मिथिलाक वाममार्गी सन अछि आईसलैंडक तंत्र पद्धति

तंत्रक चर्च होइत देरी भांति भांतिक जिज्ञासा जन्‍म ल लैत अछि। दुनिया भरि मे एहि साधनाक प्रति जिज्ञासा रहल अछि। हिंदी जगत जरुर तंत्र कए काला जादू या झाड-फूंस कहैत अछि, मुदा पश्चिम समाज तंत्र पर गहन शोध करैत रहल अछि। तंत्र साधनाक वैश्‍विक प्रसार अछि। मिथिलाक तंत्र साधना पश्चिमक तंत्र साधना स अलग अछि, मुदा देखल जाय जे मिथिला आ ई सुदूर ध्रुवीय देश आईसलैंडक पूजा पद्धति कोना एक सन अछि। आ यदि सभ ठामक तंत्र मे किछु समानता अछि, त सत्यता सेहो एक रंगक होएत। एहि गूढविषय पर नब नजरिया स देखबाक प्रयास करैत प्रस्‍तुत अछि एकटा विज्ञानक व्यक्ति, पेशा स डॉक्‍टर आ साहित्‍य अनुरागी नॉर्बे निवासी डॉ प्रवीण कुमार झाक इ ज्ञानबर्द्धक आलेख। – समदिया

आईसलैंड भूत-प्रेतक देश अछि। ओतुका तंत्र पद्धति प्राचीन, आ लिपि में सेहो तंत्रक विन्यास। तंत्रक लिपि सँ की तात्पर्य? बाबू जयधारी सिंह के शोध छलनि जे मिथिलाक्षर (तिरहुता) के तंत्र सँ संबंध छैक। तिरहुताक त्रिकोणाकार लिपि तंत्र के त्रिकोण सँ प्रभावित छहि। तंत्र के यंत्र सभ सँ। जे लिखल अछि, ओहि में एकटा भिन्न शक्ति अछि। नॉर्वे के बर्गन आ आईसलैंड में अहिना उकेरल अक्षर सभ भेटत। ईसाई क्रॉस, यूक्रेन में भेटल स्वास्तिक, वा बौद्ध यंत्र सभ एक्कहि सन थीक। महायान परंपरा में शक्ति (पराशक्ति) के समावेश करइ के उद्देश्य की छल? ईसाई धर्म के प्रचार में जादूगर आ अय्यारक प्रवेश कियैक भेल? आनंदमार्गी सभक चर्चा नहि करब। मुदा शक्ति के प्रवेश सँ धर्म के विस्तार कयल गेलहि, आब लोक बिसरि गेल। अखनो आईसलैंड में, तिब्बत में, मिथिला में, बंगाल में, अफ्रीका में, आ किछु हिंद महासागरीय द्वीप (जेना रियूनियन द्वीप) में तंत्रक उपयोग कयल जा रहल अछि। एकर चर्चा विलियम डैलरिम्पल अपन पोथी ‘एज़ ऑफ कलि’ में आ ताहिर शाह अपन पोथी ‘सॉर्सरर एप्रेंटिस’ में सेहो कयलनि।

आनंद कूमारास्वामी अप्पन पोथी ‘बुद्धा ऐंड गोस्पेल ऑफ़ बुद्धिज़्म’ में जे लिपि सभक चर्चा केने छथिन, ओहि में तिरहुता सन सेहो। महायान बौद्ध तांत्रिक परंपरा सँ मिथिलाक संबंध नुकायल नहि। थंका भगवती उग्रताराक रूप छथिने आ ‘ललित विस्तार सूत्र’ में सेहो तिरहुता लिपिक चर्चा। अजुका तिब्बती लिपि सँ मिलान कय लिय, ओहिना मिथिलाक्षर जकाँ त्रिकोण भेटत। राहुल सांकृत्यायन जी के आनल कतेक तिब्बती अभिलेखक मिलान कय लिय। पटना संग्रहालय में राखल तिब्बती तारा भगवती के देख लिय। वा द्वारिका शास्त्री जी के गुह्यसमाज पर लिखल पोथी देख लिय।

आईसलैंड के लिपि सेहो त्रिकोणाकार। लिखल लैटिने छैक, मुदा त्रिकोण जेकाँ। पहिने (आ अखनो) आईसलैंड के ‘विचक्राफ्ट आ जादू-टोना’ विख्यात छल। ई मिथिला में प्रचलित बाममार्गी तंत्र वा गुह्यसमाजी तंत्र सँ मेल खाइत पद्धति थीक। सभटा वीभत्स गप्प एतय नहि खोलब, मुदा दीवान जरमनी दास के किताब में जे दरिभंगाक कौल आचार्य के तंत्र के चर्चा छनि, बूझू आईसलैंड के पद्धति में ओहि रूप में भेटल।

एकटा जतरा पर निकलि रहल छी, जतs तांत्रिक सँ संवाद होयत। तांत्रिक आईसलैंड के पच्छिम इलाका में रहइत छथि, आ हुनक प्रश्न एतबय छलनि जे अहाँ के तंत्र आ प्रेत में विश्वास अछि? जँ नहि अछि, तखैन गप्प कs के फायदा नहि। आईसलैंड जेहन विकसित देश में सभ के प्रेत में विश्वास छहि। अंतर्ध्यान कs के बिला जेनाई। घर में तांत्रिक अनुष्ठान से भूत आ डायन (ट्रॉल) से रक्षा। आ सेहो अजुका युग में। मुख्य गप्प ई कि पद्धति एकहि जेकाँ। मिथिला आs आईसलैंड के तंत्र के मिलान कs के सभटा गप्प लिखब।

अखनि एतय भरि मास अमावस्ये छहि। भूत-प्रेतक आदर्श विचरन काल। हिम-प्रदेशक सुनसान में, अकाश में, आ ज्वालामुखी सभक मध्य आब केहन प्रेत आ केहन डायन सभ भेटत, नहि कहि। ओतुका लोक केश सँ पयर तक धप-धप बेताल जकाँ गोर होइत छैक। आब ओहि में के मनुक्ख, आ के प्रेत, सेहो कहनाइ कठिन। ई त मजाकक गप्प भेल, मुदा देखल जाय जे मिथिला आ ई सुदूर ध्रुवीय देशक पद्धति कोना एक सन अछि? आ यदि सभटा तंत्र में किछु समानता अछि, तs सत्यता सेहो की? एकटा विज्ञानक व्यक्ति लय एकर कोन तर्क? बिना गप्प केने, शोध केने, कोना कहब?

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