"बालोऽहं जगदानन्द ! न मे बाला सरस्वती । अपूर्णे पञ्चमे वर्षे वर्णयामि जगत्त्रयम् ॥" अर्थात हे जगतपति, हम बालक अवश्‍य छी मुदा हमर सरस्‍वती बालिका नहि छथि, हमर बैस एखन पांच साल क नहि भेल अछि, मुदा हम जगत क वर्णन करि सकैत छी- शंकर मिश्र क अनमोल बचन

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