सामाजिक आ सांस्‍कृतिक मूल्‍य प्रवासी मजदूरक सबस पैघ ताकत : जयराम

महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह स्मृति व्याख्यानमाला

ईशनाथ झा
दरभंगा । प्रसिद्ध समाजशास्त्री डॉ एन जयराम कहला अछि जे मजदूर जखन पलायन करैत अछि त अपना संग अपन संस्‍कृति सेहो ल जाइत अछि, जेकर सबस पैघ प्रमाण त्रिनिनाद अछि जाहि ठाम भारतीय मजदूर अपन सामाजिक आ सांस्‍कृतिक मूल्‍यक स्‍थापना केलक आ आइ ओ सबस मजबूत सामाजिक आ सांस्‍कृतिक समूह अछि।
श्री राम महाराजाधिराज कामेश्वर सिंहक १११म जयंती पर आयोजित महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह स्मृति व्याख्यानमालाक तहत त्रिनिदाद-टोबैगो मे गिरमिटिया मजदूर विषय पर व्‍याख्‍यान द रहल छलाह। अपन विद्वतापूर्ण, विशद् आ व्यापक व्याख्यानमे डॉ जयराम डेढ़ सौ साल मे बिहार आ उत्तर प्रदेश क गिरमिटिया मजदूरक पलायनक कारण विवशता पर गंभीरता पूर्वक अपन विचार रखलनि। संगहि हुनक मंतव्यमे ई मजदूर लोकनि कोना अपन सभ्यता-संस्कृति, रीति-रिवाज, खान-पान, पहिरन-ओढ़न, भाषा-बोली आदिकें बचाकें रखबाक संघर्ष कयलनि आ मजदूरी करबाक अपन नियतिकें दुतकारैत सत्ताक शीर्ष पर पहुँचलाह, तकर विवरण प्रभावशाली ढंग सँ रखलनि।
महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन, कल्याणी निवास, दरभंगाक तत्वावधान मे आयोजित भेल एहि समारोह क अध्यक्षता केलनि मिथिलाक लब्धप्रतिष्ठ अर्थशास्त्री डॉ डी एम दिवाकर ( पूर्व निदेशक, ए एन सिन्हा इंस्टीट्यूट ऑफ सोसल साइंसेस, पटना)। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशनक मुख्‍य न्‍यासी आ प्रसिद्ध वैज्ञानिक पद्मश्री डॉ मानस बिहारी वर्माक कुशल संचालन मे कार्यक्रमक प्रारंभ भेल मिथिलाक गौरवगान “जय-जय भैरवि असुर भयाओनि ….” क सुमधुर गायन सँ। तत्पशचात् महाराजाधिराज सर कामेश्वर सिंहक चित्र पर आगत अतिथि एवं उपस्थित विद्वत्जनक द्वारा श्रद्धांजलिस्वरूप पुष्पमाल्य चढ़ाओल गेल।
एकर बाद “आइने-तिरहुत” नामक पुस्तकक लोकार्पण कयल गेल। ध्यातव्य अछि जे ई पोथी मूल रूप संँ उर्दूमे लिखल गेल अछि जे तिरहुत राजक समयक सिंहावलोकन करबाक अद्भुत क्षमता प्रदर्शित करैत अछि। नवीन कलेवरक संग आयल ई पोथी मूल उर्दूक संग हिन्दी आ अंग्रेजी मे अनुवाद सेहो प्रस्तुत करैत अछि जे एकर आकर्षणकें बढ़बैत अछि। डॉ सुलेमान मंजर साहब, जे एकर हिन्दी अनुवादक छथि, एहि पोथीक विषयमे विशद् वर्णन केलथि आ जनतब देलनि जे ई पोथी मिथिलाक तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक आ आर्थिक व्यवस्थाक इतिहासक महत्वपूर्ण दस्तावेज थिक जकर अध्ययन समस्त मिथिलावासीक संग-संग इतिहासमे रुचि रखनिहार सब लोककें करबाक चाही।
कार्यक्रमक अध्यक्ष डॉ डी एम दिवाकर अपन संक्षिप्त वक्तव्यमे अही श्रृंखला कें आगू बढ़बैत अपन जड़ि तकबाक प्रयास केलनि आ मिथिलावासीक संघर्षशीलताक व्याख्या केलनि।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय, कामेश्वरनगर, दरभंगाक पूर्व कुलपति डॉ रामचंद्र झा अपन धन्यवाद ज्ञापन विशुद्ध संस्कृत मे केलनि आ सभा समाप्तिक घोषणा भेल।
एहि अवसर पर महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह कल्याणी फाउंडेशन द्वारा प्रकाशित प्रायः सबटा पोथीक प्रदर्शन आ विक्रय सेहो कयल गेल।
प्रबुद्ध श्रोतागण सँ पण्डाल भरल छल। डॉ भीमनाथ झा, डॉ फूलचंद्र मिश्र ‘रमण’, डॉ विजय मिश्र, कर्नल मायानाथ झा, श्री शरदिंदु चौधरी, श्री अमल झा, डॉ हरनाथ ठाकुर, एवं कतिपय अन्य साहित्यकार, विद्वान, गवेषक, शोधार्थी क उपस्थितिमे ई कार्यक्रम अत्यंत सफल रहल।
संपूर्ण कार्यक्रमक पृष्ठभूमि मे डॉ श्रुतिकर झा एवं श्री पारस नाथ सिंह ठाकुरक अमूल्य श्रम आ संयोजन प्रभावकारी छल।

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