पटना पुस्तक मेला : मैथिली पोथीक नहि अछि पृथक स्टॉल दोषी के

रौशन कुमार मैथिल

Patna Book Fairमिथिला क्षेत्र मे एकटा कहबी छैक, किछु लोहो क दोख आ किछु लोहारो क दोख । ई कहावत पटना पुस्तक मेला पर एकदम सटीक बैसैत अछि । पटनाक गांधी मैदान आई काल्हि पुस्तक मेलाक कारणे गुलजार अछि । मेलाक देखला स ज्ञात होइत अछि जे एखनो लोकक बीच मे किताब अपन स्थान बनौने अछि।

मातृभाषा मैथिली वा बिहारी आन भाषाक बारे मे गप करी त ई आयोजन किछु निराश केलक अछि । कारण एहि आयोजन मे एकहुटा मैथिली पोथीक पृथक स्टॉल नहि अछि । ओना साहित्य अकादेमीक संग संग राजकमल, अंतिका सहित अन्य प्रकाशक स्टॉल पर किछु मैथिली पोथी उपलब्ध है । पुस्तक विक्रेताक बात पर विश्वास कएल जाए त मैथिली सहित अन्य स्थानीय भाषाक पाठक प्रत्येक दिन पुस्तक लेल पूछताछ करै छथि । जं हुनका लग पोथी रहैत छनि त ओ पाठक कए ओकरा बारे मे बतबैत छथि । कुल मिला क एतेक कहल जा सकैत अछि जे मैथिली पोथीक बिक्री संतोष जनक कहल जा सकैत अछि ।

पुस्तक मेलाक संयोजक अमित झा एहि बारे मे कहै छथि जे एखन धरि भारतीय भाषाक लगभग तीस हजार स बेसीक पोथी बिका चुकल अछि । लागत बारे में ओ कहलिन जे लगभग सबा करोड़ स अधिक क पोथी बिका चुकल अछि । हुनका अनुसार कोनो स्टॉल लगौनिहार कए 29900 टका स्‍टॉल लगेबाक लेल देबय पड़ैत अछि । बदला में आयोजन समिति दिससं सभ तरहक व्यवस्था कएल जाइत अछि ।

ओतहि पटना पुस्तक मेला मे आयल मैथिली साहित्यकार डॉ शशिधर कुमार आयोजनक व्यवस्था स निराशा व्यक्त करैत कहलनि जे पहिने जकां आब आयोजन नहि कयल जाइत अछि । हुनका अनुसार पहिने साहित्य अकादेमी वा अन्य स्टाल पर अलग अलग भाषाक पोथी एक संग सजा क राखल जाइत छल । से आब नहि होइत अछि । परिणाम स्वरूप लोक कए परेशानी क सामना करए पड़ैत अछि । ओ कहलिन जे एहि बेर एक हजार क पोथी किनलहुं । आर पोथी जं उपलब्ध रहितैक तं आरो किनतौ । ओतहि भाजपाक मुख्य पत्र कमल संदेश क उप संपादक संजीव सिन्हा कहलनि जे समय निकालि पुस्तक मेला गेल रही । एक हजार टाका केर पोथी किनलौ । हुनका अनुसार जं एतहि मैथिली पोथी उपलबध रहितैक त बेसी मैथिली पोथी किनतहु, मुदा अफसोस से नहि भ सकल । श्री सिन्हा कहलनि जे एतहि उर्दू एकेडमी केर स्टाल अछि मुदा मैथिली एकेडमी केर स्टॉल नहि लगाओल गेल अछि । हुनका अनुसारे मैथिली लेखक और मैथिली समाज कए सोचक चाही । संजीव सिन्हा कहलनि जे एहि लेल बेसी दोषी मैथिली समाज अछि । ओ कहलिन जे अगिला बेर ओ अपना स्तरसं मैथिलीक स्टॉल लगेबाक लेल व्यवस्था करता ।

सवाल उठैत अछि जे कहिया धरि पाठक नहि हेबाक नाम पर रटल रटायल डॉयलॉग मारल जायत । उल्लेखनीय अछि जे एहि बीच किछु ऑनलाइन पोर्टल द्वारा मैथिली पोथीक बिक्री आरम्भ कयल गेल अछि । किछु पोथी कए बेस्ट सेलरक एवार्ड सेहो देल गेल अछि । एकर बादो जं मैथिली सहित आन बिहारी भाषाक प्रकाशक कहै छथि जे मैथिली पोथी नहि बिकाइत अछि त एकर जवाब में एतबे कहल जा सकैत अछि जे किछु लोहो केर दोष किछु लोहारो क दोष ।

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