कर्जामे डूबल आईएल एंड एफएस पर केंद्र सरकार कएलक कब्जा

रामबाबू
नयी दिल्‍ली । केंद्र सरकार आईएल एंड एफएस केर अपन नियंत्रणमे लेलाक बाद नव बोर्डक गठन कए देलक अछि। डूबय सँ कोना बचाओल जाए से जुगत आब नवका गठित बोर्ड तय करत। मुदा अहि अवस्था धरि पहुचेबा बला एकर जिम्मेबार अधिकारीगण पर सरकार दम साधने अछि। कर्जामे डूबल आईएल एंड एफएस पर केंद्र सरकार कब्जा कएलक। तहिलेल सरकार 6 सदस्यीय बोर्डक सेहो गठन क’ देलक अछि। बोर्डक अध्यक्ष कोटक महिंद्रा बैंक केर प्रबंध निदेशक उदय कोटक केर बनाओल गेल अछि। बोर्डमे टेक महिंद्रा केर प्रमुख विनीत नैय्यर, पूर्व सेबी चेयरमैन जी एन वाजपेयी, आईसीआईसीआई बैंक केर नॉन-एक्जीक्यूटिव चेयरमैन जी सी चतुर्वेदी, पूर्व आईएएस अधिकारी मालिनी शंकर आऔर नंद किशोर केर सदस्य बनाओल गेल अछि।
आईएल एंड एफएस केर नवका बोर्ड 8 अक्टूबर क’ बैसार करत आओर नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल – एनसीएलटी केर निर्णयक जानकारी देत। एकर बाद कंपनी कें उबारबाक योजना बनाओल जाएत, जाहिलेल एनसीएलटी 31 अक्टूबर केर तारीख तय कएलक अछि। वित्त मंत्रालय एकटा बयान देलक अछि कि देशक गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनि सभमे नकदी केर समस्या खत्म करय लेल ई डेग उठायब आवश्यक छल। संगहि सरकारक अहि डेग सँ वित्तीय बाजारमे भरोसा सेहो बढ़त आओर आशा अछि कि वित्तीय संस्थान गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनि सभकेँ मदति देत।
देख’  बला बात अछि कि आईएल एंड एफएस पर 91,000 करोड़क कर्ज अछि, आऔर ओ अपन देनदारि सभ चुकता करबामे नाकाम रहल अछि। अहिकें सँग कतेको रेटिंग एजेंसि सभ आईएल एंड एफएस के रेटिंग घटा देलक अछि। अहिसँ पूर्व सरकार एनसीएलटीमे एकटा आईएल एंड एफसी बोर्ड केर भंग करबाक अर्जी दSक आग्रह कएने छल। सरकार कहने छलाह कि वर्तमान बोर्डकें चलैत रहला सँ नोकसान भ’ सकैत अछि, संगहि आम लोकक हितमे सेहो नहि रहत। सरकार ई डेग तखन उठेलक जखन कि रविदिन आईएल एंड एफएस घोषणा कएने छल कि शेयरधारक सब बाजार सँ कर्ज उठएबाक स्वीकृति दS देल अछि। अहिसँ पूर्व कंपनी इहो कहैत छल कि ओ अपन कर्ज चुकएबाक आऔर परिसंपत्ति सभकेँ निपटएबाक योजना पर विचार क’ रहल अछि।
ई कोनो पहिल अवसर नहि अछि जे सरकार कर्जमे डूबल कोनो कंपनीके बचएबाक लेल अपन नियंत्रणमे लS रहल अछि। अहिसँ पूर्व 2009 मे सत्यम केर विषयमे सेहो सरकार कंपनीक बोर्ड भंग कS अपन कब्जामे लैत 10 सदस्यीय निदेशक मंडल बनओने छल। एकर चेयरमैन एचडीएफसीकें चेयरमैन दीपक पारेख छल। लेकिन सत्यम आऔर आईएल एंड एफएस केसमे फर्क ई अछि कि सत्यम केर प्रोमोटर 15000 करोड़क गबन केर स्वीकार कएने छल आऔर कंपनी डूब’ लागल त’ करीब 50,000 लोकक नौकरि खतरामे पड़ि गेल रहय। ओहि संकटकालमे सरकार दखल देने छल आऔर निजी हाथमे कंपनीकें दSक अपन देखरेखमे नहि केवल कंपनीकें बचओलक बल्कि हजारों लोकक नौकरी सेहो सुरक्षित कएलक।
लेकिन आईएल एंड एफएस केर मामिलामे केंद्र सरकार एलआईसी आऔर एसबीआई केर रुपैया उपयोग कS 60 प्रतिशत बला अहि कंपनी कें बचएबाक प्रयास कS रहल अछि। आईएल एंड एफएस केर अपन नियंत्रनमे लैत केंद्र सरकार एनसीएलटीक समक्ष सामने ई त’ कहलक कि एकर वर्तमान प्रबंधन एकरा संकटमे पहुँचा देलक अछि, लेकिन अहि प्रबंधन केर आला अधिकारि सभक  खिलाप की कार्रवाई कएल जाएत, से किछु स्पष्ट नहि कएलक?

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