मैथिली, मैथिल संस्कृति आओर मिथिला राज्य-2

मिथिलाक विकास पर लिखल गेल पत्रकार सुशांत झा क आखेख क दोसर भाग जाहि मे मुख्य रूप स मे मिथिलाक विकास मे मिथिला राज्स क भूमिका आ ओकर समग्रता पर विचार कैल गेल अछि।

सुशांत झा
एकटा प्रश्न मिथिला राज्य क निर्माण स सेहो जुड़ल अछि। मिथिला कए इलाका अप्पन दरिद्रता, विशालता, भाषाई विशिष्टता क वजह स राज्य कए दर्जा पाबै क पूरा हकदार अछि, मुदा की सिर्फ मिथिला राज्य बनि गेला स हमर भाषा क पूरा विकास भय पाओत? हम एतय राज्य बनि गेला कए बाद आर्थिक विकास कए उम्मीद त कय सकै छी, मुदा की भाषाई आ सांस्कृतिक विकास भय पाओत ? उत्तराखंड या छत्तीसगढ़ बनि गेला क बादो ओहि ठामक स्थानीय भाषा क की हाल अछि, ई एकटा शोध क विषय भ सकैत अछि। दोसक गप्प, मैथिली क एकरुपता स जुड़ल अछि। एतय मैथिल भाषी आ ओकर साहित्यकार खुद एकर जिम्मेवार छथि। दरभंगा-मधुबनी क मैथिली कए मानक बना कए हम केना पूरा मिथिला क ठेका उठबै क दावा कए सकैत छी ? एखनो दरभंगा-मधुबनी क भाषाई अहं, सहरसा-पूर्णिया आ मधेपुरा बला कए अहि आन्दोलन कए शंका क दृष्टि स देखै पर मजबूर कए रहल अछि। हमर ई माननाई अछि जे मैथिली कतौ क हुए, ओकर मूल रुप मे जाबे तक ओकरा स्वीकार नहि कयल जाएत, मिथिला आ मैथिली आन्दोलन क बहुत फायदा नहि हुअ बला।
दोसर गप फेर लिपि क अछि। की हम मिथिला राज्य बनि गेला क बादो मैथिली कए मिथिलाक्षर मे लिखि सकब ? की हम देवनागरी स मुक्त भ सकब ? की हम राष्ट्र कए मुख्यधारा स टकरेबाक साहस क सकब…आ दरभंगा-सहरसा क शहरी वर्ग क मैथिली बाजै आ लिखै कए लेल मना या प्रेरित कए सकब-ई लाख टका क प्रश्न। देखल जाए त सांस्कृतिक रुप स हमर मिथिला, बंगाल क बेसी नजदीक अछि, मुदा हमर राजनीतीक जुड़ाव हिंदी पट्टी स स्थापित कए देल गेल अछि। इतिहास क अहि आघात स मुक्ति कोना भेटत, राज्य निर्माण एकटा कदम त भ सकैत अछि, मुदा हिंदी क इन्फ्रास्ट्रक्चर हमर जनता क मजबूर कए देने अछि जे हम अपन लेखन या पाठन हिंदी में करी। हमरा ओकर लत लागि गेल अछि आ हमर भाषा सिर्फ बाजै कए भाषा बनि कय रहि गेल अछि। तखन उपाय की अछि ?
मैथिली क बारे मे किछु विज्ञ लोक स जखन चर्चा होईत अछि त कहैत छथि जे 50 या 60 क दशक मे जते मैथिली क आन्दोलन मजबूत छल ओते आब नहि। सर गंगानाथ झा, या अमरनाथ झा या उमेश मिश्र या हरिमोहन बाबू घनघोर मैथिलवादी छलाह। ओ या त अंग्रेजी मे संवाद करैत छलाह या फेर मैथिली मे। ओ हिंदी क भाषाई साम्राज्यवाद कए चीन्ह गेल छलाह- ओ उर्जा एखन कहां देखि रहल छी ?
हमर बहिन कैलिफोर्निया मे रहैत अछि। ओकरा ओतय कएटा मैथिल टकराईत छथिन्ह जे मैथिली मे गप्प करैत छथि। मुदा ई चेतना भारत मे कहां अछि ? एतय ओ हिंदी किएक बाजय लगैत छथि ? जे अपनापन ओ अमेरिका मे ताकय चाहैत छथि ओ भारत मे किएक नहि करैत छथि-एकर कोनो जवाब हमरा नहि सुझाईत अछि।
एम्हर किछु लोग बहुत एलिट भेला क बाद फेर स अपन रुट स जुड़ै क कोशिश कए रहल छथि। शायद ओ हॉलीवुड स्टार सबस प्रेरणा ल रहल होईथि। ओरकुट या फेसबुक पर मिथिला क गामक तस्वीर फेर स जागि रहल अछि। एकटा महत्वपूर्ण भूमिका मिथिला पेंटिंग क सेहो अछि। मुदा लेखन या पठन क स्तर पर एखनो लोक मैथिली स कहां जुड़ि पेला अछि? जाहि भाषा-भाषी क जनसंख्या नौ करोड़ स ऊपर हुए ओतय कोनो नीक अखबार या पत्रिका कहां देखि रहल छी। तखन त इंटरनेट के धन्यवाद देबाक चाही जे ओ एहि दिसा मे नीक काज कए रहल अछि-कारण जे अहि मे पूंजी कम लगैत छैक।
एकटा उम्मीद ऑडियो-विजुअल माध्म स अछि मुदा हमर भाषा ओहू मोर्चा पर भोजपुरी जका प्रदर्शन नहि कए रहल अछि। हालांकि भोजपुरी क विशाल आबादी आ अंतराष्ट्रीय बाजार ओकरा सहयोग कए रहल छैक, मुदा ओहू स बेसी महत्वपूर्ण हमरा जनैत ई जे हमर भाषा बेसी क्लासिकल होई क वजह स अहि मोर्चा पर पिछड़ि रहल अछि। मैथिली भाषा लेखन क परंपरा स विकसित भेल अछि आ बेसी मर्यादित अछि, जखन की भोजपुरी मे लेखन क परंपरा स बेसी बाचन क परंपरा छैक। ई क्लासिकल भेनाई हमर भाषा क पोपुलर कल्चर स काटि कए राखि देने अछि। मिथिला मे संभ्रान्त वर्ग क मैथिली अलग आ आम जन क मैथिली अलग भ गेल छैक। एकर अलावा लेखन क परंपरा होईके कारण एकर लोकगीत आ नाट्य मे एक प्रकारक अश्लीलता या बेवाकपन क बड्ड कमी छैक जे भोजपुरी मे प्रचुर रुप स छै। ताहि कारणें हमर भाषा मे हाहाकारी रुप स हिट लोकगीत क कैसेट या फिल्म नहि बनि पबैत अछि। परिणाम ई जे मैथिली क दर्शक भोजपुरिये गीत या फिल्म क आनंद बेसी लैत छथि-जे बाजार द्वारा हुनकर बेडरुम तक पहुंचा देल गेल अछि। लोक ‘महुआ’ चौनल त देखैत छथि, मुदा ‘सौभाग्य मिथिला’ क बारे मे कतेक लोक कए पता छन्हि ? मैथिली क बाजार नहि बनि पायल अछि। इहो प्रश्न विचारणीय।
तखन हमर भाषा कए उम्मीद कतय अछि ? की सिर्फ ‘विल पावर’ आ गार्जियन सबकए अतिशय जागरुकता हमर उम्मीद अछि जे ओ अप्पन बच्चा सबके कम स मैथिली जरुर सिखाबथु या आओर किछु ?
लगैये हम बेसी निराश भय रहल छी। शायद हमरा एतेक निराश नहि हेबाक चाही। जे भाषा हजार साल स लेखन आ वाचिक परंपरा स जीवित अछि ओ आगूओ जीवैत रहत। एकर स्रोता ओ किछु हजार या लाख लोग नहि छथि जे दरभंगा-पटना या दिल्ली मे आबि क कॉरपोरेट भ गेल छथि-बल्कि ई भाषा करोड़क करोड़ मैथिल भाषी क हृदय मे जीवित अछि जे एखनो कोसी क बाढ़ि आ जयनगर रेलवे लाईन क कात मे पसरल हजारो गाम मे रहैत छथि। हमर ई विवशता अछि जे हमर युवा आबादी, जवान होईते देरी दिल्ली-बंबै भागि जाईत अछि। अबै बला समय मे जखन आर्थिक गतिविधि हमरा इलाका मे पसरत त लोक क पलायन नहि हेतै, लोक अप्पन भाषा मे संवाद करैत रहत। अहि शुभेच्छा कए जियबैक लेल हमरा आर्थिक लड़ाई लड़य पड़त। दिल्ली आ पटना क सरकार स अप्पन हक मांगए पड़त, इन्फ्रास्ट्रक्चर मजबूत करए पड़त। शायद मिथिला राज्य ओहि दिसा मे एकटा पैघ कदम साबित हुए। कम स कम मिथिला राज्य क निर्माण क अहि आधार पर जरूर समर्थन करक चाही। आ मैथिल बुद्धिजीवी सबकए एहि आन्दोलन मे अहम भूमिका क निर्वाह करैय पड़तन्हि।