकलाह। सांसद बनबाक तमन्ना मे राजद क रमई राम पाला बदलि कांग्रेस मे गेलाह। गोपालगंज स चुनाव लड़लाह आ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम-1951 क धारा 158 (4) क चपेट मे आबि गेलाह। यानि हुनकर जमानत राशि जब्त भ गेल। मंत्री वृषिण पटेल, कांग्रेस नेता विजय शंकर दुबे, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष सदानंद सिंह, पूर्व सांसद गिरधारी यादव, रामस्वरूप प्रसाद, विजय सिंह यादव, डॉ अरुण कुमार, निखिल कुमार आ गणेश शंकर विद्यार्थी सेहो जमानत नहि बचा सकलाह।

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