भारंगम मे आबि मानि जाउ, बनल नव इतिहास

aab mani jaau

विशेष समदिया

नई दिल्‍ली । देशक राजधानी नव दिल्लीक मंडी हाउस स्थित एलटीजी स्टेडियम सांझ हेबासं पहिने खचाखच मैथिली समाज सं भरि गेल छल । लोक ओहि ऐतिहासिक क्षण क साक्षी बनबा लेल आतुर छला जे किछुए क्षणक बाद रचल जा रहल छल । अवसर छल भारंगम क अंतर्गत स्व अनिल चंद्र ठाकुर रचित मैथिली नाटक आबि मानि जाउ केर मंचनक । सफल मंचन करबाक संगहि नाट्य संस्था मैलोरंग मैथिली नाट्य जगत मे इतिहास रचि देलक । एकटा सफलताक परचम लहरा गेल । एहि आयोजनक संगे मैथिली भारतीय रंग महोत्‍सव मे पहिल बेर अपन हिस्‍सेदारी देखेलक ।

निर्देशक प्रकाश झाक निर्देशन में मंचित एहि नाटक कए देखबा लेल मैथिल नाट्य प्रेमी लोकनिक अपार जनसमर्थन देखल गेल । परिणाम स्वरूप एहि नाटकक पहिल शो क टिकट किछुए काल में हाउसफुल भ गेल । दर्शकक मांगपर आयोजक दिस स दोसर शो क व्यवस्था सेहो कैल गेल। कहल जा रहल अछि इहो शो हाउसफुल भ गेल छल ।

aabi mani jaau

नाटकक संदर्भ मे पटनासं नाटक देखबा लेल पहुंचल मैथिलीक युवा साहित्यकार गुंजनश्री नाटकक देखबाक बाद कहलनि जे नाटक शानदार रहल । नाट्य संगीत नीक रहलैक । नाटकक बीच मे जे आलाप लेल गेल रहैक संभवतः 2 बेर, से कनेक कमजोर सन लागल । राग ललित वा कोनो आओर कारुणिक रागक चयन रहितैक त आर बेसी नीक हेतिए । अभिनय सबहक बढ़ियाँ रहलनि । लाइट आ स्टेज क्राफ्ट विशेष क पीपड़ गाछक जड़ि मे लाल कपड़ा पर अलग-अलग लाइट क इफ़ेक्ट बेस प्रभावी । पात्र सब बिनु कोनो धरफरीक स्टेज क क्राफ्ट कए मैनेज केलनि से उत्तम नाट्य-शिष्टाचारक परिचायक छल । बुच्ची दाइ, कुलदेव, गिरिधर आ नोकर आ बुच्ची दाइ के पिता के भूमिका वला अभिनेता बेसी प्रभावित केलक ।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

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