कियो नहि उठेलक मिथिलाक विकासक नैतिक दायित्व

27 मार्च 1556 मे सरकार ए तिरहुत क स्थापना क 461 वर्ष पूरा हेबाक अवसर पर कईटा उद्योगक निदेशक रहि चुकल दरभंगा राजक कुमार शुभेश्वर सिंहक इ आलेख इसमाद पर विशेष रूप स प्रस्तुत कैल जा रहल अछि । करीब 30 साल पूर्व मिथिला परिक्रमा मे छपल इ आलेख आइ सेहो ओतबे प्रासंगिक अछि जेतबा ओहि समय छल । एक अर्थ मे ओहि समय स किछु बेसी । आइ जे कियो मिथिला आ मैथिलीक चर्च बा आंदोलन क रहल छथि, मिथिलाक आर्थिक विपन्नता कए उठेबाक प्रयास क रहल छथि ओ कतहु नहि कतहु एहि आलेखक दोहराव कहल जा सकैत अछि । आजुक मिथिला आंदोलनक इ सबस प्रामाणिक परचा थीक । एहि आलेख मे जे बात आइ स तीन दशक पूर्व कहल गेल अछि सैह बात आइ विभिन्न संगठन आ व्यक्ति अपन अपन वक्तव्य आ विजन बता दोहरा रहल छथि । एहि आलेखक दूरदर्शिता एहि स प्रमाणित होइत अछि जे मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार विकासक लेल जाहि विशेष दर्जाक मांग क रहल छथि से पिछला तीन दशक पूर्व एहि आलेख मे सबस पहिने कैल गेल छल।

मिथिलाक संकटक स्थिति सं चलि रहल अछि। सकंट बहुआयामी छैक। शैक्षणिक सांस्कृतिक, समाजिक आ सबसं बढि क आर्थिक। संक्रमण काल कष्ट कारक होइत छैक। किंतु मिथिलाक संदर्भ मे ब्यथाक अंत दूर धरि दृष्टिगोचर नहि भ रहल अछि।  मिथिलाक अपन एकटा सांस्कृतिक आ समाजिक परंपरा रहल अछि। अपन विश्ष्टि व्यक्तित्व रहल अछि। समय छल जखन मिथिला प्राचीन विद्या दर्शन भाषा आ सांस्कृतिक अध्ययन अध्यापनक केंद्र रहल छल, किंतु आकर ओ स्वरूप समाप्त प्राय छैक। मिथिलाक परिचय आब सांस्कृतिक क्रियाकलापक केंद्र क रूप मे नहि रहि पाबि रहल अछि। एकर परिचय आब यदि कोनो छैक त एहन क्षेत्रक रूप मे जतए बहुसं यक लोक भूखल अछि, अनपढ अछि, बेराजगार अछि आ गृह विहीन अछि। शैक्षणिक अराजकता छैक। मिथिलाक आर्थिक परिवर्तनक पहिलो सीढी पर एखन धरि पेर नहि रखने अछि। सत्तर प्रतिशत जनसं या निर्धनता सीमा रेखाक नीचा अछि। भारत मे प्रति व्यक्ति आय बिहार मे सबस कम छै, आ बिहार मे सबस कम प्रति व्यक्ति आय मिथिला मे। स्वतंत्रता भेटलाक चारि दशक भेल, किंतु स्वतंत्रताक असली रूप स मिथिलावासी अपरिचित छथि।
कारण की भेलक। किया छै मिथिलाक एहन आर्थिक दुर्दशा। एतुका भूमि त भारत भरि मे सर्वाधिक उपजाउ मानल जाइत रहल अछि, आ कहियो अन्न उत्पादन मे देश भरि मे प्रमुख स्थान छैलेक एकर। आब की भ गेलैक। हरित क्रांति स मिथिला कियेक वंचित रहि गेल। कृषक आ मजदूर जी तोड मेहनत केलाक बादो दूनू सांझक भोजन व्यवस्था करबा मे असमर्थ भ अपन परिवार आ समाज कए छोडि आन राज्य दिस भागी रहल अछि। की एतुका लोक मे कोनो कमी छै, अथवा कोनो आन कारण अछि। पंजाब आ हरियाणा मे खेती योग्य भूमि कए सत्तर स अस्सी प्रतिशत भूमि क लेल निश्चित सिचाई क व्यवस्था छैक आ ओकर विपरीत मिथिला मे अस्सी प्रतिशत भूमि एखनो निश्चित पटौनी क व्यवस्था स वंचित अछि। पश्चिम कोसी नहर योजना जे एहि क्षेत्रक भाग्य बदलबाक दावा केने छल, कहिया धरि पूरा होएत, कहल नहि जा सकैत अछि। ऊपर स बाढिक भीषण प्रकोप आ रौदी क आतंक। बाढि कए राष्ट्रीय स्तर पर जेतेक हानि होइत छै, ओकर एक चौथाई नुकसान असगर मिथिला मे होइत छै। मिथिला गरीबी आ पिछडापन क प्रर्याय बनि गेल अछि। की स्थिति अछि औद्योगिकरणक । गृह उद्योग हो, लघु उद्योग हो वा वृहत उद्योग, कतहु कोनो सुगबुगाहट नहि। मिथिला मे जे किछु कच्चा माल उपलब्ध छल, आकरा उपयोग मे आनैवाला कोनो नव उद्योग स्थापित नहि भ सकल। मिथिला भारतक उद्यान कहबैत छल। आम, लीची, केरा आ अन्याय फसलक प्रचूर सं या मे उपलब्ध रहलाक बादो अ मट, जैम, जेली या रस बनैवाला कोनो कारखाना नहि खुलल, जखनकि हिमाचल प्रदेश अपन सेव आ नाश्पाती क विभिन्न उपयोग क आर्थिक रूपे समृद्धतर भेल अछि। मिथिलक पोखरिक समयक विकास क माछ आ मखानक उत्पादन स करोडों अर्जित कैल जा सकैत छल। परंतु संभवत: इ सब स्वपन थीक। वास्तविकता की अछि। जेहो उद्योग अछि, से मृत अथवा मृतप्राय। अशोक पेपर मिल, रामेश्वर जूट मिल, लोहट, सकरी आ रैयाम चीनी मिल आदि सब बंद अछि या बंद हेबाक स्थिति मे अछि। जेहो किछु नव उद्योग लगेबाक प्रयास कैल गेल सेहो संकल्पक अभाव मे अर्पूण अछि। अशोक पेपर मिलक कर्मचारी आ मजदूर भूखमरिक शिकार भ रहल छथि। कूसिआर उपजाबैय वाला किसान कए वर्षक वर्ष बीत गेलाक बादो कुसियारक मूल्य नहि भेटैत छैक।
कोनो क्षेत्रक पिछडापनक अर्थशास्त्रीक जतेक मापदंड छै, मिथिला ओहि सब मापदंड पर खांटी उतरैत अछि। पक्का रस्ताक लंबाई, प्रति वर्ग किमी एहि क्षेत्र मे सबस कम। गामक त कथे कोन, शहरों मे रस्ताक अभाव अछि। जेहो रास्ता अछि सब टूटल फाटल आ जीर्ण शीर्ण अवस्था । दुर्घटना होइत रहैत छै। जान मालक हानि होइत रहैक छै, परंतु से सुनत कए। मिथिलाक लोक त बड संतोषी आ भाग्यवादी अछि ने। अपन दुदर्शा कए अपन नियति मानि लेत आर की। बडी रेल लाइन, सकरी हसनपुर रेल लाइनक योजनाक उदघाटन भेल आ पूर्ण योजना वापसो ल लेल गेल। एको इंच पटरी नहि बैस सकल। करब की। विद्युतक खपत प्रति व्यक्ति भारते नहि, बिहारो मे सबस कम अछि। विद्युत नहि त उद्योग धधा कोना होएत। रास्ता नहि छैक त उद्योग द्वारा उत्पादित माल सबहक आवागमण कोना होएत।
शैक्षणिक जगतक की हाल छै। जनक याग्यवल्क्य आ विद्यापतिक भूमि मे स्थापित विश्वविद्यालय, महाविद््यालय आ विद्यालय सब मे अराजकता अछि। संस्कृत विवि एहि स्वपनक संग स्थापित कैल गेल छल जे प्राचीन सांस्कृत आ विद्याक अध्ययन अध्यापनक इ केंद्र रहत। आबए वाला पीढी कए प्राचीन संस्कृत स मार्गदर्शन भेटबा मे सहायता भैटतैक। किंतु स्थ्िित त यैह अछि जे दुर्लभ आ अमूल्य पुस्तक आ पांडूलिपि सब एकर पुस्तकालय स लुप्त भ रहल अछि। मिथिला विवि एहि क्षेत्रक मेधावी आ परिश्रमी छात्र शिक्षक कए आधुनिक ज्ञान महिमा स मंडित करक लेल स्थापित भेल। उद्देश्यक पूर्ति भेल की।
आ एहि क्षेत्रक भाषा मैथिली कतए अछि। भारतक कोनो समृद्ध भाषा स टक्कर लेब वाला मैथिली एखनो सविधानक अष्टम अनुसूचि मे स्थान नहि पाबि सकल अछि। अपन लिपि छै मैथिली कए। साहित्यक समृद्ध परंपरा छै एहि भाषाक, किंतु प्राथमिको स्कूल धरि मातृभाषा मैथिली मे पठन पाठनक समूचित व्यवस्था नहि भ सकल अछि।
भारत सरकार स बिहार सरकार गोहारि करैत रहैत अछि जे क्षेत्रीय असंतुलन दूर करक लेल आ बिहार कए आर्थिक रूपे राष्ट्रीय स्तर पर आनक लेल विशेष सहायता आ अनुदान देल जाये। किंतु बिहार मे जे क्षेत्रीय असंतुलन छै तेकरा कोना दूर कैल जाएत। मिथिला विकासक प्रति क्षेत्र मे राष्ट्रीय औसत स बहुत पाछा अछि। संसाधनक विनियोग मिथिलाक विकास मे बहुत कम भेल अछि। बैंक एंव अन्य आर्थिक संस्था एहि क्षेत्रक विकास मे बहुत कम योगदान देने अछि। ऋण व जमा एहि क्षेत्रक लेल बीसक करीब छै, तात्पर्य जे एतुका लोक अपन पसीना क कमाई स जे धन बैंक मे जमा करैत अछि ओकर बीसे प्रतिशत एहि क्षेत्रक विकास मे । केहन विडंबना छै जे एहि क्षेत्रक गरीब जनताक बचत धनी राज्य सब कए समृद्ध बनेबा मे खर्च कैल जाइत अछि।
कियेक छै इ सतत निर्धनता। के सोचत एहि सब बात के। बुद्धिजीवी वर्गक नैतिक दायित्व छैन जे एहि क्षेत्रक पिछडापनक कारणक पता लगाबैथ आ मिथिलाक सर्वांगिन विकासक उपाय ताकथि…
(लेखक दरभंगा राज परिवारक सदस्य आ कईटा कंपनीक निदेशक छलाह)

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