1912 स मांगल जा रहल अछि अलग मिथिला राज्‍य, कहिया धरि ताकब बाट

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रोशन मिश्रा
दिल्ली । 1912 स मिथिला कए अलग राज्‍य बनेबाक मांग भ रहल अछि, मुदा एहि दौरान अनेक राज्‍य विभिन्‍न आधार पर बनल मुदा मिथिला सब आधार पर अपन दावा रखैत आइ धरि अपन निर्माणक बाट ताकि रहल अछि। एहि निमित संसदक शीतकालीन सत्रक पहिल दिन अखिल भारतीय मिथिला राज्य संघर्ष समिति के तत्वावधान में “पृथक मिथिला राज्य” लेल दिल्ली के संसद मार्ग पर विशाल धरना-प्रदर्शन भेल। धरना-प्रदर्शन के अध्यक्षता डॉ. शमायले नवी आ संचालन ई. शिशिर कुमार झा कयलथि। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री बैद्यनाथ चौधरी “बैजू” जी कहलथि कि मिथिला के सामाजिक, भाषायी, सांस्कृतिक, शैक्षणिक, औद्योगिक आ राजनीतिक आजादी लेल एकमात्र विकल्प अछि – “पृथक मिथिला राज्य”।
एहि लेल मिथिला सं जुड़ल समस्त राजनीतिक आ गैर-राजनीतिक संगठन सबसं ओ आग्रह आ आवाहन कयलन्हि जे आब ई लड़ाई निर्णायक मोड़ पर आबि गेल अछि, सबगोटे एक-संग आबि एहि लक्ष्य के पूर्ण करू। महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह मिथिला राज्य परिसीमन जागृति यात्राक दोसर चरण के घोषणा करैत बैजू जी कहलथि जे अगामी 21 दिसंबर सं 24 दिसंबर 2018 तक होयत।
धरना-प्रदर्शन में प्रमुख वक्तागण में सांसद विरेन्द्र चौधरी, विधायक सुधांशु शेखर झा, कमलाकांत झा, आर एन झा, पार्षद रंजीत कुमार आ अजीत झा, विनीत झा, विनोद राज झा, हीरालाल प्रधान, अंजू झा, कवि विकलजी, राजू यादव आदि प्रमुख छलथि।
विदित होई कि अ.भा.मिथिला राज्य संघर्ष समिति पछिला कतेको वर्ष सं संसद के हरेक सत्र के पहिल दिन सतत “पृथक मिथिला राज्य” लेल धरना-प्रदर्शन करैत आबि रहल अछि। एहि बेर के ई आयोजन बहुत तरहें नव, आकर्षक आ उत्साहवर्धक रहल। एहि बेर धरना स्थल पर जे बैनर देखायल ओ “मिथिला राज्य आंदोलन” के 100 वर्ष सं बेसी के इतिहास समेटने आ लाखों मुनाईत आंखि सबलेल नव आस जगा देलक।
याद पड़ैत अछि कि ई बैनर विगत वर्ष 16-17 दिसंबर 2017 के श्री ताराकांत मिश्राजीक मार्गदर्शन में वृंदावन ग्रीन्स,गाजियाबाद में आयोजित भेल “मिथिला राज्य आंदोलन” लेल देशभरि सं आयल मिथिला राज्य अभिमानी गण के “विचार मंथन शिविर” में देखायल छल। “मैथिल मंच” के संयोजन आ डा. धनाकर ठाकुर के अध्यक्षता में डॉ. अयोध्यानाथ झा, श्री चक्रधर झा, श्री उदय शंकर मिश्र, श्री रत्नेश्वर झा, श्री अशोक झा, श्री गणपति नाथ झा, श्री विजय चन्द्र झा, प्रो. अमरेन्द्र झा, ई. शिशिर कुमार झा,ई. शरत झा, श्री रामबाबू सिंह, डा. कैलाश कुमार मिश्रा, श्री हेमन्त झा, योगाचार्य श्रीरवि व्योमशंकर झा, श्री दीपक झा, श्री विनय पाठक, श्री तपन झा, श्री अरुण कुमार मिश्रा, श्री शिवम झा   संग सैकड़ों आंदोलनी के उपस्थिति में एकीकृत मिथिला राज्य आंदोलन हेतु प्रण लेल गेल छल।एहि के बाद पछिला मास नवंबर में एहि बैनर सं मिथिला के परिसीमन हेतु “महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह मिथिला राज्य परिसीमन जागृति यात्रा” निकालल गेल छल जकर प्रथम चरण में दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया, नवगछिया, भागलपुर, कटिहार, पूर्णियां, अररिया, फारबिसगंज, सुपौल, मधेपुरा, आ सहरसा में मिथिला राज्य लेल जनजागरण भेल। एहि के बाद आई दिल्ली में यदि मिथिला-मैथिली आंदोलन के प्रतीक श्री बैद्यनाथ चौधरी “बैजू” एहि बैनर संग आवाहन कय रहलाह त निश्चय ई “मिथिला राज्य आंदोलन” के सबसं उग्ररूप  के सूचक अछि आ नीक संदेश अछि।
परिसीमन यात्राक सूत्रधार मणिभूषण ‘राजू’ आ संयोजक श्री आशीष चौधरी फोन पर सूचित कयलन्हि जे दोसर चरण में एहि मास दिसंबर के 21 सं 24 तारीख के दरभंगा, सीतामढ़ी, शिवहर, होईत जनकपुर में मां जानकी के आशीष लैत मधुबनी होईत वापस होयत। यात्राक तेसर चरण दरभंगा सं मुजफ्फरपुर, वैशाली, हाजीपुर होईत पटना में मुख्यमंत्री के ज्ञापन संग समाप्त होयत। मणिभूषण ‘राजू’ कहलनि जे आगाक “मिथिला राज्य आंदोलन” एहि बैनर पर युवावर्ग के नेतृत्व में समस्त मार्गदर्शकगण के मार्गदर्शन में आगा चलत आ “पृथक मिथिला राज्य” के लक्ष्य तक पहुंचब।

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