मिथिला मे फेर शुरु भेल शास्त्रार्थ क परंपरा, तर्क- वितर्क स अचंभित भेलाह सभासद

रामबाबू

दरभंगा । संस्कृत विश्वविद्यालय केर स्थापना दिवसक समारोहक अवसर पर पहिल बेर माहाराजाधिराज कामेश्वर सिंह केर स्मृतिमे आयोजित शास्त्रार्थ कार्यक्रमक दोसर दिन चन्द्र ग्रहण एवम अहर्गण माने दिनक समूह पर चर्च गरम रहल। अहि अवसर पर विशिष्ट अतिथि नगर विधायक संजय सरावगी बजलाह कि हम पोथी आ शास्त्र सभमे मनीषी लोकनिक शास्त्रार्थ पढ़ने आ किंवदंती सुनैत छलहुँ मुदा आई साक्षात होयत शास्त्रार्थ देखि आ सुनि आह्लादित छी एवम हमर जिज्ञाशा सेहो थोड़ शांत भेल। संस्कृत व संस्कृतिक मादे मिथिलाक अप्पन गौरवशाली इतिहास रहल अछि। शास्त्रार्थक परम्परा तँ एतय प्राचीन कालसँ होयत अबैत रहल जे कलान्तरमे आबि मरि गेल छल जकरा फेरसँ संस्कृत विश्वविद्यालय शुरू कएलनि ताहि हेतु विश्वविद्यालय परिवार बधाई केर पात्र छथि। उपरोक्त जानकारी दैत पीआरओ निशिकांत बजलाह जे चन्द्र ग्रहण पर चलल गहन शास्त्रार्थ सुनलाक पश्चात अति उत्साहित विधायक सरावगी बजलाह जे संस्कृत बजनिहारहि टा केर संस्कृत कालेज सभमे बहाली होयबाक चाहि तखने देवभाषाक प्रसार होयत आ नेना सभ सेहो सहज भावे संस्कृत बाजि पाओत। ओ राजा जनक, याज्ञवल्क्य,गार्गी, कालिदास, विद्योतमा, भारती, मण्डन मिश्र जेहन विभूति सभक चर्च करते बजलाह कि शास्त्रार्थ सँ तँ नार शक्ति केर सेहो बढ़ेबाक काज कएलक अछि। अगुओ अहि तरहक आयोजन होयत रहय से आशा अछि।

शास्त्रार्थक दोसर दिन मंगल दिनक पहिल सत्रमे चन्द्रग्रहण पर शास्त्रार्थ भेल। भोपालक प्रो. हंसधर झा आ लखनऊ केर प्रो. मदन मोहन पाठक शास्त्रार्थी छलाह। पूर्व वीसी प्रो. रामचन्द्र झा केर अध्यक्षतामे आयोजित अहि कार्यक्रमक पर्यवेक्षण कS रहल छलाह डीन प्रो. शिवाकांत झा एवम संयोजकत्व डॉ बौआनंद झा कS रहल रहल छलाह। पूर्व पक्ष का दायित्व मानि शास्त्रार्थी प्रो. पाठक बजलाह कि ज्योतिषशास्त्र प्रत्यक्ष शास्त्र अछि। जेकर साक्षय सूरज आ चान होयत अछि। पञ्चाङ्गमे जेहन गणना होयत अछि प्रत्यक्षतः हम ओकरे व्यवहार करैत छी। चन्द्र ग्रहण शुक्ल पक्षक पूर्णिमामे होयत अछि। साधारण लोक सेहो छाद्य व

छादक विषयमे जनैत अछि। प्रत्युतरमे दोसर पक्ष प्रो. झा बजैत अछि जे जखन छादन होयत अछि तखन ग्रहण उपस्थित होयत अछि। राइतमे केवल ग्रहण होयत अछि। पूर्णिमा केर दिन सेहो एहन भS सकैए। दिनमे ग्रहण होयत तँ अछि मुदा सुरुजके कारण अवलोकित नैS होयत अछि। उम्हर डीन प्रो. झा बजलाह कि ग्रहण केर विषयमे शास्त्र सभमे व्यापक चर्च अछि। जे ज्योतिष सँ अपरिचित अछि ओ पौराणिक मत सभकें मानि राहु के मात्र कारण मानैत अछि।

दोसर सत्रमे सेहो शास्त्रार्थी प्रो. पाठक आ प्रो0 झा छलाह। दुनु गोटे अहर्गण नयनम पर अपन अपन मन्तव्य रखलाह। बजलाह कि नव विधकालमान सभमे मनुखक व्यवहार जोग केवल चारि गोट काल अछि- सौर, सावन, चांद्र एवम नाक्षत्र। अहि मान सभमे सावन मान केर द्वारा अहर्गणक साधन कएल जाएत अछि कारण एकर प्रत्यक्ष प्रतीति होयत अछि। ज्योतिष शास्त्र ग्रह पर आधारित अछि आ ग्रह केर आनयन अहर्गणक द्वारा कएल जाएत अछि। अहिसँ इतर अहि विषय पर खूब बड़का बड़का तर्क देल गेल।

बुधदिन हरिद्वार केर प्रो. विजयपाल शास्त्री आ लखनऊ केर प्रो. रामलखन पांडे केर बीच दू सत्रमे शास्त्रार्थ होयत। दुनु सत्रक अध्यक्षता दिल्ली केर प्रो. रमेश कुमार पांडे करताह। पहिल सत्रक पर्यवेक्षण प्रो. देवनारायण झा एवम संयोजन डॉ विश्राम तिवारी करताह। मुख्य अतिथि पटना विश्वविद्यालय केर कुलपति प्रो. रासबिहारी प्रसाद सिंह होयत। 2 बजे सँ शुरू दोसर  सत्रक पर्यवेक्षण प्रो. लक्ष्मीनाथ झा एवम संयोजिका प्रो. मीना कुमारी संगहि विशिष्ट अतिथि पूर्व विधान पार्षद डॉ विनोद कुमार चौधरी होयत आ मुख्य अतिथि स्वरूप काबीना मंत्री महेश्वर हजारी आमंत्रित छथि।

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