अहिंसा आ सूचिता स समाज मे आउत बराबरी : बिंदेश्वर पाठक

 

Sulabhदरभंगा । पद्मभूषण डॉ बिंदेश्‍वर पाठक कहला जे महाराजा डॉ कामेश्‍वर सिंह एकटा प्रबुद्ध शासक क संगहि संस्‍कृति, कला, शिल्‍प, संगीत आ शिक्षा क संरक्षणक अपन कुलवंशक परंपरा क अनुपालक सेहो छलाह। अपन लोकतांत्रिक व्‍यवस्‍था में बहुत खूबी अछि, मुदा योग्‍यता क जे परख राजतंत्र मे छल ओ लोकतंत्र मे नहि देखबा लेल भेटैत अछि। आजुक काल मे अयोग्‍य व्‍यक्ति कए सेहो सम्‍मान आ संरक्षण भेट जाइत अछि आ योग्‍य व्‍यक्ति सब पर चयनकर्ताक नजरि नहि जाइत अछि । महाराजा कामेश्‍वर सिंह क 107म जयंती पर ‘महात्‍मा गांधी के अनुसार वर्ण, डॉ अंबेदकर का मत तथा जाति के प्रश्‍न के समाधान के लिए सुलभ का रास्‍ता’ विषय पर व्‍याख्‍यान दैत श्री पाठक कहला जे जातिवाद व अस्‍पृश्‍यता क विषय पर गांधी आ अंबेदकर क बीच मतभेद छल। दूनू क बीच भेल संवाद स प्रतीत होइत अछि जे गांधी सब जाति कए एक स्‍तर पर अनबाक प्रयास करैत छलाह, जखन कि अंबेदकर जाति व्‍यवस्‍थाक खिलाफ छलाह। सुलभ एहि दूनू मत क बीच समाधानक रास्‍ता बनल। सुलभ आंदोलनक चर्च करैत श्री पाठक कहला जे हम बिना ककरो जाति क बदलने समाज मे छूआ-छूत मिटा देबाक प्रयास केलहुं अछि। दरभंगा जिला क सकरी बलिया गाम क मूल निवासी श्री पाठक कहला जे जखन धरि सब घर मे शौचालय नहि बनत ता धरि हम देश कए विकसित नहि कहि सकैत छी। ओ कहला जे आइ दिल्‍ली मे बैस कए लंदन मे पढि कए आयल गाम लेल योजना बना रहल अछि। पंडित कए हल-बैल देला स ओकर विकास नहि होएत, ओकरा विकास लेल की चाही इ ओकरा स पूछबाक जरुरत अछि । हल-बैल स जेकर विकास होएत ओ ओकरे देल जाए। इ तखन संभव अछि जखन योजना पंचायत स्‍तर पर बनत।

श्री पाठक कहला जे अहिंसा आ सूचिता स समाज मे बराबरी आबि सकैत अछि। ओ दक्षिण भारत क एकटा मंदिर क चर्च करैत कहला जे ओहि मंदिर मे दलित क प्रवेश नहि छल, मुदा जखन सुलभकर्मी मंदिर मे पूजा लेल पहुंचल त पूजारी कोनो विरोध नहि केलक। पूछबा पर पूजारी सब कहलथि जे अहां सब मंदिर क नियम क अनुसार काज केलहुं अछि। मंदिर एबा स पूर्व स्‍नान क, दू वस्‍त्र धारण क शास्‍त्र क अनुसार मंत्रोचार क पूजा केलहुं अछि। विरोध त हुनकर होइत अछि जे मंदिरक नियमक विपरित आचरण करबा लेल आक्रामक होइत छथि। बिना नहेने, जूता पहिरने मंदिर मे एबा लेल मारि करैत छथि। श्री पाठक कहला जे हुनकर समानता आ जाति क प्रति सोच क पाछु कतहु ने कतहु मिथिला मूल क छाप अछि। ओ कहला जे पोखरिक जल पर दलित क अधिकार लेल जखन महाराष्‍ट्र मे दलित लडाई लडि रहल छल, ताहि स बहुत पहिने मिथिला मे इ अधिकार दलित कए भेट चुकल छल। ओ कहला दलित उत्‍थान आ सूचिता क प्रति मिथिला क महत्‍वपूर्ण योगदान अछि। श्री पाठक कहला जे सूचिता क लडाई अपन शरीर आ अपन घर स शुरू करबाक चाही। अगर अहांक शरीर आ अहांक घर गंदा अछि त शहरक सफाई क कोनो अर्थ नहि। मिथिलाक इतिहास पर शोध क आवश्‍यकता आ प्रकाशनक अभाव पर चिंता व्‍यक्‍त करैत श्री पाठक कहला जे महाराजाधि‍राज कामेश्‍वर सिंह कल्‍याणी फाउंडेशन एहि दिशा मे नीक काज क रहल अछि। सुलभ एहि काज मे अपन छोट सन भागीदारी निभेबाक इच्‍छा रखैत अछि ताहि लेल फांउडेशनक प्रबंध न्‍यासी डॉ हेतुकर झा कए एक लाख प्रति माह पांच वर्ष क लेल सुलभ हेरिटेज फेलोशिप देबाक निर्णय लेलक अछि, संगहि फाउंडेशन कए पुस्‍तक प्रकाशन लेल 10 लाख टका दान कैल जा रहा अछि। ओ युवा कए खास तौर पर शोधपरक पुस्‍तक लिखबा लेल आग्रह केलथि आ ओकर प्रकाशन क आश्‍वासन देलथि। एहि अवसर पर कामेश्‍वर सिंह हेरिटेज सीरीज क 19म पुस्‍तक भैरवलाल दास क हाथ स संपादित ‘गांधी के चंपारण आंदोलन के सूत्रधार : राजकुमार शुक्‍ल की डायरी’ क लोकार्पण सेहो भेल। समारोह मे स्‍वागत भाषण फांउडेशनक प्रबंध न्‍यासी डॉ हेतुकर झा देलथि, जखन कि धन्‍यवाद ज्ञापन प्रसिद्ध वैज्ञानिक आ फांउडेशनक न्‍यासी डॉ मानसबिहारी वर्मा देलथि। महारानी कामसुंदरी साहिबा एहि अवसर पर आयल सब अतिथि कए आशिर्वाद देलथि।

 

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