एक मुद्दा एक बैनर स चलत आब मिथिला राज्य आंदोलन

द्वी दिवसीय ऐतिहासिक विचार मंथनकेँ अद्भुत समापन
मैथिल मंच क बैनर स आंदोलन में लौटलाह महाराजा कामेश्वर सिंह
रामबाबू सिंह 
गाजियावाद (उप्र) । मैथिल मंचक तत्वावधानमे वृंदावन ग्रीन्स, मोहन नगरमे द्वी दिवसीय “विचार मंथन” ऐतिहासिक रहल। विविध आयाम केर छुबैत विभिन्न बथानक सँस्थागत वरिष्ठगण मिथिला आ मैथिलीक उत्त्थान मादे समर्पण सँग एकमंच सँ हुँकार भरलाह। विचार मंथनमे इ तय भेल जे मिथिला राज्य आंदोलन आब “एक मुद्दा, एक बैनर” स चलत। विभिन्न संस्था और अलग अलग नेताक नेतृत्वमे चलि रहल आंदोलनक बीच गठबंधन पर सहमति बनल। समस्त संगठन सँ एक व्यक्ति ल एकटा समग्र समिति बनाउल जायत आ समग्र समिति एहि आंदोलन क आगूक दशा और दिशा तय करत। मैथिल मंच एहि समग्र समिति क गठन लेल प्रयासरत अछि आ संगठनक बीच सहमति भेलाक बाद आब एकर गठन शीघ्र होएत।
मैथिल मंच क अध्यक्ष मणिभूषण राजू कहलथि जे आयोजककें एकमात्र उद्देश्य छल जे सभ गोटे केर एकठाम आनी आ हुनका लोकनिक मध्य आपसी तार जोड़ि सकी। फराक संस्था रहितहुँ मिथिला आ मैथिलीक उन्नति लेल स्वर सँ स्वर मिलाक कोरस मे आवाज बुलंद करथि आ ताहिमे सफलता सेहो भेटल। तेँ द्वी दिवसीय चिंतन शिविरक ई नव प्रयोगशाला सफल समापन कहल जा सकैए।
मैथिल मंच क बैनर स आंदोलन में महाराजा कामेश्वर सिंह कए लौटबाक संकेत पर श्री राजू कहलथि जे हमसब एहि आँदोलन के इतिहास पर अध्ययन क रहल छी..आ ई सोच मैथिल मंच के अछि जे महाराज के विजन पर आब राज्य आँदोलन आगा बढ़त।
द्वी दिवसीय “विचार मंथनक”  पहिल सत्रक (16 दिसम्बर) विशिष्ट अतिथि आ वक्ता छलाह मानव शास्त्री डॉ कैलाश कुमार मिश्र संगहि अहि सत्रकें अध्यक्षता मुम्बई सँ आएल चक्रधर कएलाह। “मिथिलामे औद्योगिक विकासक दशा आ दिशा” विषय पर विचार मंथन पर नीक नीक वक्ता सभक विचार सुनबाक अवसर भेटल। बीज भाषण  उदय शंकर मिश्र क ओजस्वी आ क्रांतिकारी रहलनि। ओ औद्योगिक विकास संगहि मिथिलाक भाषा आ राज्यक दशा पर केंद्रित क ” जय श्री राम” नाराकें ठूठ कहलखिन आ जोर देलखिन जे हमर सभक नारा अछि “जय सियाराम”। जखन सिया नै तखन रामक कोन अस्तित्व? सिया जीक बिना रामक कल्पना कम सँ कम मैथिल तँ नहिए क सकैए। तेँ ई नारा पूर्ण तखने जखन जय सियाराम होय। दोसर कार्तिकेय मैथिल स्वाबलम्बी होयबाक बात पर जोर देलखिन जे सरकार जे करताह से करताह मुदा हम सभ की कS रहल छी? आ से बड्ड जरूरी छैक। बहुत रास उद्योग धँधा हमरा सभ जँ चाहि ली तँ कएल जा सकैए। मानसिकता जँ बदलि ली तँ बहुत किछु स्वतः बदलि जाएत। तहिना सरोज झा पर्यटन क़े प्राध्यापक छथि ओ पर्यटन विकास पर जोर देलखिन आ तथ्य सँग विषय वस्तु केर छुबैत बहुत नीक पर्यटन विकास पर बात रखलखिन। कुटीर उद्योग, माँछ, मखान पोखरि झाखरि नदि नाला धार सँ कोना हमरा सभ जीवकोपार्जन क सकैए छी। मिथिला पेंटिंग सँग घरेलू बाजार केर कोना बढाएल जा ताहि सम्मत सेहो लगभग सभ वक्ता अपन विचार खुलिक रखलाह।
दोसर दिनुका सत्र केर अध्यक्षता डॉ धनाकर ठाकुर कएलाह आ मन्च संचालन उदय शंकर मिश्र कएलाह। दोसर दिनक विचार मंथनकेँ विषय छल ” मिथिला राज्य आंदोलन” काल्हि आई आ काल्हि जाहि विषय पर वक्ता सँ सजल मंचक शुरुआत कएलाह शिशिर झा आ ओ मैथिली विहीन मिथिला पर जोरदार प्रहार करैत कहलखिन जे मिथिलाक प्राण थीक मैथिली जँ मैथिली नै करत उत्थान तँ मिथिलाक उत्थान सेहो सम्भव नै। मिथिला आजादी के बाद कोना सभ क्षेत्रमे अधोमुखी दिस अग्रसर भ रहल अछि आ ओकर जिम्मेबार के ताहि पर सरलता सँ तथ्यात्मक बात रखलखिन तहिना दरभंगा विधान परिषद मे राज्यक मुद्दा उठेनिहार पार्षद सेहो आएल छलाह आ बजलाह जे ई तँ हमर एकगोट शुरुआत छल आगू जाहि तरहे मिथिलाक हित सम्भव भ सकैत छैक आ जँ हम क सकब तँ सदिखन हम तैयार रहब।
शरत भाई मिथिलावाद राष्ट्रवाद आ क्षेत्रवाद पर जोर देलखिन जे क्षेत्रवादी होयब गर्वक विषय थिक। क्षेत्रक विकास बिना राज्य आ देशक विकासक परिकल्पना झुनझुना मात्र छैक। मिथिलावादी नेता एक फोरम पर आबि एकगोट साझा कार्यक्रम कें नीचा काज करथि आ तेकर रूपरेखा जल्दिए बनि जाए फेर राज्यक चुनावमे स्थापित दलके चुनौती अवश्य द सकैए अछि। तखन राजनीतिक दल सेहो अपन चुनावी मेनिफेस्टो मे मिथिला राज्यक मुद्दा उठेबाक विवशता बुझतै आ फेर एकटा मुख्य मुद्दा बनि जनजनकें मानस पटल पर आबि सकैए।
प्रो० अमरेन्द्र जी सेहो सभक एकजुटता आ समर्पण पर जोर देलखिन। संजीव सिन्हा राज्यान्दोल सँ सम्बंधित पोथीक बाजार में कम देखल जा रहल संगहि बहुत किछु भ्रमजाल पसरल छैक ओकरा जनजागरण सँ ठीक करबाक बात पर जोर देलखिन। अध्यक्षीय सम्बोधन मे धनाकर बाबू मिथिला राज्यक तथ्यात्मक तर्क सँग लोकक सहभगिता आ समर्पण पर जोर देलखिन। एक मन्च पर सभ धाराक लोकक समन्वय सतरँगी सुखद अनुभूति भ रहल छल। सभ कियो अहि तरहक आयोजन सालमे दू टा कम सँ कम महानगर सँ लक मिथिलाक धरातल पर होयत रहबाक चाहि। जाहि सँ आपसी समन्वय बनय आ फेर एक सँग मैदाने जँगमे उतरबाक प्रयास करय।
वक्ता सँ सजल मन्चमे गणपति मिश्र, हेमन्त झा,चक्रधर झा, अयोध्या जी, रौशन मैथिल , कमलेश , कुणाल ठाकुर , आचार्य व्योम जी, विनोद कुमार झा तपन, प्रणव बैजू, मुरारी मनोज झा, बौआ, पवन नारायण , स्वेता , मोनी , अंजू , धीरज, अजय चौपाल आ संगहि कई गोटे उपस्थित छलाह |

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