जगन्नाथ मिश्र आ संन्यास क नौटंकी

बिहार क तीन बेर मुख्यमंत्री रहि चुकल डॉ जगन्नाथ मिश्र अपन गाम मे बाढि़ देख सक्रिय राजनीति स संन्यास ल लेने छलाह। मुदा महज एक साल बाद ओ एक बेर फेर सत्ता प्रतिष्ठान मे वापसी केलथि अछि। ओ ललित नारायण मिश्र इंस्टीट्यूट ऑफ इकोनोमिक डेवलपमेंट एंड सोशल चेंज नाम क सरकारी संस्था क कार्यकारी अध्यक्ष बनलाह अछि जेकर स्थापना ओ अपन मुख्यमंत्री रहैत केने छलाह। इ पद बिहार सरकार क कैबिनेट मंत्री क बराबर अछि आ ओकर समान सुविधा क भागी अछि।
जाहि मुद्दा पर ओ नीतीश सरकारक विरोध केलथि आ राजनीति स संन्यासक घोषणा केलथि ओ हुनक जीवन मे कहियो मुद्दे नहि रहल, किया कि हुनकर कार्यकाल मे पटना मे एतिहासिक बाढि़ आएल छल आ हुनकर विधानसभा क्षेत्र झंझारपुर पिछला तीन दशक स बाढि़ मे दहाइत रहल अछि। एकर बावजूद जगन्नाथ मिश्र कए कोनो कष्टï नहि भेल। अपन लोकप्रियता कम भेला पर इ क्षेत्र अपन पुत्र नीतिश लेल छोडि़ देलथि। आ नीतिश अपन पिताक विपरित एहि क्षेत्र लेल किछु काज सेहो केलथि, हुनका नीतीश सरकार मे मंत्री पद सेहो भेटल, मुदा पिताक सरकारक ओहि विभाग क विरोध जेकर ओ मंत्री छलाह, हुनका लेल महग पड़ल आ मंत्री पद स इस्तीफा दिए पड़ल। एहि प्रकार स पिताक स्वार्थ बेटाक राजनीतिक जीवन कए दांव पर लगा देलक।
ललित नारायण मिश्रक नाम पर सत्ता सुख भोगैत रहनिहार जगन्नाथ मिश्र लेल सत्ता स दूर रहब कठिन अछि। एहन मे हुनकर संन्यास सेहो नौटंकी स कम नहि रहल। एहि एक साल मे ओ कांग्रेस स राजद तक सब पार्टी मे जेबाक प्रयास केलथि, मुदा गप नहि बनल। पिछला साल लोकसभा स पूर्व राजद प्रमुख लालू प्रसाद स हुनकर लंबा गप भेल, जगदीश टाइटलर स सेहो ओ संपर्क मे रहलाह, मुदा गप नहि बनल। अंतत: नीतीशक शरण मे आबि गेलाह। उम्म्ीद अछि पिताक समर्पणक लाभ बेटा कए अगिला विधानसभा चुनाव मे भेटत।
कमाल क गप इ अछि जे एहि बेर सेहो ओ जहि संस्थानक बागडोर अपन हाथ मे लेलथि अछि ओकर स्थापना सन 1973 मे अपन भाई आ पूर्व रेल मंत्री स्वर्गीय ललित नारायण मिश्र क याद मे केने छलाह। डा. मिश्र करीब 20 साल क बाद एहि संस्था मे प्रवेश केलथि अछि। ओ स्थापना क बाद स 30 नवंबर 1990 तक एहि संस्था क चेयरमैन आ महानिदेशक दूनू छलाह। एहि संस्था क उद्देश्य सामाजिक आर्थिक विकास क सिलसिला मे शोध कार्य करब अछि। डॉ मिश्र कहला जे ओ एहि संस्था कए पुराना गौरव वापस दिएबा लेल हर संभव प्रयास करताह।

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