सूखा गेल श्रीश चौधरीक कलम

आशीष झा/ कुमुद सिंह
श्रीश चौधरी मात्र एकटा व्यक्तिक नाम नहि अछि। इ एकटा जमात अछि, जे पिछला 15 साल स अपन असफलता कए समाज आ राज्य क माथ पर द कलम चलबैत रहल। एहि प्रकारक लोकक विद्वान हेबाक एक मात्र आधार छल जे इ बिहार क गरीबी कए बाहर जा कए एकटा चित्रकार क भांति चित्रित करैत रहलाह। सवाल उठैत अछि, श्रीश चौधरीक चर्चा आइ किया? दरअसल, ‘समादÓ जे पिछला तीन साल स (14 जनवरी 2007) अहांक सबहक बीच बिहारक सकारात्मक खबर पहुंचा रहल अछि, ओकर पाछु जे व्यक्ति छथि ओ श्रीश चौधरी छथि। समाद पिछला सप्ताह बिहारक विकास दर देश स आगू रहबाक चमत्कारी समाद अहां तक पहुंचेलक। पिछला दू दिन स देशक प्रमुख अखबार बिहार क एहि चमत्कारी रूप कए अभिनंदन करि रहल अछि। एहन मे श्रीश चौधरीक ओ आलेख रहि-रहि कए मन पड़ैत अछि। नीतीश सरकार बनलाक बाद अंगरेजी अखबार ‘हिंदू’ मे एकटा प्रवासी बिहारीक नाम पर छपल आलेख मे चौधरी दावा केने छलाह जे बिहार कए कियो नहि बदलि सकैत अछि। जखन बिहार मे बदलाव कए हवा उठल छल, बिहारी अपना कए बदलवा मे जुटल छल, तखन बिहार स दूर दक्षिण भारत मे बैस कए एहन दावा केनिहार एहन प्रवासी बिहारी कए आइ कोना बिसरी सकैत छी। श्रीश चौधरी सन अभिजात्य प्रवासी बिहारीक आइ कलम सूखा गेल। ओ आब आंकड़ा मे मीन-मेष निकालि सकैत छथि, मुदा ओ जनैत छथि जे जेकरा ओ ‘अनसुधरेबुल’कहैत छलाह ओ अपन दम पर इ चमत्कार केलक अछि। इ मानबा मे ककरो दिक्कत नहि जे बिहार मे आयल बदलाब मे कोनो बाहरी जहां धरि प्रवासी बिहारीक योगदान तक नहि रहल। एहि चमत्कार क पाछु बिहारक ओ तबका अछि, जे हुनका जेकां भागल नहि, डटल रहल बिहार कए बदलबा मे। कोसीक बदलैत धार हुए बा एक हजार मेगावाट बिजली क कारण अनहार बाट, ओ तबका नहि रुकल आ नहि भटकल। एहि मे दू राय नहि जे बाट एखन लंबा अछि, मुदा एतबा त जरूर कहबाक साहस भ चुकल अछि जे बिहार ‘अनसुधरेबुल’नहि अछि, ओ बदलि सकैत अछि, सेहो अपन दम पर।
कनि सोचू जे बिहार मे गुजरात जेकां बिजली उपलब्ध रहिते, त कि बिहार गुजरात स पाछु रहिते। इ सच अछि जे 11.03 फीसदी विकास दर भेला मे बिजलीक योगदान कम अछि, एकर पाछु कृषि उत्पादन क भूमिका महत्वपूर्ण अछि जे एखनो वर्षा पर निर्भर अछि। लेकिन कनि सोचू अगर पश्चिमी कोसी नहर 50 साल बादे सहि तैयार भ गेल रहिते त कि कृषि क विकास दर बिहारक विकास दर कए सबस आगू नहि करि सकैत छल। ध्यान देबा लेल इ सेहो अछि जे अगर कोसी अपन बाट नहि बदलिते त कि बिहार मात्र शून्य दू फीसदी स प्रथम स्थान स वंचित नहि रहिते। निश्चित रूप स नकारात्मक परिस्थिति मे सकारात्मक परिणामक एकटा उदाहरण बनि गेल अपन बिहार।
आलेखक शेष भाग छह जनवरी कए