राजनगर लग विश्व धरोहर बनबाक क्षमता : मिश्र

संरक्षण लेल प्रयास शुरू केलक एएसआई
40 साल बाद फेर शुरू भेल शोध पत्रिका मिथिला भारती
मैथिली साहित्य संस्थान क बेव पेज क सेहो भेल लोकार्पण

MithilaBharti

पटना । भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण कोलकाता क क्षेत्रीय निदेशक डॉ फणीकांत मिश्र कहला अछि जे राजनगर लग विश्व धरोहर बनबाक क्षमता अछि आ ओहि ठामक काली मंदिर क स्थापत्य विश्व इतिहास लेल अनुपम अछि। श्री मिश्र आइ मैथिली साहित्य संस्थान के तत्वावधान मे आयोजित समारोह मे मिथिला पुरातत्व  : दशा और दिशा पर व्याख्यान द रहल छलाह । पटना संग्रहालय क सभागार मे आयोजित एहि कार्यक्रम मे श्री मिश्र मिथिला क सीमा क जिक्र करैत पौराणिक तथ्य क आधार पर मिथिला क बदलैत भूगोल आ नामक विस्तारपूर्वक उल्लेख केलथि। ओ कहला जे पुरातन ग्रंथ सब मे मिथिला क 12टा नाम क जिक्र भेटैत अछि । असगर विदेह मे 7टा स्वतंत्र देश सम्मिलित छल। ओ कहला जे मिथिला मे पुरातात्विक महत्व पर शोध क बहुत अभाव रहल अछि आ जगह सबहक समुचित संरक्षण नहि‍ भ पाउल अछि। मिथिला मे पुरातात्विक महत्व क कईटा जगह अछि जेकर संरक्षण आ खुदाई क अवश्य्कता अछि। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण एहि दिशा मे पहल केलक अछि। एहन स्थान क सूची तैयार भ चुकल अछि। मधुबनी जिला क राजनगर क संरक्षण लेल राज दरभंगा कए पत्र पठाउल गेल अछि। आओर स्थान सब लेल काज चलि रहल अछि। ओ कहला जे शोध आ संरक्षणक अभाव मे कालिदास समेत कईटा विभूति क पहचान मिथिला स बिला रहल अछि । एएसआइ कालिदास क डीह क संरक्षण लेल काज शुरू केलक अछि । श्री मिश्र कहला जे राजनगर स्थित काली मंदिर तंत्र साधना क विलक्षण कृति अछि। तांत्रिक काली क एहन मंदिर पूरा विश्व में नहि अछि। एहि ठाम काली कमल पर विराजमान छथि जे तंत्र क साधना क अंतिम पडाव छी। मिथिला क स्थापत्य कला कए रेखांकित करैत डा मिश्र कहला जे मिथिला मे स्थापत्य कला क छहटा शैली विकसित भेल अछि, जे अपना आप मे एकटा महत्वपूर्ण तथ्य अछि। एहि अवसर पर मिथिला भारती शोध पत्रिका क लोकार्पण करैत न्यायमूर्ति श्रीमती मृदुला मिश्र अध्यक्ष बिहार भूमि न्यायाधिकरण कहलथि जे इ प्रसन्नता क गप अछि जे एतेक दिन बाद शोध पत्रिका क पुनरोद्धार कैल गेल। हम एकरा लेल पत्रिका क संपादक मंडल कए धन्यवाद दैत छी । ओ कहलथि जे मिथिला भारती मैथिली क पहिल शोध पत्रिका अछि आ इ दुखद रहल जे चारि अंक क बाद एकर प्रकाशन बंद भ गेल छल । ओ कहलथि जे 1969 में जखन एहि संस्था  आ पत्रिका क शुरुआत भेल छल से एहिना आंखिक समझ अछि । 1977 मे जखन एकर प्रकाशन बंद हेबाक सूचना भेटल छल त अपार दुख भेल छल। आइ एकटा इतिहास जीवित होइत देख रहल छी । अपन अध्यक्षीय भाषण मे प्रख्यात विद्वान प्रो डॉ हेतुकर झा कहला जे मिथिला तंत्र, सनातन, बौद्ध क संग-संग जैन धर्म क सेहो पीठ रहल अछि। मिथिला क बेटी 19म तीर्थंकर छलीह, जेकर प्रमाध 12वीं शताब्दी क जैन साहित्य  मे भेटल अछि । उल्लेखनीय अछि जे महावीर 24म तीर्थंकर छलाह । ओ कहला जे मिथिला पुत्री टा नहि मुदा महावीर से पहिने भेलीह आ असगर महिला तीर्थंकर भेलीह। श्री झा मैथिली पर शोध लेल विभिन्न भाषा क शोधकर्ता कए आगू एबा लेल आह्वान केलथि। एहि अवसर पर निदेशक संग्रहालय बिहार डॉ. जेपीएन सिंह मैथिली साहित्य संस्थान क वेबसाइट क लोकार्पण केलथि। एहि स पूर्व आगत अतिथि क स्वागत करैत संस्थान क सचिव भैरव लाल दास कहला जे मिथिला क पुरातत्व आ संस्कृति क संरक्षण लेल दरभंगा मे एएसआई क आंचलिक कार्यालय क आवश्यकता अछि। संगहि ओ मधुबनी क भौरागढी क संरक्षण लेल सेहो एएसआई कए आगू एबाक अनुरोध केलथि। संस्थान क कोषाध्यक्ष डॉ. शिवकुमार मिश्र धन्यवाद ज्ञापन करैत कहला जे इ मैथिली पत्रिका आ पोथी क इतिहास मे पहिल घटना छी जे 450 टकाक कोनो पत्रिका लोकार्पण क दिन एखन धरि 25 प्रति बिका गेल । इ देखा रहल अछि जे मैथिली मे खरीददारक कमी नहि अछि, कमी गुणवत्ता पूर्ण सामग्री क अछि ।

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