26 साल बाद दरबार हाल मे सुर क वर्षा

दरभंगा। कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विवि क दरबार हॉल 26 साल बाद एक बेर फेर गूंज उठल। ध्रुपद क अलापचारी आ पखावज क थाप क स्वर स दरभंगा आह्लादित भ गेल। स्पिक मैके क दू दिवसीय कार्यक्रम क प्रारंभ मंगलदिन भेल। पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र कोलकाता आ कला संस्कृति बिहार सरकार क सहयोग स आयोजित एहि कार्यक्रम क प्रथम सत्र मे अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दरभंगा घराना क पं. अभय नारायण मल्लिक अपन पुत्र संजय कुमार मल्लिक क संग अपन विशिष्ट शैली मे अलापचारी प्रस्तुत केलथि। ओतहि विश्‍व क सबस पैघ पखावज वादक आ दरभंगा घरानाक रत्‍न पं.रामाशीष पाठक ताल मात्रा क सुमधुर मिश्रण घोलैत रहलाह। द्वितीय सत्र मे विदुषी नैन्सी कुलकर्णी विदेशी तारवाद्य चेलो पर ध्रुपद क गहराइ तक पहुंचबा लेल श्रोता कए मजबूर क देलथि। दोसर दिन पं. उदय भावलंकर क ध्रुपद संगीत मे दरभंगा भाव विभोर भेल। पं. भावलकर क गायन मे पखावज पर संगीत कुमार पाठक, तानपुरा पर साहित्य मलिक संग देलथि। सत्र मे दोसर कार्यक्रम पं. पुष्पराज कोष्ठी क द्वारा सितार आ सुरबहार वादन क माध्यम स ध्रुपद गायन प्रस्तुत कैल गेल। दोसर सत्र मे दरभंगा घराना क धु्रपद गायक पं. रामकुमार मल्लिक आ प्रेम कुमार मल्लिक द्वारा ध्रुपद संगीत क धारा बहाउल गेल। एहि कार्यक्रम मे वरिष्ठ कलाकार पं. अभय नारायण मल्लिक, संजय मल्लिक, विदुषी नैन्सी कुलकर्णी सेहो मौजूद छलथि। लौकिक मंगलाचरण स प्रारंभ उक्त कार्यक्रम मे कुलपति डा. अरविंद पांडेय, स्पिक मैके क संस्थापक डा. किरण सेठ, शिक्षा शास्त्री घनश्याम मिश्र दीप प्रज्वलित केलथि।

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