समाज जखन भावनाक धार मे बहैत अछि, त ओकर दृष्टि बहुत सीमित आ संकुचित भ जाइत अछि। एहन मे समाज मे रहनिहार विद्वान कए सेहो दूर तक नहि देखबा स वंचित भ जाइत छथि। कहनो-कहनो ओ एहन समूहक संग एहन फैसला लेल मांग उठा दैत छथि, जे आगू चलि कए समाज लेल विनाशकारी साबित होइत अछि। किछु एहने आइ-काल्हि देश मे भ रहल अछि। बिहार कए बांटि कए मिथिला राज्य बनेबा लेल लगातार मांग भ रहल अछि। इ मांग नव नहि अछि, मुदा तेलंगाना कए केंद्र स सकारनत्मक उत्तर भेटलाक बाद देश मे कुल नौ- दस टा नव राज्यक मांग तेज भ गेल। एहि राज्य क गठन क मांगक पाछु मंशा जे हुए, मुदा कारण सब विकास बता रहल अछि। छोट राज्यक गठनक लेल सबस पैघ आधार बनल विकास आइ बहस क मुद्दा बनि गेल अछि। हमर विरोध छोट राज्यक गठन स नहि अछि, मुदा सवाल उठैत अछि जे की छोट राज्य विकास क पर्याय अछि। निश्चित रूप स एकर सर्वमान्य उत्तर नहि अछि। केंद्र सरकार 11 दिसंबर, 2009 कए जखन आंध्रप्रदेश स अलग तेलंगाना राज्य बनेबाक मांग कए स्वीकृति देलक, त तेलंगानावासी कए लगल जे हुनकर पुरान सपना आब सच भ रहल अछि। अलग राज्य बनला पर ओ आब अपन संग भ रहल बेमातर(सौतेला) व्यवहार कए नहि सहताह, संगहि हुनकर अपन सरकार होएत, जतय ओ अपन गप सही ढंग स राखि सकताह। एहि तरहे ओ विकास क मार्ग पर अपन सफर शुरू करि देताह। कमोवेश एहि तरहक धारणा मिथिला सहित अन्य छोट राज्यक मांग करनिहार लोकनिक सेहो अछि। एहि ठाम गौर करबाक गप अछि जे की ओ वर्तमान सरकार मे विकास स वंचित छथि। यदि ओ सही मे वंचित छथि त अपन सरकार कए ओ कोना चुनलथि। अपन वोट स चुनल सरकार पर ओ कोना एहन आरोप लगा सकैत छथि। कि आंध्र मे एकोटा मुख्यमंत्री तेलंगाना स नहि भेल, कि बिहार मे मिथिला क्षेत्र क गरीबी लेल एहि क्षेत्र स बनल मुख्यमंत्री जिम्मेदार नहि छथि। कि अलग राज्य बनलाक बाद वर्ततान नेता चुनाव नहि लड़ताह। निश्चित तौर पर छोट राज्य क गठनक मांगक पाछु मुद्दा विकास अछि, मुदा समग्र नहि। अलग राज्य बना कए अपन समाज कए पूर्ण विकसित करबाक जे सपना देखल जा रहल अछि, ओ अपन विकास तक संकुचित भ सकैत अछि। अगर एहन गप नहि होएते त 10 साल पहिने बनल तीनटा नव राज्य झारखंड, उत्तराखंड आ छत्तीसगढ़ एहि एक दशक मे कि सही मायने मे अपन तसवीर बदलि लेलक? की ओ अपनाआप कए ओहि ठाम पहुंचा सकल, जतय ओ विभाजन स पूर्व अपना कए देखि रहल छल। प्राकृतिक संसाधन स भरपूर झारखंड आइ केतबा विकसित भेल, इ त सबहकसामने अछि। झारखंड जखन बिहार स अलग भेल छल, तखन ओकर प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 9955टका सालाना छल। आइ हालात मे कोनो खास बदलाव नहि भेल अछि। झारखंड बनलाक फायदा आदिवासी नहि उठा पाबि रहल छथि। नौ साल मे छह टा सरकार। मधु कोड़ा आ शिबू सोरेन सन मुख्यमंत्री। सत्तानायकक एहि बदनियतक खामियाजा झारखंड बनलाक बाद बिहार मे रहला स बेसी झारखंडक जनता उठा रहल अछि। छत्तीसगढ़ मे राजनीतिक स्थिरताक बावजूद विकास क गति बिहार सन राज्य स कम रहल आ नक्सल सन समस्या बढ़ल। 2001मे एहि ठामक प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद 12400 टका सालाना छल। आइ हालात मे मात्र दू फीसदीक बढोतरी दर्ज कैल गेल अछि। एकरा कोनो खास बदलाव नहि कहल जा सकैत अछि। अलग राज्य बनलाक बावजूद एहि ठामक 80 फीसदी जनता कहूना अपन पेट चला रहल अछि। जहां तक उत्तराखंड क सवाल अछि ओकर स्थिति झारखंड आ छत्तीसगढ़ स किछु नीक हेबाक पाछु ओकरा भेटल विशेष राज्यक दर्जा अछि। जहां तक यूपी क मुख्यमंत्री मायावती क बुंदेलखंड आ पूर्वांचल बनेबाक मांग अछि। त इ तथ्य नहि बिसरबाक चाही जे मायावती ओ नेता छथि जे स्थायी सरकारक विरोध करैत रहलथि अछि। अस्थायी सरकार मे छोट-छोट दल कए महत्व बढि़ जाएत अछि आ राजनीतिक अस्थिरता मे एहन दल अपन भूमिका बढ़ा लैत अछि। एहन मे मायावतीक बंटवाराक प्रस्ताव क्षेत्रक विकास स बेसी हुनकर अपन आ बसपाक विकास स बेसी जुड़ल अछि। विकासक आधार पर मांगल जा रहल छोट राज्यक विकास लेल राजनीतिक स्थिरता सबस जरूरी अछि। मुदा गोवा आ झारखंड क अनुभव नीक नहि कहल जा सकैत अछि। एक-एक वोट स बनैत आ खसैत सरकार एहि ठाम विकास स बेसी भ्रष्टाचार कए बढावा देलक। जहां तक स्थानीय समस्याक निराकरणक सवाल अछि त उत्तरपूर्व क उग्रवाद आ झारखंड-छत्तीसगढ़क नक्सलवादक समस्याक निराकरण मे कोनो उल्लेखनीय प्रगति नहि भ सकल अछि। पैघ राज्य स टूटि कए बनल गुजरात, हरियाणा आ पंजाबक विकास मे ओकर छोट आकार स बेसी स्थानीय नेतृत्वक योगदान रहल। पिछला चारि साल मे बिहारक प्रगतिक पाछु ओकर आकार कोनो आधार नहि बनल। मिथिला क्षेत्र स जीत मुख्यमंत्री पद तक पहुंचल विनोदानंद झा, बीपी मंडल आ फेर बिहार कए गर्त दिस विदा करनिहार जगन्नाथ मिश्र एकएहि क्षेत्रक विकास करबा स के रोकने छल। मिथिला राज्य बनला स जे मैथिली भाषा कए राज्य भाषाक दर्जा भेटबाक दावा करि रहल छथि, ओ इ बिसरी जाइत छथि जे मैथिलीक विरोध करनिहनर मैथिलपुत्र जगन्नाथ मिश्र आ चतुरा बाबू सन मधुबनी स चुनल जाइत रहल जनप्रतिनिधि छथि। तीन-तीन बेर बिहारक मुख्यमंत्री बनलाक बावजूद जगन्नाथ मिश्र अपन विधानसभा क्षेत्र झंझारपुर कए स्वतंत्र रूप स सड़क मार्ग स नहि जोडि़ सकलाह। एकर कोन गारंटी जे नारायण दत्त तिवारी जेकां अगर ओ नव मिथिला राज्यक मुख्यमंत्री बनताह, त उर्दूक स्थान पर मैथिली कए राजभाषाक दर्जा देताह या झंझारपुरक समग्र विकास करताह। सवाल जगन्नाथ मिश्रक नहि अछि, सवाल विकासक प्रवृति आ संस्कार स अछि। एखनो मिथिला क्षेत्रक नेता स्थानीय स्तर स बेसी राष्ट्रीय स्तर पर काज करबा लेल तत्पर रहैत छथि। सवाल उठैत अछि जे विकास लेल छोट राज्य बेसी कारगर या मजबूत स्थानीय प्रशासन। जाहि प्रकारक विकास स समाजक दशा बदलैत अछि, लोककजिनगी मे बदलाव अबैत अछि, ओहि तरहक विकासक जिम्मा स्थानीय प्रशासनक हाथ मे होएत अछि। केंद्र आ राज्य स्तर पर गरीब लेल बनाउल गेल योजनाक क्रियान्वयनक जिम्मेदारी शुरू स प्रखंड विकास पदाधिकारी स ल कए जिलाधिकारीक हाथ मे रहलअछि। आंकड़ा बता रहल अछि जे गरीब क्षेत्र मे स्थानीय प्रशासन बेहद कमजोर अछि। जनप्रतिनिधि आ स्थानीय पदाधिकारीक मिलीभगत स भ्रष्टाचारक गाथा लिखल जा रहल अछि। गरीब जनता लेल केंद्र या राज्य मुख्यालय स चलल टका प्रखंड मुख्यालय तक जाइत-जाइत डूमरीक फूल भ जाइत अछि। अलग राज्य बनला स नहि त इ प्रशासक बदलताह आ नहिए जनप्रतिनिधि। हां, एकटा शहर नव राजधानी जरूर बनत आ एकटा नेता मुख्यमंत्री। एकर संग-संग गरीब जनता पर खर्च होइवाला टका नव राज्यक नाम पर ओकर प्रशासनिक आधारभूत संरचनाक निर्माण मे खर्च भ जाइत।
मिथिला दर्शनक feb-2010 edition


We had 26 states and UTs in 1951 while population was 36 cror. For 1.4 cror population we had one state or UT. In 2001 we were 103 cror & now in 2011 we would be somewhere 114 cror. Population state ratio and for better governance, we should have somewhere 80 states on the formula adopted in 1951. What is wrong in cre…ating one Mithila state of 6 cror plus population? Come on Maithils ……
maithil ke pete pahad chhain hunka me ekjutta bhaiy nai sakai je o alag mithila rajy banva sakait