विकसित मिथिला आखिर कोना बनल पिछडल मिथिला

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आजादीक उपरांत मिथिलाक विकास पर चर्च आ मंथन कम, भोकारि पारि कए कनबाक काज बसी भेल। एकर आर्थिक पक्ष पर बहुत कम लिखल गेल। एकर विकास लेल विजन की छल, ताहि पर शोध नहि भेल। मिथिलाक आर्थिक विकासक ढांचा की छल, एहि ठामक जमींदार आ राजाक आमदनी स्रोत की-की छल, केहन छल रोजगारक अवसर। किया नहि होइत छल तहिया मजबूरी वाला पलायन। बहुत रास एहन सवालक उत्‍तर एहि शोधपरक आलेख में औद्योगिक विकास अध्‍ययन संस्‍थान, नयी दिल्‍लीक सहायक प्राध्‍यापक डॉ अजीत झा दबाक कोशिश केलथि अछि। हुनकर एहि आलेख में सहायक लेखक छथि हैदराबाद विश्‍वविद्यालय के पूर्व छात्र कुमार आशीष। आई मिथिला पिछडल अछि। चीनी आ जूट कारखानाक सब गप करैत अछि, मुदा मिथिलाक आर्थिक रीढ त लघु और मध्‍यम उद्योग छल, जे आइ पूर्णत: खत्‍म भ चुकल अछि। सबस आश्‍चर्य जे पैघ कारखानाक रोजगार आ विकास मे हिस्‍सेदारी बहुत कम छल मुदा विकासक नाम पर दहाड मारनिहार ओकर नाम टा जपैत छथि जखनकि मिथिला क पिछडापन लेल लघु आ मध्‍यम उद्योग क खत्‍म होएब मूख्‍य कारण रहल अछि। डॉ झाक एहि शोध परक आलेख कए तीरभुक्ति पत्रिका क अक्‍टूबर-दिसंबर अंक लेल मैथिली मे अनुवाद केलथि अछि पूर्णिया जिलाक सुखसेना गामक नमिता झा। इसमाद डॉ अजीत झाक इ रिपोर्ट साभार प्रस्‍तुत क रहल अछि।- संपादक

मिथिला: एक परिचय

मिथिला क्षेत्राक अस्तित्वक जानकारी पौराणिके काल सँ अछि। उत्तर मे हिमालय, दक्षिण मे गंगा नदी, पूरब मे महानंदा आ पश्चिम मे गंडक नदी सँ घेरल एहि भू-भागक विवरण प्राचीन शास्त्रा यथा सतपथ ब्राह्मण ;1000-600 ईसा पूर्वद्ध बृहद् विष्णुपुराण आदि मे सेहो भेटैत अछि। प्राचीन काल मे एकरा विदेह, तीरभुक्ति आदि अनेको नाम सँ जानल जाइत छल। बादक समय मे एकरा मिथिला केर नाम सँ जानल गेल जे एखन बहुप्रचलित नाम अछि।
मध्यकाल मे एकटा स्वतंत्रा राज्यक स्थापना 1097 ई. मे कर्णाट या सिमराव राजवंश केर राजा नान्यदेवक माध्यम सँ कयल गेल छल। सन् 1324 मे गयासुद्दीन तुगलक केर आक्रमणक परिणाम स्वरूप अंतिम कर्नाट राजा हरसिंह देव नेपाल जा के एकटा नव राजवंशक स्थापना कयलनि। एहि राजवंश मे ज्योतिश्वर नामक रचयिता सेहो भेलाह, जेकि ‘वर्णरत्नाकर’ नामक प्रचलित गद्य केर रचना कयलनि। कर्नाट राजवंशक बाद ओइनवार या सुगौना राजवंश मिथिला मे शासन व्यवस्था सम्हारलनि। एकर बाद बंगाल केर नसरत शाह साम्राज्य हासिल कयलनि। अकबर 1556-57 ई. मे अपन शासनकाल मे महामहोपाध्याय महेश ठाकुर वेफं मिथिलाक प्रशासक बनैलनि, जकर पफलस्वरूप मिथिला मे खांडवा राजवंशक नींव पड़ल। ई मिथिला केर अंतिम आ स्वतंत्रा भारत केर पूर्व तक विद्यमान राजवंश मे एक छल।
बाबू विद्यापति सिंह सन् 1955 मे प्रकाशित अपन किताब मिथिलाक उद्योग आओर व्यापार मे दर्शयलनि अछि, जे अहि क्षेत्राक कुल क्षेत्रापफल 25 हजार वर्गमील छल, आओर एकर कुल जनसंख्या लगभग 2 करोड़ छल। एकर अन्तर्गत तखनुका पूर्वी चम्पारण, मुजफ्रपफरपुर, दरभंगा, सहरसा, पूर्णिया, उत्तर मुंगेर, उत्तर भागलपुर, मोरंग, सप्तरी, महोत्तरी, सरलाही, रोतहट, बारा आओर परसा आदि जिला आबैत छल। एहि मे सँ कतेको जिला वर्तमान मे नेपाल मे अछि।
एहि सँ ई ज्ञात होइत अछि जे मिथिला क्षेत्राक सीमा आ एकर शासन व्यवस्था एक पैघ भू-भाग पर होइत छल। वर्तमान मे भारत मे मिथिला क्षेत्रा सँ बिहार राज्य केर उत्तर पूर्वी भाग वेफं जानल जाइत अछि। एकरा अंतर्गत वर्तमान पूर्वी चम्पारण,सीतामढ़ी, शिवहर, मुजफ्रपफरपुर, दरभंगा, मधुबनी, समस्तीपुर, बेगूसराय, खगडि़या, सहरसा, मधेपुरा, सुपौल, पूर्णिया, कटिहार, किशनगंज, अररिया, भागलपुर आओर बांका जिला आबैत अछि।
2011 केर जनगणनाक अनुसार ई क्षेत्रा बिहार राज्य केर करीब 47 प्रतिशत क्षेत्रापफल आओर 51 प्रतिशत जनसंख्या वेफं समाहित करैत अछि। एहि क्षेत्रा मे जनसंख्याक घनत्व 1202 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर अछि, जखन कि बिहार राज्य आ भारतक लेल ई आंकड़ा क्रमशः 1102 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर आ 381 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर केर अछि। लिंगानुपात मे राष्ट्रीय औसत 940 महिला प्रति हजार पुरुषक अछि। एकर तुलना मे सिपर्फ किशनगंज जिला मे ई अनुपात 946 महिला प्रति हजार पुरुषक अछि, जे राष्ट्रीय औसतक समीप अछि। आन सभ जिला मे ई अनुपात राष्ट्रीय औसत सँ नीचा अछि। भागलपुर जिला मे लिंग अनुपातक स्तर 879 महिला प्रति हजार पुरुष अछि, जे मिथिला क्षेत्रा मे न्यूनतम अछि। दरभंगा जिला वेफ छोडि़ कए आन सभ जिला मे दशकीय जनसंख्या बृद्धि दर 2011 मे 25 प्रतिशत सँ बेसी छल। दरभंगा मे ई दर 19 प्रतिशत केर छल, जखन कि राष्ट्रीय औसत बृद्धि दर 17.6 प्रतिशत छल। 2011 केर जनगणनाक अनुसार, साक्षरताक दर औसत 74 प्रतिशत अछि। एकर तुलना मे मिथिला केर जिला मे साक्षरताक दर पूर्णिया मे निम्नतम 52.2 प्रतिशत सँ ल कर बेगूसराय मे अधिकतम 66.2 प्रतिशत रहल। महिला साक्षरता दरक स्थिति त, आओर असंतोषजनक अछि। सहरसा मे निम्नतम स्तर 42.7 प्रतिशत अछि, बेगूसराय मे उच्चतम स्तर 57.1 प्रतिशत अछि, जखन कि राष्ट्रीय औसत 65.5 प्रतिशत अछि।
देशक अन्य भाग मे जतय शहरीकरण केर तेजी सँ विस्तार भ’रहल अछि ओत्तहि बिहार आ खास कए मिथिलाक अन्तर्गत आब’ बला सभ जिला वर्तमान जनगणनाक अनुसारे ग्रामीण क्षेत्रा मे आबैत अछि। भागलपुर, बेगूसराय आ पूर्णिया मे शहरीकरण केर स्तर क्रमशः 19.8 प्रतिशत, 19.2 प्रतिशत आओर 10.4 प्रतिशत अछि। शेष सभ जिला मे शहरीकरण केर स्तर 10 प्रतिशत सँ नीचा अछि। शहरीकरण केर राष्ट्रीय औसत 31.2 प्रतिशत अछि। कुल रोजगार मे नियमित कामगारक प्रतिशत सेहो प्रतिकूल अछि। वर्ष 2011-12 मे पूर्वी चम्पारण मे ई आंकड़ा 10.8 प्रतिशत केर छल जे मिथिला के सभ जिला मे सब सँ बेसी छल। जखन कि मिथिलाक 10 जिला मे ई आँकड़ा 5 प्रतिशत सँ कम छल। एहि तरहें प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पादक मामला मे सेहो स्थिति बहुत निराशाजनक अछि। 14 जिला मे राष्ट्रीय औसत केर एको तिहाई सँ कम अछि, सिर्फ बेगूसराय आ भागलपुर जिला मे ई राष्ट्रीय औसत केर लगभग आध केर बराबर अछि।

औद्योगिक विकास प्राचीन परिदृश्य

मिथिलाक प्रमुख
रुग्ण उद्योग


  • पटसन प्रसंस्करण
  • कागज उत्पादन
  • वस्त्र प्रसंस्करण
  • बंद पड़ल 16टा चीनी मिल
  • बरौनी खाद कारखाना

मिथिलाक आर्थिक व्यवस्था पुरान समय सँ कृषि पर आधरित रहल अछि। एहि क्षेत्राक भूमि गंगा, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला आदि सँ सम्पोषित होइत रहल अछि, आओर प्रति वर्ष बाढि़क दौरान एकर सतह पर आनल गेल माटि केर नव परत सँ एहि क्षेत्राक प्राकृतिक उर्वरता बनल रहैत अछि। उद्योग-ध्ंध सेहो मुख्यतः कृषिये पर केन्द्रित छल, आ बेसी लोक ग्रामोद्योग सँ जुड़ल रहैल छल। लोक अपन दक्षता आओर जातिक आधर पर भिन्न-भिन्न प्रकारक गृह आ कुटीर उद्योग मे संलग्न छल। उत्पादक स्तर छोट छल आओर ई मुख्य रूप सँ स्थानीय बजारक मांग पर आधरित होइत छल। एहि उद्योग मे मुख्यतः धातुक बर्तन, प्राकृतिक रंग, सिंदूर, लकड़ीक सामान, पटसनक बोरा इत्यादि बनेबाक काज होइत छल।
एहेन संदर्भित अछि जे 19म शताब्दी मे मिथिला मे धतुक बर्तन बनेबाक कतेको गृह उद्योग छल, लेकिन बीसम सदी आबैत-आबैत एहि मे सँ कतेको उद्योगक ”ह्रास भ’ गेल। सिपर्फ पूर्णिया आओर कटिहार मे किछु गिनल-गूंथल कारीगर रहि गेल छल, जे धतुक बर्तनक निर्माण आओर एहि पर नक्काशी केर काज करैत छल। एहि तरहं 19म शताब्दी मे पूर्णिया मे पटसनक बोरा बनेबाक काज होइत छल। मुख्य रूप सँ कच, भीम, पालिया आओर राजवंशी जातिक महिला सभ पटसनक बोरा बनेबाक काज करैत छली। पटसनक बनल ई बोराक माँग स्थानीय बाजार सँ ल’ कए दूर-दराज आओर बाहरी बाजार मे सेहो छल। छोट व्यापारी एकरा कीनि कए किशनगंज आओर महानंदा केर पैघ बाजार मे एकरा बेचैत छल आओर ओतय सँ दूरक बाजार मे ल’ जा कए बेचै जाइत छल। कागज बनेबाक काज मुस्लिम संप्रदाय केर लोक करैत छल जकरा ‘कगजिया’ केर नाम सँ बजाओल जाइत छल।
एक तरह सँ एतय इहो स्पष्ट होइत अछि जे पूर्णिया आओर एकर अगल-बगल केर क्षेत्रा मे गृह, सूक्ष्म आओर कुटीर उद्योग सँ संबंध्ति अनेक वस्तुक निर्माण होइल छल, आओर एकर व्यापार सुदूरवर्ती बाजार तक कयल जाइत छल। अन्य विवरण सँ सेहो एहेन प्रतीत होइत अछि जे मध्यकाल मे पूर्णिया मिथिला क्षेत्राक अन्दर औद्योगिक विकासक एक प्रमुख केन्द्र होइत छल। मिथिला मे कतेको एहेन क्षेत्रा छल जतय लघु उद्योगक श्रेणी मे एतय वस्त्रा बनेबाक काज वृहद स्तर पर होइत छल।
स्त्री लोकनिक भूमिका एहि मे प्रमुख छल जे सूत कातब सँ ल’कए वस्त्र बुनबाक काज करैत छली। पूर्णिया जिला रेशम वस्त्रक निर्माण केर प्रमुख केन्द्र छल। प्रफांसिस बुकानन अपन गणना सँ देखौने अछि जे सन् 1809-10 मे पूर्णिया मे 59,300 रुपैयाक कच्चा रेशम तैयार कएल गेल छल, आओर एकरा बनेबा मे 200 करघा केर उपयोग कएल गेल छल, जकरा 125 सँ बेसी परिवार संचालित करैत छल। एहि तरहे मल-मल वस्त्राक निर्माण मे मधुबनी एक प्रमुख केन्द्र छल। मधुबनी केर गौरा, कपसिया आओर पंडौल आदि गाम मे खास तरहक मल-मल तैयार कएल जाइत छल, जकरा कोकटी चाहे अच्छे मल-मल केर नाम सँ जानल जाइत छल। बाबू विद्यापति सिंह केर किताब मे ई वर्णित अछि जे ईस्ट इंडिया कंपनी मल-मलक कपड़ा केर सुन्दरता सँ प्रभावित भ’ कए एकरा बढ़ावा देबाक लेल कार्यरत लोक सभ वेफं अग्रिम मौद्रिकण केर सहयोगक प्रावधान कयने छल।
एकर व्यापार कलकत्ता, मुर्शिदाबाद आदि इलाका मे होइत छल। आँकड़ाक अनुसार वर्ष 1909-10 मे एहि इलाका मे 50,600 रुपैयाक मूल्यक मल-मल तैयार कएल गेल छल।
कुल मिला कए मिथिला मे वस्त्र बुनाई, लकड़ी आओर धतुक वस्त्र केर विनिर्माण इत्यादि प्रमुख उद्योग मे आबैत छल। 20म सदी मे एहि क्षेत्रा मे चर्म उद्योग, तेल निकालब, बीड़ी, साबुन, लहठी-चूड़ी, शिप बटन बनेबाक गृह-कुटीर उद्योग विभिन्न भाग मे आयल। समय केर संग एहि उद्योग मे तकनीकी विकास आओर आधुनिकीकरण प्रभावी ढंग सँ नहि भ’सकल आओर पूंजीक कमी बराबर बनल रहल। ई पारंपरिक उद्योग औद्योगिक क्रांति केर अयबाक बाद मशीन सँ बनल सामान वेफं प्रतिस्पर्धा नहि द’पौलक जाहि सँ एहि उद्योग केर सतत् ”ह्रास होइत चलि गेल।
बृहत् उद्योग मे चीनी, शोरा आओर नीलक उत्पादन केर कतेको फैक्ट्री लगाओल जेबाक प्रमाण 18म सदी केर उत्तराद्ध आओर 19म सदी केर पूर्वाद्ध मे बेसी भेटैत अछि। किछु इलाका मे जूट आओर तम्बाकू केर फैक्ट्री सेहो लगाओल गेल छल। पूर्णिया आओर सहरसा जिला मे सस्ता दर पर मजदूर उपलब्ध् हेबाक कारणे पटुआ केर नीक खेती होइत छल। विद्यापति सिंह एहि क्षेत्रा मे किछु पैघ जूटक कारखाना केर वर्णन कयने छथि, जाहि मे कटिहार जूट मिल्स लिमिटेड आओर मोतीलाल चमडि़या जूट मिल्स आओर रामेश्वर जूट मिल्स लिमिटेड समस्तीपुर मे वृहद स्तर पर जूट निर्माणक जिक्र अछि।एहि तरहें दरभंगा, चम्पारण, दलसिंह सराय, बेगूसराय, पूर्णिया आदि मे नीलक खेती वृहद स्तर पर होइत छल आओर नील वेफं राखबाक लेल कतेको कोठी बनाओल गेल छल। ब्रिटिश शासन काल मे नीलक खेती केर रकबा बढि़कए लगभग 1 लाख एकड़ जमीन पर भ’गेल छल।1850 ई. मे सिपर्फ दरभंगा आओर मुजफ्रपफरपुर मे नीलक 68 फैक्ट्री छल जकर संख्या अन्य क्षेत्र कए मिलाकर 1874 ई. मे 126 भ’ गेल छल। एहि फैक्ट्री सभसँ तैयार नील कलकत्ता आनल जाइत छल, जतयसँ समुद्री मार्गक माध्यमसँ एकरा यूरोप आओर अन्य देश मे भेजल जाइत छल। उनीसम सदी तक मिथिला मे लगभग 3 लाख एकड़ जमीन पर नीलक खेती होइत छल आओर ई कुल आमदनी केर एक प्रमुख स्रोत छल। मुदा कृत्रिम रंगक प्रचलन केर संग नीलक उत्पादन मे कमी आयल आओर 20म सदी केर प्रारंभिक दशक मे एकर उत्पादन लगभग समाप्त भ’ गेल। उपयुक्त माटि आओर जलवायुक कारणे मिथिला केर चम्पारण, मुजफ्रफरपुर, दरभंगा, समस्तीपुर आदि क्षेत्र मे कुसियारक नीक खेती कएल जाइछ आओर एहि क्षेत्र मे चीनी केर कतेको मिल सेहो खोलल गेल, मुदा नीलक उत्पादन मे बेसी लाभ भेटबाक कारणे 19म सदी केर उत्तराद्ध मे कुसियारक उत्पादन मे कमी आयल, जाहि सँ चीनीक उत्पादन मे सेहो कमी भ’गेल।
बहुतो चीनी मिल बंद भ’गेल आओर ओकर स्थान नीलक कोठी ल’ लेलक। पफेर इंडिया डेवलपमेंट कंपनी 20म सदी केर प्रारंभिक वर्ष मे टू टा चीनी मिल वेफं चालू कयलक आओर गन्ना उत्पादनक लेल लोक सभव कए प्रोत्साहित केलक। 1948-49 मे मिथिला क्षेत्रा मे कुल 15 गोट चीनी मिल छल। एहि मे रैयाम सुगर कंपनी, न्यू इंडिया सुगर मिल्स लिमिटेड, हसनपुर, दरभंगा सुगर कंपनी लोहट आओर सरकारी मोतीपुर सुगर फैक्ट्री, मुजफ्रपरपुर, न्यू स्वदेशी सुगर मिल्स, नरकटियागंज, श्री हनुमान सुगर मिल्स, मोतीहारी आदि प्रमुख छल। क्रमशः एहि चीनी मिल मे 11.55 प्रतिशत, 10.28 प्रतिशत, 21.50 प्रतिशत, 11.12 प्रतिशत, 11.04 प्रतिशत, 10.77 प्रतिशत चीनीक उत्पादन वर्ष 1948-49 मे भेल छल। एहि मिल सभ मे ओहि समय मे लगभग दूइ करोड़क पूंजी केर निवेश भेल छल, आओर लगभग 20 हजार कर्मचारी एहि मिल सुभ मे काज करैत छल। मिथिला केर किसान सभवेफं तखनुका समय मे कुसियारक बिक्री सँ लगभग 3.75 करोड़क राजस्व केर प्राप्ति भेल छल। विद्यापति सिंह केर अनुसार चीनी उद्योगक विकास केर नीक क्षमताक अछैतो सरकारक माध्यम सँ एहि पर बहुत ध्यान नहि देल गेल। जतय चीनी मिल के औसतन साल मे 120 दिन चलाओल जेबाक चाही, गन्ना आपूर्ति केर कमीक कारणे साल मे 63 दिन सँ बेसी नहि चलि पाबि रहल छल। सन् 1950 केर बाद एहि क्षेत्रा मे कुसियारक फसल आओर कतेको चीनी मिल आगू चलिकए बन्द भ’गेल।

औद्योगिक विकास: वर्तमान परिदृश्य 

वर्तमान मे सेहो मिथिलाक अर्थव्यवस्था कृषि पर आधरित अछि, जतय दू तिहाई सँ बेसी लोक केर निर्वहन खेतिये टा पर निर्भर अछि। मुदा देशक अन्य भाग केर तुलना मे एतय केर ग्राम कुटीर आओर लघु उद्योगक स्थिति दयनीय भ’गेल अछि। जतय उत्तर प्रदेश सन निकटतम राज्य केर कतेको जिला मे आइयो कुटीर आओर लघु उद्योग चलि रहल अछि, ओतय सरकारी प्रोत्साहन, वित्तीय सहायता, विपणन आओर प्रशिक्षणक अभाव मे पूरा बिहार सहित मिथिला क्षेत्रा मे स्थित एहि छोट-छोट उद्योग सभक ”ह्रास लगातार होइत जा रहल अछि। बृहत् उद्योगक स्थिति सेहो विलुप्त प्राय भ’गेल अछि, आओर कतेको उद्योग मृतप्राय अवस्था मे पड़ल अछि।
बिहार सरकार केर गन्ना विभागक अनुसारे पूरा बिहार राज्य मे कुल 27 चीनी मिल मे सिपर्फ एकारहे टा मिल मे चीनीक उत्पादन भ’ रहल अछि। मिथिला क्षेत्रक अन्तर्गत सिर्फ नरकटियागंज आओर हसनपुरे मे चीनी मिल चलि रहल अछि, आओर ओहू मे चीनीक उत्पादन अपन क्षमता सँ बहुते कम होइत अछि। पिछला दशक मे एहि चीनी मिल केर बन्द हेबाक कतेको प्रमुख कारण रहल अछि, जाहि मे अन्य राज्य केर तुलना मे उत्पादकता केर स्तर मे बहुत अन्तर, सरकारी भेदभाव, दोसर राज्य मे गन्ना केर वृहद स्तर पर उत्पादन आओर आयातित चीनीक अधिकता के शामिल कएल जा सकैत अछि।
एहि तरहें बरौनी मे स्थित खाद केर कारखाना लगातार सरकारी आश्वासनक बावजूद मृतप्राय अवस्था मे अछि। जेना कि ज्ञात अछि जे सन् 1961 मे भारत सरकार द्वारा बरौनी खाद कारखाना लगाओल गेल छल। सन् 1978 मे एहि कारखाना केर स्वामित्व हिन्दुस्तान फर्टिलाइजर कार्पोरेशन लिमिटेड वेफं द’देल गेल। वर्ष 1999 सँ एहि कारखाना मे खाद आओर रसायनक उत्पादन बंद पड़ल अछि। एहेन उम्मीद कएल जा रहल अछि जे एहि वर्षक अंत तक पफेर सँ एहि कारखाना मे खाद आओर रसायनक उत्पादन शुरू भ’सकैत अछि। कटिहार आओर पूर्णिया आदि जिला मे स्थित जूटक मिल बहुत पहिनहि बंद भ’ चुकल अछि आओर एकर व्यापार कठिन संकट केर दौर सँ गुजरि रहल अछि। दोसर कतेको राज्य मे सेहो जूटक कतेको मिल हालक वर्ष मे बंद भेल अछि, आओर कर नीति सँ एहि पर खराब प्रभाव पड़ल अछि। पूर्णिया जिला मे स्थित गुलाब बाग मंडी जूटक व्यापार केर पैघ केन्द्र होइत छल, लेकिन आइ ई बाजार जूटक व्यापार मे सुन्न पडि़ गेल अछि। ओना हाल मे भारत सरकार केर वस्त्र मंत्रालय जूट पैकेजिंग मैटेरियल एक्ट 1987 केर तहत पफेर सँ एहि बात पर जोर देलक अछि, जे 90 प्रतिशत खाद्य सामग्री आओर 20 प्रतिशत चीनी वेफं जूट सँ बनल झोरा मे संकलित कएल जायत।
कुल मिला कए एक दिस जतय श्रम शक्ति केर संख्या मे लगातार वृद्धि होइत जा रहल अछि, रोजगार उत्पादन करय बला ई श्रम केन्द्रित उद्योग अपन नीक भाग्यक बाट देखि रहल अछि। पैघ संख्या मे लोको सभ कए दोसर प्रदेश मे रोजगारक लेल पलायन करय पड़ैत अछि। मिथिला केर जे क्षेत्रा एक समय मे ग्रामोद्योग सँ ल’ कए बृहत् उद्योग मे बहुत स्वाबलंबी होइत छल आइ ओही क्षेत्रा सँ श्रम शक्ति केर सबसँ बेसी पलायन भ’ रहल अछि। जतय तक मिथिला मे वर्तमान आओर उद्योगक संख्या केर प्रश्न अछि, एकर विस्तृत जानकारी राज्य आओर केन्द्र सरकारक द्वारा उपलब्ध् कराओल गेल विभिन्न स्रोत सँ लगाओल जा सकैत अछि।
बिहार सांख्यिकी पुस्तिका, 2016 मे औद्योगिक अधिनियम, 1948 केर अन्तर्गत पंजीकृत कारखाना केर आँकड़ा प्रकाशित कएल गेल अछि। एकर अनुसारें वर्ष 2015-16 मे बिजली केर प्रयोग करय बला 10 या बेसी कामगार बला एहेन उद्योगक श्रेणी मे पूरा बिहार मे 37 लोक उद्योग अछि आओर 2 उद्योग भागलपुर जिला मे स्थित अछि। मिथिला क्षेत्रा केर एहि जिला मे स्थित एहि उद्योग मे कुल कामगारक संख्या 9302 अछि। एहि श्रेणी केर निजी उद्योगक संख्या पूरा मिथिला मे 696 अछि, आओर एहि मे काज कनिहार लोक केर संख्या 34483 अछि। एहन उद्योग मुख्यरूप सँ मुजफ्रफरपुर, बेगूसराय, कटिहार, भागलपुर, पूर्णिया आओर समस्तीपुर जिला मे स्थित अछि। विद्युत के बिना संचालित 20 या ओहि सँ बेसी श्रमिक बला उद्योगक श्रेणी मे मिथिला क्षेत्र मे 347 उद्योग आबैत अछि आओर एहि मे काज करय बला कारीगरक कुल संख्या 29904 अछि। औद्योगिक अधिनियम, 1948 केर भाग 85 मे एहेन उद्योग सभ कए पंजीकृत कएल जाइत अछि, जाहि मे बिजली केर बिना 10 सँ बेसी लोक काज करैत हुअए या जाहि मे बिजली केर संग कम लोक काज करैत हुआए। एहि श्रेणी मे मिथिला क्षेत्रा मे 2541 उद्योग बेगूसराय, भागलपुर, मुजफ्रफरपुर, समस्तीपुर जिला मे स्थित अछि।

चुनौती आओर संभावना :

मिथिला मे लघु उद्योगक
संभावना केर प्रमुख क्षेत्र

  • खाद्य प्रसंस्करण
  • बटन उद्योग
  • लहठी-चूड़ी उद्योग
  • स्वर्णाभूषण निर्माण
  • हस्तकला आधरित उद्योग
  • काष्ठशिल्प उद्योग
  • हथकरघा उद्योग
  • खाद्य तेल प्रसंस्करण

बिहार आर्थिक सर्वेक्षणक अनुसार 2017-18 केर अनुसार मिथिला क्षेत्रक सभ 18 जिला बाढि़ प्रभावित क्षेत्रा मे आबैत अछि। वर्ष 2007 सँ 2017 केर बीच सिर्फ 2010 आओर 2015 वेफं छोडि़ कए पिछला 8 वर्ष मे बाढि़ सँ भीषण क्षति भेल अछि। वर्ष 2017 केर बाढि़क आँकड़ाक अनुसार गत वर्ष मे मिथिला मे 1.6 करोड़ लोक प्रभावित भेल, 6.6 लाख हेक्टेयर मे लागल पफसल केर क्षति भेल आओर 437 लोकक जान चलि गेल।
एहेन स्थिति मे मिथिला मे उद्योगक विकास केर लेल बहुआयामी प्रयासक जरूरत अछि। पारिस्थितिकी तंत्राक समझ केर संग सम्यक कदम सँ एहि क्षेत्राक विकास पर समुचित बल देबाक आवश्यकता अछि। पिछला एक-दू दशक मे भौतिक संरचना आवागमनक सुविध, बिजलीक उपलब्ध्ता, बैंकिंग सुविध केर प्रसार पर सरकार ते कदम उठौने अछि, एकरा सक्षम रूप सँ कार्यरत राखबाक जरूरत अछि। शिक्षा व्यवस्था आओर स्वास्थ्यक क्षेत्रा मे सेहो सरकारी उपाय कएल जा रहल अछि, लेकिन एकरा आउरो त्वरित आओर परिणामजनक बनाओल जेबाक आवश्यकता अछि।
मिथिला सघन जनसंख्या घनत्व बला क्षेत्रा अछि। अतः एहि क्षेत्रा मे एहेन उद्योग वेफं प्रोत्साहन देबाक जरूरत अछि, जाहि मे अधिकाधिक लोक वेफं सक्षम रोजगार भेटि सकय मिथिला क्षेत्रा मे कृषि उत्पाद केर प्रसंस्करण बड्ड कम भ’ पाबैत अछि। जखन कि अनाज आओर फल केर प्रसंस्करण सँ बड्ड नीक मूल्य संवधर््नक संभावना अछि। एतय भारत केर कुल उत्पादनक 80 प्रतिशत मखाना केर उत्पादन कएल जाइत अछि। मखाना प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट आओर आवश्यक लवण केर नीक स्रोत रहल अछि, आओर एकरा सँ कम समय मे विभिन्न प्रकार खाद्य सामग्री तैयार कएल जा सकैत अछि। संगहि ई एक श्रम-सघन पफसल अछि आओर एहि सँ जुड़ल किसानक आमदनी केर यैह प्रमुख स्रोत अछि मुदा एकर प्रसंस्करणक सुविध नहिं केर बराबर अछि। संगहि मखाना केर उत्पादन मे अधिकांशतः जैविक विध् िकेर प्रयोग होइत छैक। नीक कृषि शोध् केर माध्यम सँ एकर उत्पादन वेफं पूरा तरहें जैविक बनाओल जा सकैत अछि आओर अंतरराष्ट्रीय बाजार मे एकर नीक मूल्य भेटि सकैत अछि।
एहि तरहें मिथिला क्षेत्राक पैघ भू-भाग मे उत्कृष्ट गुणवत्ता बला आम, लीची, अमरूद, केला आदि मौसमी आओर गुणवत्ता बला फलक खेती पैघ मात्रा मे होइत अछि, आओर आगाँ सेहो एकर प्रचुर संभावना अछि। बिहार आर्थिक समीक्षा 2016-17 केर अनुसारे पूरा बिहार राज्य मे उत्पादन हेामय बला आम केर 30-40 प्रतिशत हिस्सा मिथिला केर पूर्वी चम्पारण, मुजफ्रफरपुर, दरभंगा, भागलपुर आदि जिला में होइत छैक। एहि प्रकारें कुल लीची केर उत्पादन मे 45 प्रतिशत मिथिला केर क्षेत्रा मे होइत छैक। केला केर सेहो 30 प्रतिशत सँ बेसी उत्पादन मिथिला केर भागलपुर, दरभंगा, मुजफ्रफरपुर आदि जिला मे होइत अछि। मुजफ्रफरपुर मे होइ बला शाही लीची आओर भागलपुर केर जर्दालु आमक विश्व बाजार मे प्रसिद्ध छैक। एकर नीक भंडारण आओर उन्नत प्रणाली केर विकासक जरूरत अछि, जाहि सँ एकरा बेसी समय तक राखल जा सकय। एहि सँ बाजार मे एकर समुचित विपणन केर स्थिति बनत। संगहि पफलक प्रसंस्करण सँ एकरा सँ बनाओल जाय बला उत्पाद केर विनिर्माण वेफं बढ़ावा देबाक जरूरत अछि जे एकर मूल्य संवर्धन मे सहायक होयत।
केरा केर थम्ह तना सँ नीक गुणवत्ता केर रेशा प्राप्त कएल जाइत अछि, जकरा बड्ड कम लागत मे आओर कम समय मे प्रसंस्कृत क’ कए वस्त्र आओर वस्तु कए बनेबा मे प्रयोग कएल जा सकैत अछि। वर्तमान मे केराक थम्ह केर एहि प्रकारक प्रयोग सीमित अछि आओर एहि रेशा केर जयपुर, आ अन्य शहर मे भेजि देल जाइत अछि। उपयुक्त तकनीकी प्रशिक्षण आओर अन्य संबंध्ति सुविध केर उपलब्ध्ता सँ पूर्णिया, भागलपुर, खगडि़या, मुजफ्रफरपुर आदि जिला मे केरा आओर एकर तना सँ तैयार होम’बला वस्तुक कतेको लघु आओर मध्यम आकार के उद्यम एतय स्थापित कएल जा सकैत अछि। एहि तरहें भागलपुर आओर चम्पारण क्षेत्र मे नीक गुणवत्ता बला अलग-अलग किस्म केर सुगंध्ति धनक पैदावार होइत अछि। उचित विपणन सँ एहि सँ बनल चाउर, चूड़ा व अन्य खाद्य पदार्थ सँ नीक आमदनी होम’केर संभावना अछि। भागलपुर केर रेशम उद्योग कए फेर सँ सही प्रोत्साहन देबाक आवश्यकता अछि। एहि सँ बनल वस्त्र आओर कलाकृति केर प्रभावी विपणन नहि भ’ पाओल अछि। जखन कि देश-विदेश केर बाजार मे एकरा सँ बनल कपड़ा केर नीक मांग भ’सकैत अछि।
पूर्वी चम्पारण केर मेहसी मे नदी केर सीप सँ बनल बटन केर सैकड़ो सूक्ष्म उद्योग अछि। एहि उद्योग मे मशीनीकरण केर स्तर बहु निम्न अछि आओर पूरा प्रक्रिया स्थानीय कारीगरक माध्यम सँ ही विकसित कएल जाइत अछि। स्थानीय लोक केर बहुत पैघ भाग एहि काज मे दक्षता पूर्वक लागल छैक। एहि प्रकारक बटन उत्पादन केर एहि देश मे महत्वपूर्ण क्षेत्र छैक। पैघ शहर मे व्यापारी एकर नीक पैकेजिंग क’ कए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कतेको गुणा लाभ कमाबैत अछि। सरकारी प्रयास सँ एहि क्षेत्र मे समुचित हस्तक्षेप केर आवश्यकता अछि। दरभंगा केर लहेरिया सराय, मुजफ्रफरपुर केर रामपुर बखरी, इस्लामपुर क्षेत्रा मे हजारो परिवार लहठी आओर चूड़ी केर गृह उद्योग मे लागल अछि। सही पैकेजिंग तकनीकी प्रशिक्षण आओर नीक विपणन सँ एहि कलात्मक उत्पाद सँ सेहो लोकक आर्थिक स्थिति मे सुधर आबि सकैत छैक। मुजफ्रफरपुर, चम्पारण आदि जिला मे बहुत उत्कृष्ट गुणवत्ता बला चमड़ा केर उपलब्ध्ता छैक आओर बहुतो कारीगर पारंपरिक तौर पर जूता-चप्पल बनेबाक काज करैत अछि। लेकिन एकर स्थिति सेहो दयनीय अछि। समस्तीपुर केर रोसड़ा मे सोना-चांदीक आभूषण केर हजारो दक्ष कारीगर पारंपरिक उद्योग मे कार्यरत अछि मुदा आभूषण उद्योग मे नवाचार आ तकनीकी विकास सँ ई हर तरहें अनभिज्ञ अछि।
एहि तरहें मिथिला केर कतेको जिला मे लकड़ी, बांस, स्टील पफर्नीचर सँ संबंधित उद्योगक विकास केर भरपूर संभावना अछि। मिथिला क्षेत्रा मे हस्तकला केर विध जेना मिथिला पेंटिंग, मजूषा पेंटिंग आदि केर अपार संभावना अछि। एहि कला केर प्रयोग कतेको सदी सँ स्थानीय स्तर पर होइत रहल अछि, जकरा बारे मे दोसर प्रदेश मे जानकारी पिछला एक सदी सँ कम समय मे भेल अछि आओर एहि कला केर प्रसिद्ध विश्व पटल पर भेल अछि। परन्तु, एकर संवधर््नक दिशा मे बहुत किछु करबाक आवश्यकता अछि।
उपर्युक्त औद्योगिक संभावना सँ अपेक्षित आर्थिक प्रगति प्राप्त करबाक लेल पारिस्थितिकी तंत्रा के कमजोर आओर छूटल आयाम कए सुदृढ़ करबाक आवश्यकताक अछि। औद्योगिक विकास केर संभावना बला उपर्युक्त सभ क्षेत्रा एहेन अछि जकरा सक्षम बना कए मिथिला केर अन्य क्षेत्र मे सेहो विस्तृत कएल जा सकैत अछि। एहि क्रिया-कलाप मे लागल लोक मे पारंपरिक ज्ञान प्रचुरता सँ भरल अछि, लेकिन आधुनिक बाजारक लेल आवश्यक तकनीकी समझ, प्रस्तुति, विपणनक पक्ष केर एतय घोर अभाव अछि।
शैक्षणिक उन्नयनक अभाव सँ सरकारी योजना केर लाभ ई नहि ल’पाबैत अछि। पूंजी केर अभाव मे एहि उद्योगक स्वरूप किछु छोट रहि जाइत अछि। बिहार राज्य बैंकर्स समिति केर माध्यम सँ जारी कएल आंकड़ाक अनुसार वित्तीय वर्ष 2017-18 केर अंत मे ऋण उपलब्ध्ता वेफर अनुपात पूर्णिया मे सर्वाधिक 65.2 प्रतिशत केर रहल अछि, जखन कि अन्य पांच जिला मे ई अनुपात 50 प्रतिशत से 60 प्रतिशत केर छल। जरूरत अछि जे एहि क्षेत्रा केर उद्यमी सभ आओर स्थापित उद्योग वेफं बैंकक माध्यम सँ पर्याप्त वित्तीय ऋण उपलब्ध् भ’सकय। संवैधनिक व्यवस्था केर आधार पर उद्योग राज्यक विषय होइत अछि आओर राज्य सरकार अनुकूल नीति केर क्रियान्वयन सँ औद्योगिक विकास कए बढ़ावा दैत अछि। मिथिला क्षेत्र मे औद्योगिक विकासक लेल एहि सूक्ष्म उद्योग वेफं सहकारी व्यवस्था केर अन्तर्गत आनिकए एकरा लेल समुचित प्रशिक्षण, तकनीकी विकास, ऋण उपलब्ध्ता, पैकेजिंग आओर विपणन सहयोग देबाक जरूरत अछि।
मिथिला क्षेत्राक कतेको उत्पाद जेना मिथिला पेंटिंग, शाही लीची, जर्दालु आम, मगही पान, मखाना, भागलपुर सिल्क, सुगंध्ति धनक किस्म, लहठी, सीप बटन आदि विशिष्ट अछि, आओर व्यापार संबंध्ति बौद्धिक संपदा अध्किारक प्रयोग सँ एहि क्षेत्र मे आर्थिक विकास केर कारक बनि सकैत अछि। जेना कि हम जानैत छी कि भौगोलिक संकेतन कोनो विशिष्ट उत्पादक कोनो क्षेत्रा विशेष सँ उत्पत्ति के कारण ओहि भौगोलिक क्षेत्र मे एकरा सँ जुड़ल लोक वेफर आर्थिक हितक रक्षा करैत अछि। उदाहरणक रूपमे मिथिला पेंटिंग केर प्रोत्‍साहन दरभंगा प्रमंडल मे भेटल अछि। एतय बसल लोक सभ कतेको सदी सँ पारंपरिक तौर पर एहि कलावेफं संपोषित कयने अछि। एहि वजह सँ ई समीचीन अछि जे एहि क्षेत्राक लोकक लेल ई सुनिश्चित कएल जाय जे एकर आर्थिक हितक रक्षा होइ। मिथिला पेंटिंग वेफं भौगोलिक संकेतन पहचान भेटै सँ वास्तविक मिथिला पेंटिंग केर रूप मे विपणन करबाक अधिकार सिर्फ एहि क्षेत्रक पंजीकृत कलाकार केर ही भेटि सकैत अछि। किछु उत्पादक भौगोलिक संकेतन पंजीकरण हाल के वर्ष मे भेल अछि। अन्य विशिष्ट उत्पादक लेल सेहो एहि तरहक प्रयासक जरूरत अछि। संगहि मिथिला उत्पादक ब्रांड केर प्रोत्साहित करबाक आवश्यकता सेहो अछि, जकर अन्तर्गत एहि विशिष्ट उत्पादक सही पैकेजिंग आओर विश्वस्तरीय गुणवत्ता केर अन्य मानक केर समाहित करब एकर नीक विपणन ई-कामर्स समेत अन्य माध्यम सँ कयल जाय।
भारत सरकारक सूक्ष्म, लघु आओर मध्यम उद्यम मंत्रालय, वस्त्र मंत्रालय आओर अन्य सभ एजेंसी कतेको प्रोत्साहन योजना केर क्रियान्वयन करैत अछि, जे उत्पाद वेफं विश्वस्तरीय बनेबा मे सहायक अछि। किन्तु अत्यन्त सूक्ष्म हेबाक कारणें एकर लाभ मिथिला क्षेत्रा केर उद्यमी सभ केर नहि भेटि पाबैत अछि। एना मे आवश्यक अछि जे एहेन अनेक इकाई केर संयोजन सुनिश्चित क’ केर संयुक्त रूप सँ एहि प्रोत्साहन योजना सभ केर उठाओल जाय। एकर अलावा एहि क्षेत्रा मे पैघ उद्योग केर प्रोत्साहन केर कार्य सेहो हेबाक चाही कियैकि पैघ उद्योगक विकास सँ छोट उद्योग केर सेहो विकास होइत अछि आओर रोजगारक बढ़ैत अछि।
अंत मे एकटा महत्वपूर्ण कानून व्यवस्था केर सही रूप सँ बनल रहब सेहो औद्योगिक विकासक लेल आधारभूत आवश्यकता अछि। अपराध्, भय, अराजकता के माहौल पर स्थायी अंकुश लगेबाक जरूरत अछि। तखनहि औद्योगिक विकासक लेल जरूरी स्वतंत्रा, मौलिक आओर प्रखर चिंतन आओर क्रियान्वयन केर मार्ग क्षेत्रा प्रगति वेफं गति प्रदान करय बला होयत।


  1. झा, मिथिलेश ;2013: भाषाई राजनीति आ बोली वेफर विकास- मैथिलीक विशेष अध्ययन ;पीएचडी शोध प्रबंधद्ध, राजनीति विज्ञान विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय
  2. पाठक, देवनाथ ;2010 : मैथिली लोक कथाक वैश्विक परिदृश्यः
    एक व्याख्यात्मक अध्ययन ;पीएचडी शोध प्रबंधद्ध, सामजिक तंत्र
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  3. रोराब्कर, जे अल्बर्ट ;2017: बिहार एंड मिथिला: द हिस्टोरिकल
    रूट्स ऑप़फ बैकवर्डनेस, रोउलेज, न्यूयार्क
  4. अकीक, मोहम्मद ;1974: इकनॉमिक हिस्ट्री ऑपफ मिथिला: सीण्
    600-1907 एडी, अभिनव पब्लिवेफशन, नई दिल्ली
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    एंड व्हाट वेंट चेंज? वर्किंग पेपर न. 107, एनआईपीएपफपी, नयी दिल्ली
  7. विश्व बैंक : बिहार टूवार्ड्स डेवलपमेंट स्ट्रेटजी
  8.  आथिर्क सर्वेक्षण ;2017: खंड 1 आ 2, वित्त विभाग, बिहार सरकार
  9.  पंचम राज्य वित्त आयोग ;2016: अंतिम रिपोर्ट, 2015-20,
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  10. जिलावार संक्षिप्त औद्योगिक प्रोपफाइल ;2016: लघु, वुफटीर एवं
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  11. जिलावार जनगणना पुस्तिका ;2011द्धः भारतक जनगणना 2011,
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  12. सिंह, विद्यापति ;1955: मिथिलाक उद्योग आ व्यापार, सुधाकर
    प्रेस, लक्ष्मीसागर, दरभंगा
  13. बुकानन, फ्रांसिस-हैमिल्टन ;1928 : एन अकाउंट ऑपफ द डिस्ट्रिक्ट
    ऑपफ पूर्णिया इन 1809, पटना
  14. जूट पैकेजिंग मैटेरियल एक्ट, 1987

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