तिरहुता लिपिक प्रचार प्रसार लेल जे संभव होएत से कैल जायत : संजय

तिरहुता के संरक्षण ओ संवर्धन हेतु गोष्ठी क आयोजन।
दरभंगा।  जदयू महासचिव संजय झा कहलनि मैथिली के संरक्षण, संवर्धन लेल जे काज केंद्र सरकार शुरु केलक अछि ओ आब रुकैय वाला नहि अछि। तिरहुता लिपिक प्रचार प्रसार लेल जे संभव होएत से कैल जायत। मिथिलाक लोक सब सुझाब दथि त सरकार ओहि पर आगूक बाट तय करत। श्री झा कहला जे तिरहुता लिपिक लेल जे समिति गठित भेल अछि ओ एकटा एतिहासिक पहल अछि आ एकर प्रतिफल बहुत जल्दज देखबा लेल भेटत।
एहि स पूर्व शनि दिन तिरहुता लिपि क संरक्षण संवर्धन हेतु सुझाव संकलित करबाए हेतु कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय क दरबार हॉल मे केंद्र सरकार क एच आर डी मिनिस्ट्री द्वारा गठित कमिटी के सदस्य सबहक उपस्थिति मे विचार गोष्ठी क आयोजन कयल गेल। ई आयोजन जदयू के राष्ट्रीय महासचिव सह पूर्व विप सदस्य संजय झा की नेत‌त्व मे सकल मिथिला समाज द्वारा आयोजित कयल गेल।
कार्यक्रम मे संस्कृत विश्वविद्यालय  क कुलपति प्रो सर्वनारायण झा कहलनि जे भाषा आ लिपि मे संस्कृति समाहित रहैछ। तेँ भाषा आ लिपि दुनू के संरक्षण आवश्यक। अन्य भाषा का संरक्षण, संवर्धन लेल अपनाओल जाय वाला नीति मिथिलाक्षर लेल बेहोश जरूरी अछि।
कुलपति उड़ीसा, कर्नाटक सहित अन्य राज्य के उदाहरण दैत कहलथि जे ओतय भाषा आ लिपि एक होयबाक कारणे लिपि सुरक्षित अछि परंतु भाषा विविधता के कारणे तिरहुता उपेक्षित अछि। एकर संरक्षण, संवर्धन मे फाॅट से संबंधित कोनो तकनीकी बाधा नहि छैक। ओ सुझाव देलनि जे तिरहुता मे दुर्गा सप्तशती, कार्टून,आदि के प्रकाशन हो आ तिरहुता में लिखल मैथिली साहित्य के साहित्य अकादमी पुरस्कार देब उचित होयत। डॉ वैदिक एकरा रोजगार परक शिक्षा सँ जोड़ा क सुझाव देल आ प्रारंभिक कक्षा से एंकर पढ़ाई अनिवार्य करबाए के सुझाव देल।
लनामिवि के पीजी विभागाध्यक्ष डॉ रमण मैथिली पढ़निहार के अखरकटू  नहि पटु सोबर पड़तैन।
कमेटी सदस्य भवनाथ झा कहलनि वैश्विक स्तर पर पहचान दियेबा के हेतु तकनीकी रूपेँ दृढ़ कर पड़त।  एहि अवसर पर मंजर सुलेमान, पिनाकी शंकर ,रोशन कुमार, विजय शंकर पंडित सेहो अपन विचार रखलैन्ह।

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