बाढि़ स परेशान मिथिला मे सेहो पहुंचत ‘डे जीरो ‘ पर जलस्तर

पूर्व चेतावनी उपग्रह प्रणाली बनेनिहार डेवलपर्स क कहब अछि जे भारत मे जल संकट ‘डे जीरो’ तक पहुंच जायत। यानी नाला तक सूखा जायत।  अंग्रेजी अखबार ‘गार्जियन’ क रिपोर्ट अनुसार उपग्रह स प्राप्त संकेत क आधार पर पूर्वानुमान बतेनिहार क कहब अछि जे जलाशय सिकुड़बा स जल स्तर तेजी स नीचा जा रहल अछि आ ओकरा रोकबा लेल कोनो तरहक प्रयास नहि भ रहल अछि। 
समदिया
लंदन । समुद्र जखन लंका जेबा लेल रास्ता नहि द रहल छल त राम बाण स समुद्र सुखेबाक फैसला केलथि। समुद्र प्रकट भ राम स आग्रह केलथि जे हुनका सुखेबाक प्रण छोडि दथि ओ सेतु निर्माण लेल बाट सुझेलथि। राम लग समस्या ढार भेल जे आब बाण कए वापस कोना लेब। समुद्र फेर हाथ जोडि कहला जे हे प्रभु पश्चिम कात सदूर इलाका मे लोक सब जल संग दुव्र्यवहार क रहल अछि एहि बाण कए ओहि ठाम पढाउल जाये। दुनियाक सबस पैघ रेगिस्तान क चर्च रामायण मे किछु एहिना वर्णित अछि । कहबाक मतलब इ जे जलक सम्मान जाहि ठाम नहि होएत । जलक चिंता जाहि समाज मे नहि होएत ओहि समाज मे जलसंकट निश्चित अछि ।
अयोध्या प्रसाद बहार अपन पुस्तक रियाज ए तिरहुत मे लिखने छथि जे तिरहुतक इलाका अकाल ग्रस्त रहल अछि। एहनो समय आयल जखन भूख मिटेबा लेल लोक अपन संतान तक कए पका खा लेने छल । हालांकि ओहन पापी कए मौतक सजा देल गेल, मुदा स्थितिक आकलन एहि एक घटना मात्र स कैल जा सकैत अछि । 19वीं शताब्दीक बाद तिरहुत मे अकाल नहि आयल । एहि लेल पिछला चारि सौ सालक प्रयास उल्लेखनीय रहल । 1873 क बाद भीषण अकालक कोनो इतिहास नहि अछि । नदी स धार निकाली बसावट तक अनवाक प्रयास जे पिछला चारि सौ साल मे भेल तेकर परिणाम 19वीं शताब्दीक अंत मे आबि कए भेटल । नरेंद्र सिंह क पग पग पोखरि माछ मखनक नीति स जे डेग डेग पर पोखरि खुनल गेल ताहि स भूमिगत जल क स्तर नहि केवल ऊपर उठल बल्कि स्थिर सेहो रहल । कोसी आ कमलाक बीच त भूमिगत जल महज चारि फुट नीचा तक आबि गेल। 20वीं शताब्दी मे जल संकट मिथिला लेल अधिकता ल लेलक । बाढि मे सब उलझि गेल । जल संचय लेल लापरवाह भ गेल । नदी बथम आ धार सूखा गेल। पोखरि त गायब होइत गेल । भूमिगत जल स्तर महज 75 साल मे 45 फुट स बेची नीचा जा चुकल अछि । स्थिति स सब बेफ्रिक छी मुदा जलस्तर पर काज करनिहार लोग चित्कार क रहल छथि । इ स्थिति मिथिला टा मे नहि बल्कि पूरा भारत मे देखा रहल अछि । जल संकट पर वैज्ञानिक गंभीर चेतावनी जारी केलथि अछि ।
उपग्रह प्रणाली क अध्ययन पर आधारित एकटा रिपोर्ट मे कहल गेल अछि जे मिथिला समेत पूरा भारत बहुत जल्द भारी जलसंकट स घेरा रहल अछि ।  रिपोर्ट क अनुसार सिकुड़ैते जलाशय क कारण जल संकट गहिर भ रहल अछि । दुनिया क 500,000 बांध लेल पूर्व चेतावनी उपग्रह प्रणाली बनेनिहार डेवलपर्स क कहब अछि जे भारत मे जल संकट ‘डे जीरो’ तक पहुंच जायत । यानी नाला तक सूखा जायत।
अंग्रेजी अखबार ‘गार्जियन’ क रिपोर्ट अनुसार उपग्रह स प्राप्त संकेत क आधार पर पूर्वानुमान बतेनिहार क कहब अछि जे जलाशय सिकुड़बा स जल स्तर तेजी स नीचा जा रहल अछि आ ओकरा रोकबा लेल कोनो तरहक प्रयास नहि भ रहल अछि । वर्ल्‍ड रिसोर्सेस इंस्टीट्यूट (डब्ल्यूआरआई) क अनुसार बढ़ैत मांग, कुप्रबंधन आ जलवायु परिवर्तन क कारण मिथिला समेत कैक इलाका मे पैघ अकाल क आशंका उत्पन्न भ चुकल अछि । एहि रिपोर्ट मे साफ साफ लिखल गेल अछि जे पिछला साल कम बर्षा क वजह स मध्य प्रदेश क बांध इंदिरा सागर क ऊपरी हिस्सा मे जल अपन सबस नीचा पहुंच गेल । एकर भरपाई लेल सरदार सरोवर जलाशय स जल लेल गेल।
जल संकट क एकमात्र कारण इ नहि अछि जे वर्षा कम भेल इजराइल सन देश मे जतय वर्षा क औसत 25 सेमी स कम अछि ओतहु जीवन चलि रहल अछि । ओहि ठाम जल क एक बूंद व्यर्थ नहि कैल जाइत अछि। भारत मे मात्र 15 प्रतिशत जल क उपयोग भ रहल अछि, शेष जल बहा देल जा रहल अछि। जल संचय लेल कियो गंभीर नहि अछि। जाहि जलक आइ प्यास नहि अछि काल्हि प्यास लेल इ जल कोना भेटत तेकर चिंता ककरो नहि अछि।

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