तिरहुता आ कैथी लिपि प्रशिक्षण कार्यशाला क भेल समापन,दू सय गोटे भेलाह प्रशिक्षित

विनीत ठाकुर

दरभंगा। महाराजा महेश ठाकुर मिथिला महाविद्यालय दरभंगा क सभागार मे विगत सात दिन सँ आयोजित कार्यशाला क समापन शुक्र दिन अपराह्न मे भेल। भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर, मैथिली साहित्य संस्थान, पटना आ इंटेक, दरभंगा क संयुक्त तत्वावधान मे मिथिलाक्षर आ कैथी लिपि क प्रशिक्षण हेतु आयोजित कार्यशाला मे दू सय प्रतिभागी प्रशिक्षित भेलाह। मिथिलाक्षर क प्रशिक्षण प्रसिद्ध विद्वान आ कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय क व्याकरण विभागाध्यक्ष प्रो डॉ शशिनाथ झा, पंडित भवनाथ झा आदि द्वारा देल गेल त कैथी लिपि क प्रशिक्षण पंडित विजय शंकर मल्लिक देलन्हि।

समापन समारोह मे भारतीय भाषा संस्थान, मैसूर क सहायक निदेशक डॉ नारायण चौधरी भारतीय भाषा संस्थान के कार्यक्रम क अतिरिक्त मिथिलाक्षर आ कैथी लिपि आ भाषा क विकास क संबंध मे विस्तृत जानकारी देलनि। डॉ चौधरी भाषा विज्ञान क शोधार्थी सब केँ प्रोत्साहित करैत कहलनि जे एहि लेल संस्थान आर्थिक सहायता देत।

मैथिली साहित्य संस्थान, पटना क कोषाध्यक्ष डॉ शिव कुमार मिश्र जनौलनि जे एहि अंतर्राष्ट्रीय कार्यशाला से बहुतो भ्रम क निवारण भेल अछि। लिपि क संबंध कोनो एक भाषा से नहि अपितु क्षेत्र से होइत रहल अछि, ई भ्रम क निवारण एहि कार्यशाला द्वारा भेल जे लिपि कोनो क्षेत्र विशेष क नहि एकर क्षेत्र विस्तृत छैक आ संस्कृत भाषा क सबसे अधिक ग्रंथ अही लिपि मे अछि जकर अवलोकन दरभंगा क संस्कृत विश्वविद्यालय, विहार रिसर्च सोसायटी, पटना, मिथिला शोध संस्थान, दरभंगा क अतिरिक्त देश विदेश के अन्यान्य पुस्तकालय मे कैल जा सकैछ । उपलब्ध ताम्रलेख, प्रस्तर लेख सब मिथिलाक्षर मे अछि। कार्यशाला मे जापान, नेपाल, दिल्ली से आयल प्रतिभागी सबहक उपस्थित प्रमाणित करैछ जे देश क बाहरो लिपि जा रहल अछि।

तहिना कैथी लिपि सेहो कोनो जाति,क्षेत्र, वर्गक लिपि नहि प्रत्युत विहार आ उत्तरप्रदेश क विस्तृत क्षेत्र मे एकर उपयोग होइए। चंद्रधारी संग्रहालय, दरभंगा सहित अनेको पुस्तकालय मे पांडुलिपि कैथी लिपि मे अछि। अधिक संख्या मे प्रतिभागी सबहक अभिरूचि पर प्रसन्नता व्यक्त करैत डॉ मिश्र मैथिली साहित्य क पुस्तक क अप्रत्याशित विक्री पर संतोष व्यक्त कैलनि। डॉ मिश्र महाविद्यालय क सचिव डॉ वैद्यनाथ झा बैजू, मिडिया कर्मी आ प्रतिभागी सबहक आभार व्यक्त कैल आ प्राचीन अवशेष, प्रतिमा सबहक संरक्षण लेल आह्वान कयलनि।

कार्यक्रम केँ ऐतिहासिक कहैत ओ डाॅ भीमनाथ झा,श्री उदयचंद्र झा विनोद, प्रो डाक्टर शशिनाथ झा, प्रो डॉ वीणा ठाकुर, डॉ बैद्यनाथ चौधरी बैजू,श्री पंचानंद मिश्र सदृश्य मिथिला मैथिलीक कर्णधार द्वारा प्रतिभागी सब केँप्रोत्साहित करबाए लेल प्रसन्नता जनौलनि। साहित्य अकादमी पुरस्कार प्राप्त डॉ भीमनाथ झा द्वारा श्रीमती रेवती मिश्रा ( साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित) आ डा विभूति आनंद केँ प्रमाण पत्र देबा केँ सुखद क्षण कहलनि।ओ डा बैजू क मुक्तकंठेँ प्रशंसा करैत दोसर कार्यशाला क आयोजन करबा लेल अनुरोध कैलनि।

ललित नारायण मिश्र मिथिला विश्वविद्यालय क प्राचीन विभाग क विभागाध्यक्ष प्रो डॉ श्री अयोध्यानाथ झा उपेन्द्र ठाकुर लिखित प्रसिद्ध ग्रन्थ हिस्ट्री ऑफ मिथिला क प्रति जापान क प्रतिभागी टोमोका मुशिगा केँ उपहार मे देलनि। डॉ बैजू आयोजक सबहक आभार व्यक्त करैत मिथिला मैथिली हेतु सतत सहयोग देबाक आश्वासन देलनि। इंटेक दरभंगा क संयोजक डॉ एन के अग्रवाल महाराज महेश ठाकुर मिथिला महाविद्यालय के आभार व्यक्त कैलनि। समारोह क समापन प्रसिद्ध इतिहासकार आ साहित्यकार डॉ शंकर देव झा द्वारा गाओल समदाउन से भेल। समारोह मे डॉ अवनींद्र कुमार झा,पं भवनाथ झा, चन्द्र मोहन झा परबा, चन्द्र शेखर झा बूढ़ा भाई सहित महाविद्यालय क अध्यापक आ अन्य बुद्धिजीवी उपस्थित छलाह।

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