सांझक गाछ तर बैस गाम स टहलि एलाह दर्शक

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समदिया
मुंबई । कई सालक बाद मुंबईकर सांझक गाछ तर बैस मिथिलाक भाषा आ संस्‍कृति स अवगत भेलाह। अवसर छल पूर्वी मुंबई इलाकाक साठे कॉलेज विले पार्ले में 30 नवंबर कए लेखक राजकमल चौधरीक कहानी सॉझ क गाछ क मंचनक। निर्देशक जितेंन्द्र नाथ जीतूक निर्देशन मे भेल एहि मंचन स मुंबई में कतेको साल बाद एकटा मैथिली नाटक देखबाक आ देखेबाक मौका मैथिल समाज कए भेटल। पिछला किछु साल मे त मुंबई में मैथिली रंगमंचक गतिविधि नहि कए बाराबर रहल। कई सालक बाद भेल एहि मंचन स मुंबई में मैथिली रंगमंचक सक्रियता बढत एकर उम्‍मीद नाटक देखबा लेल आयल जन समूह सेहो केलथि अछि।
संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार क सहयोग कैल गेल एहि नाटक कए कलाकार भास्करानंद झा,
मनीषा झा, राधे मिश्र, ख़ुशी दानी, विनय कुमार, रृषि झा, श्रद्धांशु शेखर, मुकेश, प्रेम नाथ झा,
आ प्रेमचंद महतो अपन कलाकारी स दर्शनीय बना देलथि। पटनाक भंगिमा स अपन रंगमंचक यात्रा शुरु केनिहार जितेन्द्र नाथ जीतू निर्देशक क रूप में अपन छाप छोडबा मे सफल रहलाह।
सभागार मैथिल आ गैर मैथिल स भरल रहल आ खास गप इ रहल जे नाटक देखबा लेल
कथाकार राजकमल चौधरी क बेटी सपरिवार आयल छलीह। राजीव जी सहायक महाप्रबंधक घाटकोपर ब्रॉच एसबीआई हुनका पुष्प गुच्छ द कए सम्मानित केलखिन।
एहि अवसर पर ओ कहलथि जे मिथिला मंडल एत एक समय मे बड्ड एक्टिव छल। धूमधाम सं विद्यापति समारोह मनबै छल, मुदा पिछला किछु दिन स शिथिलता आयल छल। एहि नाटकक मंचन स सक्रियता लौटबाक उम्‍मीद अछि।
उल्‍लेखनीय अछि जे राजकमल चौधरी क नाटक सांझाक गाछ क पटकथा मिथिला क गाम घर पर आधारित अछि। कोना आदमी जीवन कए चक्रजाल मे फँसैत चलि जाइत अछि। निर्देशन आ प्रस्तुति मे कईटा नव आयाम देखबा लेल भेटल। नाटक मे एक ठाम लेखक राजकमल चौधरी क कविता चारू कांत अन्हार क उपयोग सेहो कैल गेल, जे दर्शक कए प्रभावित केल‍क। नाटक देखि सभागार स बाहर आयल कई गोटे प्रतिक्रिया मे बस एतबा कहलथि जे नाटक देखैत काल गाम पहुंच गेल रही..

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