2 जनवरी, 1975 कए समस्तीपुर मे भेल तत्कालीन रेलमंत्री ललित नारायण मिश्राक हत्या एकटा सामान्य घटना नहि छल। हुनक हत्या एकटा शहर क सपना क हत्या छल। सीबीआई 36 साल स जांच करि रहल अछि। 36 साल स दरभंगा अपन एहि नेता क हत्या पर स पर्दा उठबाक बाट ताकि रहल अछि। ललित बाबू क हत्या स हुनक अनुज कए सत्ता भेट गेल आ पुत्र कए राजनीतिक जमीन, अनाथ भेल त केवल ओ शहर आ समाज जेकर ओ नेता छलाह। तारीख पर तारीख सुनैत-सुनैत 37 साल बीत गेल, आखिर कहिया आउत फैसला…
कुमुद सिंह
पिछला 36 साल स बिहार खास क मिथिला ललित नारायण मिश्र हत्याकांड पर चलि रहल सुनवाई पर फैसला सुनबाक बाट ताकि रहल अछि। सीबीआई एहि मामला क जांच करि रहल अछि। कोनो जांच एजेंसी क इतिहास मे इ सब स पुरान मामला अछि, जेकर निबटारा तीन दशक बितला क बावजूद एखन धरि नहि भ सकल अछि। सवाल उठैत अछि जे आखिर कतेक दिन आओर सीबीआई आ कोर्ट ललित बाबू क हत्यारा कए तकबा आ सजा देबा मे आओर लगाउत। जखनकि ललित बाबू क हत्याक मामला देशक एहन पहिल मामला अछि जाहि मे सुप्रीम कोर्ट सुनवाई बिहार स बाहर आन राज्य मे करबाक निर्देश देने अछि। कोर्ट क कहब छल जे एहि मामला क निष्पक्ष जांच बिहार मे नहि भ सकैत अछि, संगहि ओहि ठाम सबूतक संग सेहो छेड़छाड़ भ सकैत अछि। कोर्ट क निर्देश पर एहि मामला क सुनवाई पटना स दिल्ली पटियाला कोर्ट मे स्थानांतरित कएल गेल। बाद मे एकरा तीसहजारी कोर्ट आनल गेल। जाही ठाम रोज सुनवाई भ रहल अछि।
सात जनवरी, 1975 कए दर्ज एहि मामलाक सुनवाई तीसहजारी कोर्ट मे कहबा लेल रोज भ रहल अछि, मुदा प्रगति क नाम पर इ मामला गवाही स आगू नहि बढि़ सकल अछि। 1300 हजार पन्ना लिखबाक बावजूद इ आई धरि तय नहि भ सकल, जे ललित नारायण मिश्रक हत्या के आ किया केलक। पिछला 36 साल मे मामलाक एकटा मुख्य आरोपित आ बचाव पक्षक चारि टा वकीलक निधन भ चुकल अछि। 17 दिसंबर, 1979 स दिल्ली क तीसहजारी कोर्ट मे एकर सुनवाई चलि रहल अछि। एहि स पहिने एकर सुनवाई पटना मे चलि रहल छल। पटना मे भेल सुनवाई क दौरान बचाव पक्ष क मात्र तीन टा गवाहक गवाही भेल छल।
एहि मामला मे एखन धरि करीब 170 गोटे अपन गवाही द चुकल अछि। एहि मे जनवरी 1994 स 2002 क बीच कुल आठ टा मे स पांच टा मुख्य आरोपित क गवाही भेल। एहि मे संतोष आनंद, सुधोव, गोपालजी, अतेश आनंद आ रंजन द्विवेदी प्रमुख छथि। पत्रकार आ पूर्व मंत्री अरुण शौरीक तक क गवाही भेल। ओ 1975 मे एहि मामला स संबंधित दू टा आलेख इंडियन एक्सप्रेस मे लिखने रहथि। एना करि कए अधिकतर गवाह एहि मामला मे कोनो खुलासा करबाक कोशिश नहि केलक अछि।
13 हजार पन्ना स बेसी लंबा एकर सुनवाई भ चुकल अछि, मुदा एखन धरि किछु प्रश्नक उत्तर नहि भेट सकल अछि। सीबीआई इ बतेबा मे एखनो असमर्थ अछि जे आखिर पूर्व रेलमंत्री ललित नारायण मिश्र कए समस्तीपुर मे छोट अस्पताल रहबाक बावजूद बिना प्राथमिक उपचार कए दानापुर किया आनल गेल। गौर करबाक विषय अछि जे दरभंगा स समस्तीपुर क दूरी मात्र आधा घंटा रहितो दरभंगा नहि ल जायल गेल, जाहि ठाम इलाजक बेहतर सुविधा छल। जखन कि ललित बाबू दरभंगा स सांसद छलाह आ हुनकर घायल हेबाक समाचार सुनि दरभंगा क प्रसिद्घ चिकित्सक डॉ. नवाब समस्तीपुर लेल विदा भ गेल छलाह। सीबीआई आइ धरि इ तक पता नहि लगा सकल अछि, जे समस्तीपुर स दानापुर जेबा लेल जाहि ट्रेन क व्यवस्था कएल गेल ओकर स्तर सवारी गाड़ी क स्तर स नीचा रखबाक निर्देश केकर छल। सीबीआई क दस्तावेज मे इ आश्चर्य जताउल गेल अछि जे आखिर गंभीर रूप स घायल रेलमंत्री क विशेष टे्रन कए कोना आ केकर आदेश स समस्तीपुर स दानापुरक बीच करीब डेढ़ सौ किलोमीटरक दौरान कई बेर रोकल गेल आ मामूली गाड़ी कए आगू बढ़ाउल गेल।
सीबीआई पिछला 36 साल मे इ पता सेहो नहि लगा सकल जे दानापुर ल जेबाक विचार केकर छल आ एकर पाछु तर्क कि छल। तीन दशक बितलाक बावजूद इ प्रश्न निरूत्तर अछि, जे समस्तीपुर मे ललित बाबू स गंभीर स्थिति हुनक छोट भाई जगन्नाथ मिश्र क छल, मुदा ओ बचि गेलाह आ ललित बाबू क निधन भ गेल। ज्ञात हुए जे एहि हत्याकांड क किछु दिन बाद जगन्नाथ मिश्र बिहार क मुख्यमंत्री बनलाह।
सीबीआई क दस्तावेज कहैत अछि जे ललित बाबू मोकामा धरि चलैत-फिरैत अवस्था मे छलाह त दानापुर पहुंचैत-पहुंचैत हुनकर मौत कोना भ गेल। सवाल उठैत अछि जे अगर मोकामा क बाद ललित बाबू क स्थिति एकाएक गंभीर भ गेल त हुनका पटना मे किया नहि उतारि लेल गेल।
बिहार मे विकास क राजनीति क जन्मदाता ललित बाबू हत्याक पाछु आनंदमार्गी सबहक हाथ बताउल जा रहल अछि। किछु गोटे एकरा विशुद्घ रूप स राजनीतिक हत्या मानि रहल छथि। एहन लोक क कहब अछि जे ललित बाबू कांगे्रस मे काफी मजबूत भ गेल छलाह। रूस स हुनक नजदीकी कांगे्रस क किछु नेता लेल परेशानी बनि गेल छल। एहि संदेहक पाछु सेहो ठोस तर्क देल जाइत अछि। 2 जनवरी, 1975 कए जखन समस्तीपुर मे ललित बाबू पर बम स हमला भेल तखन बिना कोनो तय कार्यक्रम कए प्रधानमंत्री कार्यालय क एकटा पैघ अधिकारी बेगूसराय मे छलाह। कहल जाइत अछि जे ओ अधिकारी रामविलास झा क संपर्क मे छलाह। ललित बाबू एकटा संबंधिक कहब अछि जे समस्तीपुर स दानापुर ल जेबाक फैसला दिल्ली स आएल छल, मुदा प्रश्न उठैत अछि जे जखन ललित बाबू होश मे छलाह आ जगन्नाथ मिश्रक गंभीर हालत कए देख हुनकर तत्काल इलाज लेल चिंतित छलाह, तखन आखिर वो दानापुर जेबा लेल तैयार कोना भेलथि। सवाल इहो अछि जे मोकामा क बाद आखिर कि भेल जे ललित बाबू दानापुर पहुंचैत-पहुंचैत नहि बचि सकलाह। सवाल बहुत अछि मुदा उत्तरक बाट तकैत-तकैत आंख पथरा रहल अछि। आशा अछि हुनक हत्याक 37म वर्ष मे मिथिला अपन एहि पुत्रक हत्यारा आ हत्या क पाछु कारण कए जानि सकत।
नोट : इ एकटा स्थाई संपादकीय छी जे सब साल केवल साल बदलि इसमाद पर अपडेट भ जाइत अछि। भारत न्याय व्यवस्था पर इ कोनो टिप्पणी नहि छी।

Bihar vikas putra Lalit Narayan Mishra Hatya lagi rahal achhi je ekta sochal samjhal karya chhal aakhir ekra ke anjam delak aa ke diyolak ekr phesla jarur hewak chali chahe o paigh se phaigh vyakti kiyak nahi hoyat takhnahi lalit babuk aatma santushti bhetain.
No comments, its an open secret . . . चलिए कम से कम किसी को तो उनकी याद आयी . . . वैसे प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, जगन्नाथ मिश्रा जी एन मौके पर मंच पर से हटा दिए गए थे . . . ललित बाबु के साथ मंच पर के एक आदमी के पांव में चोट लगी थी . . . …सुना है जिस ट्रेन से उन्हें दानापुर ले जाना था वो ट्रेन लेट हो गयी! . . . लोग इन्तेज्ज़र कर रहे होंबे की जब मरना पक्का हो जाए तभी समस्तीपुर से भेजा जायेगा . . . उस ह्त्या कांड में ऐसे सभी लोगों को नामजद किया गया जिनके पड़ोसी उनसे दुखी थे . . . . कुछ को तो मैं भी जनता हूँ और उन्हें उस दौरान दिए गए उत्पीडन का कीमत क्या दिया गया ये भी जनता हूँ . . . राजेंद्र बाबु, दरभंगा महाराज, श्री बाबु और उसके बाद ललित बाबु . . . बिहार मोसमात हो गया १९७५ से . .