मैथिल सिनेमा जगत मे प्रेमक बसात बहेबा लेल तैयार छथि रुपक

रुपक शरर आइ सिनेमा जगत लेल एकटा उभरैत नाम छथि ।  केजरीवाल हाई स्कूल, झंझारपुर सँ अवकाश प्राप्त शिक्षक कुमार साहेबक पुत्र रतुपार गाम क उभरैत सितारा छथि । रुपक साल 2014 मे निर्माता-निर्देशक  उदय राज क मैथिली फिल्म  ‘घोघमें चाँद’ क  मुख्य अभिनेता क रुप मे काज केलथि । अनिल पतंग निर्मित ‘जटजटिन’ सिनेमा क ‘क्रियेटिव डायरेक्टर’  रुपक क लिखल हिन्दी फिल्म, ‘चैहर’ जेकि बिहारक एकटा लोक कथा पर आधारित छल । लेखक-निर्देशक कए रुप मे रुपक ल क आबि रहल छथि अपन पहिल मैथिली फिल्म, ‘प्रेमक बसात’। इसमाद लेल रुपक शरर स विस्‍तार स गप केलथि अछि मणिभूषण राजू । प्रस्‍तुत अछि ओकर किछु खास अंश…। – समदिया

प्ररतुपार स मुंबई तक क बाट केतबा सुभितगर रहल

उ- मिथिलाक ओहि छोट गाम सँ हमर रंगमंचीय यात्रा प्रारम्भ भेल छल । बृजेन्द्र कुमार  ‘कलाकार’ जीक नाम सँ प्रसिद्ध हमर सभहक बाबा (दादाजी) निर्देशक छलाह । हुनका निर्देशन मे पहिने हमर पिताजी सभ भाय नाटक खेलेने छलाह आ बाद मे हमसभ भाय खेलेलहु । कालेज खत्म केलाक बाद मुज़फ्फरपुर दूरदर्शन मे एंकर सह कम्पेयर, जमशेदपुर इप्टा होइत ड्रामा स्कूल, मंडी (हिमाचल प्रदेश) सँ डिप्लोमा, दिल्ली थियेटर आ तकरा बाद मायानगरी मुम्बई पहुंचलौं।

प्र- काफी कठिन आ चुनौती भरल रहल बाट तय कए मुम्बई एला पर कोना अपना कए स्थिर कैल, एखन धरिक उपलब्धि ।

उ- देखियौ, हमरा नजैरमे, चाहे अहाँ जाहि कोनो कार्य क्षेत्र मे छी, उपलब्धि जकां कोनो बात नहि होई छै । जरुरत अछि, कर्मठता आ ईमानदारीक संग अपन दायित्वक निभेबाक । आब जेना अहा पत्रकार छी, आई हमर क्रियाकलाप कए पाठक तक पहुंचा रहल छी, काल्हि किनको दोसर कए पहुंचेबैन। रहल गप्प फिल्मकार क रुप मे हमर दायित्वक, त अखन त शुरुआत भरि अछि.. बहुत काज करक छै।

ओना, अहांक सवाल क जे भाव छल ओहि मुताबिक हम कहब इ जे मुम्बई एला पर हम टेलीविजन धारावाहिक मे अभिनय सँ अपन काजक शुरुआत केलहु आ तकरा बाद आठ-नौ सालकें अहि सफर मे कतेक रास धारावाहिक लिखबाक मौका सेहो भेटल, किछु धारावाहिकमे ‘क्रियेटिव डायरेक्टर’ क भूमिका सेहो निभेलहूँ । साल 2014 मे निर्माता-निर्देशक, उदय राज जीकें मैथिली फिल्म- ‘घोघमेचाँद’ क मुख्य अभिनेताक रुप मे करबाक मौका भेटल। अनिल पतंग निर्मित ‘जटजटिन’ सिनेमा क हम ‘क्रियेटिव डायरेक्टर’ रही आ तकरा बाद आयल हमर लिखल हिन्दी फिल्म, ‘चैहर’ जेकि बिहारक एकटा लोक कथा पर आधारित छल। अखन हम लेखक-निर्देशक कए रुप मे ल क आबि रहल छी, मैथिली फिल्म, ‘प्रेमक बसात’।

प्र-   प्रेमक बसात सँ पहिने जे सिनेमा अहाँ लिखने रही ओ हिन्दी मे छल, तखन मैथिली सिनेमा बनाबयक विचार कोना आयल?

उ- बहुत अहम सवाल कएल अहां । दरअसल मैथिली सिनेमा बनाबय कए विचार त बहुत दिनसॅं दिमाग मे छल, मुदा एकर बाजार नहियो रहैत, बाजार बनेबा क सपना देखयवला निर्माता कए तलाश छल, जेकि वेदांत झा जी क रुप मे हमरा भेटल।

प्र-  अपन आबयवला सिनेमा, प्रेमक बसात क बारे मे किछु कहू।

उ- प्रेमक बसात एकटा प्रेमकथा पर आधारित सिनेमा अछि, जेकि सामाजिक संरचना के रुप मे निर्विवाद रुप सॅं विवादास्पद प्रेम कहल जा सकैत अछि । कारण एकर पृष्ठभूमि मे हिन्दू-मुस्लिमक प्रेम देखाओल गेल अछि। कलाकार क चयन मे निश्चित रुप सॅं थियेटर आ बालीवुड सॅं जुड़ल कलाकार सभकए  प्राथमिकता देल गेल अछि, जाहि मे पीयूष कर्ण, रैना बनर्जी, जीतू सम्राट, मोनारे, शरत सोनू, प्रेमनाथ झा, कल्पना मिश्रा, आरती मिश्रा, प्रज्ञा झा, शैलझा, आकाश दीप,अनुराग कपूर, राजीव झा, आशुतोश सागर आ गोविन्द पाठक कए नाम सम्मिलित अछि।

प्र-  त ई नहि मानल जाये जे विवादास्पद प्रेमकथा स समाज मे तनाव उत्पन्न होएत?

उ- कदापि नहि। बल्कि प्रेमक बसात अपन नाम कए अक्षरश: चरितार्थ करत, से हमर पूर्ण विश्‍वास अछि।

प्र-  मैथिली सिनेमा पर काज केनाई चुनौतीपूर्ण अछि। अहां एकरा कोन तरहें देखैत छी?

उ-  देखियौ, भाषा चाहे जे हो, सिनेमा बनेनाई हमेशा सॅं चुनौतीपूर्ण रहल अछि। दोसर गप्प जे कोनो भाषा कए विकास मे बोलचालसॅं ल कए साहित्य, संगीत, थियेटर आ सिनेमाक अहम योगदान होइत अछि। विगत वर्ष मे किछु नीक मैथिली सिनेमाकए निर्माण सेहो भेल मुदा दुर्भाग्य जे बहुतेक रास सिनेमाकए हॉल नसीब नहि भेल। सोझ गप्प ई जे एकर सफलता अहि बात पर बेसी निर्भर करैत अछि जे लोक एक-दोसरा कए प्रोत्साहित कतेक क रहल अछि। समग्र सकारात्मक सहयोगक अभाव मे कोनो चीज आई धरि नहि फूलि-फलि सकल ये । हॅं, अहि मे गुणवत्ताक ध्यान राखब सर्वोपरि अछि।

प्र-   मिथिला मे संगीत क परंपरा पुरान अछि एकर गीत संगीत केहन अछि ?

उ- सांच कहू त हम यैह प्रश्‍न क प्रतीक्षा मे रही। दरअसल गीत-संगीत क बिना हमर व्यक्तिगत जीवन सेहो अधूरा बुझना जाइत अछि। प्रेमक बसातमे रोमांटिक गीतक अलावा, सूफी, कव्वाली आ लोक धुन पर आधारित गीतक रचना अयोध्या नाथ चौधरी, शेखर अस्तित्व आ सारिका कुमार केने छथिन, जखन कि अहि रचनासभए कर्णप्रिय धुन तैयार केने छथिन संगीतकार, सरोज सुमन आ प्रवेश मल्लिक जी । श्रोता सभकए एकर गीत-नाद खूब पसंद एतनि, ई हमर पूर्ण विश्‍वास अछि।

प्र-  आजुक समय मे सोशल मीडिया सिनेमा जगतकए प्रचार-प्रसारक लेल एकटा  नव माध्यम अछि। अहां एकरा कोना देखैत छी?

उ- सिनेमा जगत नहि, बल्कि जगत भरि मे प्रचार-प्रसारक एकटा मजगूत माध्यम साबित भ चुकल अछि। हमहू एकरा सकारात्मक दृष्टिकोण सॅं देखैत छी।

प्र-   प्रेमक बसात क सफलता क कामना, पाठक कए कोनो समाद देबय चाहब?

उ- जेना कि हम पहिनहुं कहलहुं  जे समग्र सकारात्मक सहयोगक अभाव मे कोनो चीज आई धरि नहि फूलि-फलि सकल ये…सभ सॅं पहिने त विनम्र निवेदन जे बेसी सॅं बेसी संख्या मे थियेटर उपलब्ध करेबा मे मदद करू..उपरांत सपरिवार ‘प्रेमक बसात’ देखय लेल आबू।

प्र- इसमाद स गप करबा लेल धन्‍यवाद।

उ- अहूं कए धन्‍यवाद..सिनेमा देखब जरूर।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

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