गीतकार महाकवि गोपाल दास नीरज नहि रहलाह

नई दिल्ली। पदमश्री आ पद्म भूषण से सम्मानित प्रख्यात कवि आ गीतकार महाकवि गोपाल दास नीरज बृहस्पति दिन क संध्या में अपन स्वजन परिजन केँ शोकसंतप्त छोड़ि एहि संसार सँ  विदा भ गेलाह। ९३ वर्षीय नीरज केँ फेफड़ा मे इंफेक्शनक शिकायत भेला पर मंगल दिन आगराक एक अस्पताल मे भर्ती कराओल गेलन्हि।ओ अपन पुत्री कुंदनिका शर्मा के ओतय आयल छलाह। सुधार नहि भेला पर बुध क राति हुनका एम्स, दिल्ली में भर्ती कराओल गेल जतय ओ अन्तिम साँस लेलन्हि।
चारि जनवरी १९२५ केँ हुनक जन्म इटावाक पुरावली गाँव में भेल छल।ओ हिन्दी मंच क प्रसिद्ध कवि छलाह।हुनकर रचल अनेको गीत हिंदी फिल्म जगत मे लोकप्रिय भेल। हुनका १९७०,१९७१,१९७२ मे फिल्म फेयर अवार्ड भेटलन्हि। हुनक कारवाँ गुज़र गया गुबार देखते रहे,ए भाई जरा देख के चलो, कहता है जोकर सारा जमाना आदि गीत सब लोकप्रिय गीत अछि।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

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