‘मौलाना’ स ‘भक्‍त’ तक रहल जगन्नाथक राजनीतिक सफर

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तीन बेर बिहार क मुख्यमंत्री रहल डॉ. जगन्नाथ मिश्रा क राजनीतिक सफ़र मे कईटा मोड़ आ उतार-चढ़ाव आयल। कांग्रेसी परिवार स ताल्लुक रखनिहार जगन्नाथ मिश्रा एक वक़्त मे ‘मौलाना’ भ शक्तिशाली क्षेत्रीय क्षत्रप बनि कए उभरल छलाह, जिनकर अंत भारतीय जनता पार्टी क दुहारि पर ‘भक्‍त’ रूप मे भेल।

एहि यात्रा क बीच मे कुछ काल लेल हुकर पड़ाव जनता दल यूनाइटेड सेहो रहल, जाहि ठाम हुनकर संगहि हुनकर पुत्र नीतीश मिश्रा सेहो राजनीति यात्रा शुरु केलथि। 2005 स 2009 क बीच नीतीश कुमार क सरकार मे नीतीश मिश्रा कैबिनेट मंत्री रहलाह।

जखन-जखन जगन्नाथ मिश्रा मुख्यमंत्री बनलाह, तखन तखन सरकार मे पैघ नीतिगत फैसला भेल। सहकारिता, सरकारीकरण आ समाजवाद हुनक कार्यकालक विशेषता रहल। पहिल कार्यकाल मे औद्योगिक सुधार केलथि, जाहि मे निजी कारखाना सबहक सरकारीकरण भेल। दोसर कार्यकाल में शिक्षाक क्षेत्र मे सुधार केलथि जाहि मे उर्दू कए दोसर राजकीय भाषा आ निजी स्‍कूल आ कॉलेज कए सरकारीकरण केलथि। तेरस कार्यकाल छोट मुदा भागलपुर दंगा के सामाजिक सुधारक काज करबा लेल प्रयासरत रहलाह। प्रेस बिल आ आंखिफोडबा कांड क अलावा बॉबी हत्‍याकांड हिनकर कार्यकालक चर्चित घटना रहल।

1970 क दशक मे बिहार कांग्रेस विरोधी आंदोलन क केंद्र मे रहल। तखन राजनीति मे नौसिखिया जगन्नाथ मिश्रा कए तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी पैघ ज़िम्मेदारी देलथि। 11 अप्रैल, 1975 कए जगन्नाथ मिश्रा पहिल बेर बिहार क मुख्यमंत्री बनलाह। इ बहुत कठिन समय छल। ओहि साल 3 जनवरी कए हिनकर पैघ भाई आ तत्कालीन रेल मंत्री ललित नारायण मिश्रा क हत्या समस्तीपुर मे करि देल गेल छल। आपातकाल क दौरान कांग्रेस पार्टी क सामने पैघ चुनौति छल।

हिनकर मुख्यमंत्री बनबा स ठीक एक साल पहिने मार्च 1974 मे बिहार मे छात्र आंदोलन क शुरुआत भेल छल। ओकर धाह स जेपी आंदोलन क नाम स आगि धधकी गेल छल। अब्दुल ग़फ़ूर क बाद जखन इ मुख्यमंत्री बनलाह त हिनकर बैस महज़ 38 साल छल। देश क सबस युवा मुख्यमंत्री छलाह। मिश्र एहि पद पर 30 अप्रैल, 1977 तक रहलाह। 21 महीना क आपातकाल क बाद जनता पार्टी की सरकार सत्ता मे आयल आ कर्पूरी मुख्‍यमंत्री भेलाह।

1980 क चुनाव मे इंदिरा गांधी क जीत क बाद उत्तर भारत क कईटा राज्य मे दोबारा चुनाव भेल। बिहार मे कांग्रेस क जीत क बाद जगन्नाथ मिश्रा कए फेर स मुख्यमंत्री बनाउल गेल। ओ दोसर बेर 8 जून, 1980 कए मुख्यमंत्री पद क शपथ लेल आ 1983 मे स्वतंत्रता दिवस क एक दिन पहिने यानी 14 अगस्त कए हुनका पद स हटा देल गेल।

गांधी परिवार क विश्वस्त हेबाक बावजूद ओ बिहार मे कांग्रेस क भीतर कईटा प्रतिद्वंद्वी ढार केलथि। अपन दोसर कार्यकाल क दौरान ओ राज्य मे उर्दू कए दोसर आधिकारिक भाषा क मान्यता देलथि। जुलाई 1982 मे जगन्नाथ मिश्रा राज्य क विधानसभा मे कुख्यात बिहार प्रेस बिल अनलाह। ओकरा सदन स पास करेलाह। एहि मे प्रेस कानून क उल्लंघन करनिहार पत्रकार लेल सज़ा क प्रावधान कैल गेल छल। देशभरि क पत्रकार एकर ख़िलाफ़ आवाज़ उठल। एहि क़ानून कए आपातकाल स जोडल गेल। विरोध मे अख़बार अपन संस्करण कए बंद केलक। एक साल बाद भारी विरोध क कारण राष्ट्रपति क मुहर लगबा स पूर्व इ बिल वापस ल लेल गेल।

साल 1989 मे भेल भागलपुर दंगा क बाद कांग्रेस पार्टी क सूरज डूबए लागल छल। केंद्र मे कांग्रेस क हार आ वी.पी. सिंह सरकार बनलाक बाद राजीव गांधी स्थिति कए देखैत छह साल बाद जगन्नाथ मिश्रा कए एक बेर फेर बिहार क मुख्यमंत्री बनेलाह, मुदा कोनो फायदा नहि भेल।

फ़रवरी 1990 मे विधासनभा चुनाव कराउल गेल, जाहि मे जनता दल क लालू प्रसाद यादव कांग्रेस कए बिहार क सत्ता स बेदख़ल करबा मे कामयाब रहलाह। 10 मार्च, 1990 कए लालू प्रसाद यादव बिहार क नव मुख्यमंत्री पद क शपथ लेलथि। आओर एहि तरह स जगन्नाथ मिश्रा बिहार क अंतिम कांग्रेसी आ सवर्ण मुख्यमंत्री साबित भेलाह।

लालू प्रसाद यादव आ जगन्नाथ मिश्रा राजनीतिक प्रतिद्वंदी छलाह, बावजूद एकर दूनू मे कईटा समानता अछि। जनवरी 1996 क चारा घोटाला मे दूनू क नाम सामने आयल।  घोटाला स जुड़ल एक मामला मे दूनू दोषी पाउल गेलाह। मिश्रा जेकां लालू सेहो ईलाजरत छथि।

दूनू कहियो राज्य क अल्पसंख्यक राजनीति क चैंपियन मानल जाइत छथि।  हालांकि एक समय एहन आयल जखन दूनू नेता अपन पार्टी क त्‍याग केलथि। लालू यादव जनता दल से अलग भ अपन पार्टी राजद बनेलथि त जगन्‍नाथ ओहि पार्टी कए त्‍यागि देलथि जे हुनका राज्य क तीन बेर मुख्यमंत्री बनेलक। अपन बिहार विकास पार्टी आ ओकर बाद जदयू मे रहलाह आ अंत में ओकर हाथ पकडि लेलथि जेकर विरोध स हुनकर राजनीति जीवन शुरु भेल छल आ जीवन भरि ओकर विरोध मे चलल। पिछला चुनाव मे मोदी क भक्‍त क रूप मे हिनकर राजनीतिक सक्रियता देखल गेल।

प्रेरक साभार – बीबीसी हिंदी डॉट कॉम

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