विश्व धरोहर क सूची मे शामिल भेल अपन नालंदा

नीतीश कुमार आ संजय सरावगी संग कतेको लोक देलथि बधाई

नई दिल्ली/पटना । युनाइटेड नेशंस एजुकेशनल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (यूनेस्को) महाबोधि मंदिर क बाद बिहार क दोसर स्थल नालंदा क खंडहर कए विश्व धरोहर मे शामिल क लेलक अछि। तुर्की क इस्तांबुल मे विश्व धरोहर समिति क 40म बैसार मे चारिटा नव स्थल कए शामिल करबाक घोषणा कैल गेल।

यूनेस्को कहलक जे प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय क अवशेष वल्र्ड हेरिटेज साइट मे शामिल क लेल गेल अछि। शुक्रदिन करीब दू बजे यूनेस्को अपन वेबसाइट पर विश्व क प्रथम विश्वविद्यालय नालंदा कए सूची मे स्थान द देलक।  विश्व धरोहर मे शामिल होनिहार इ भारत क 33 वां धरोहर छी। बिहार स्थित नालंदा महाविहार (नालंदा विश्वविद्यालय) संग एहि सूची मे चीन, ईरान आ माइक्रोनेशिया क सेहो तीनटा नव स्थल कए स्थान देल गेल अछि।

घोषणाक बाद भारत क संस्कृति मंत्रालय ट्वीट केलक, ‘बधाई.. नालंदा महाविहार क पुरातत्व स्थल आब विश्व धरोहर स्थल बनल। धन्यवाद यूनेस्को, इरिना बोकोवा।Ó इरिना बोकोवा यूनेस्को क एशिया क्षेत्र क महानिदेशक छथि।मुख्यमंत्री नीतीश कुमर सेहो बधाई दैत कहला जे राज्य सरकार आ केन्द्र सरकार क संयुक्त पहल क फलस्वरूप नालंदा महाविहार क भग्नावशेष कए यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित कैल गेल। एहि महत्वपूर्ण उपलब्धि लेल यूनेस्को मे प्रस्ताव क समर्थन करनिहार सब सदस्य देश कए हुनकर सहयोग लेल आ संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, यूनेस्को मे भारतीय दूतावास, भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण, राज्य क कला, संस्कृति आ युवा विभाग आ सब संबद्ध अधिकारीगण कए हुनकर प्रयास क लेल हार्दिक धन्यवाद। दरभंगा क भाजपा विधायक संजय सरावगी कहला जे बिहार आ देश लेल गौरव क एहि क्षण मे सब गोटे कए बधाई। पटना स्थित पुरातत्व अधीक्षक डॉ. प्रवीण कुमार मिश्र कहला जे एहि घोषणा स नालंदा क गरिमा बढ़बाक संगहि भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण आ बिहार सरकार क दायित्व सेहो काफी बढि़ गेल अछि।  नालंदाक जिलाधिकारी डॉ. त्यागराजन एस मोहनराम कहला जे एहि ठामक लोक बधाई क पात्र छथि, जे एकरा एखन धरि संजोकए रखने रहलाह। पटना प्रमंडलक कमिश्नर आनंद किशोर कहला जे एहि स स्थानीय लोकक संगहि बिहार क लोक कए काफी फायदा भेटत। रोजगार क अवसर बढ़त। 15 साल स एकरा लेल प्रयास भ रहल छल। वल्र्ड हेरिटेज साइट मे शामिल भेलाक बाद सैलानी क संख्या मे बेतहाशा वृद्धि होएत। सुविधा मे बढ़ोतरी क संगहि सुरक्षा व्यवस्था पहिने से बेसी चुस्त होएत। धरोहर क संरक्षण पर पहिने स बेसी खर्च होएत। एकर विकास, सुरक्षा आ संरक्षण क जिम्मेवारी आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया और बिहार सरकार क होएत।

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