धान रोपनी लेल विकसित एहि यंत्र स मजदूरक जरुरत होएत कम

विनीत ठाकुर
पूसा (समस्तीपुर)। कहावत छैक आवश्यकता आविष्कार क जननी थिक । एहि कहावत केँ चरितार्थ कैलनि अछि केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, पूसा क वैज्ञानिक डॉ सुभाष चन्द्रा। गृहस्थ क कठिनाई आ लागत पर ध्यान दैत ओ एकटा नव मशीन क आविष्कार कैलनि अछि जे धान आ गहूँम क रोपनी, बाउग सीधा पाँती मे बिना जन ( मजदूर) क कय सकता। एहि यंत्रक सहायता सँ खेती करबा मे समय आ अर्थ क बचत होयत।
प्रसन्नता क विषय जे एहि यंत्र केँ मधुबनी, पंडौल क एक प्रसिद्ध कृषि यंत्र निर्माण कंपनी विकसित कैलक अछि। डॉ चंद्रा क कथनानुसार मानव चालित एहि मशीन सँ एक व्यक्ति एक दिन मे एक से डेढ़ एकड़ तक खेत मे सोझ पतियानी में धान वा गहुम क बाउग क सकैत छथि।
लागत क हिसाबेँ ई सर्व सुलभ होयत। जंग निरोधी आ लागत कम रखबा लेल मशीन मे प्लास्टिक से बनल पार्ट सब बेशी उपयोग कयल गेल अछि। एकर दाम लगभग बारह हजार टाका क लगीच हेतैक। आ वजन त २७ से किलो छैक।
वैज्ञानिक डॉ सुभाष चन्द्रा कहलनि जे एकर सफलतापूर्वक परीक्षण विश्वविद्यालय प्रक्षेत्र सहित आनो ठाम कयल गेल । पंडौल मे एहि मशीन क उपयोग से धान क राजेंद्र भगवती प्रभेद क बाउग १७ मार्च केँ कैल गेल छल तकर उपज ६५ क्विंटल प्रति एकड़ भेल। मशीन क मूल्यांकन हेतु कंपनी विश्वविद्यालय सँ अनुरोध कयने छल जकर आलोक मे विश्वविद्यालय तीन सदस्यीय कमेटी क गठन कैलक जे२३ जुलाई केँ मूल्यांकन कैलक।कंपनी क एमडी राजन कुमार राय मशीन क खरीद पर सरकारी अनुदान दियेबा हेतु प्रयासरत छथि।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

comments