100 दिन – किछु डेग बेहतरी दिस

हिमकर श्याम
कहियो एपेलबी अपन रिपोर्ट मे कहने छलाह जे सबस नीक प्रशासन क इनल-चुनल राज्य मे बिहार सेहो एकटा अछि। 1952 तक इ राज्य सबस सुशासित राज्य मे एक छल। एहि ठाम सबस पहिने जमीन्दारी क उन्मूलन भेल छल। गांधीजी अपन आंदोलन बिहार स शुरू केने छलाह। आजादी क बाद क सबस पैघ जनान्दोलन क श्रेय सेहो एहि राज्य कए अछि। फेर एहनो दौर आयल जे बिहार लगातार नीचा लुढ़कैत चल गेल। अराजक राज्य क पीड़ा कए महसूस केलक। राजनीति क अपराधीकरण, घोटाला आ भ्रष्टाचार क सिरमौर बनल। बिहार क माथ पर बीमारू राज्य क तमगा सेहो लागल। समय फेर करवट लेलक अछि। बिहार विकास क मुख्यधारा मे लौटए लागल अछि। अराजकता आ जंगलराज्य क कारण लगभग खत्म भ चुकल लोकक उम्मीद फेर लौटए लागल अछि। शासन क प्रति हुनकर दिल मे एकटा आस जगल अछि। बीमारू राज्य क ठप्पा हटाकए बिहार कए विकसित राज्य क श्रेणी मे ठार करबाक कवायद शुरू भ गेल अछि। योजना आयोग क उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलुवालिया सेहो मानैत छथि जे बिहार विकास क राह पर चलि पड़ल अछि। कानून आ व्यवस्था मे प्रत्यक्ष
सुधार देखा रहल अछि। स्वास्थ्य आ बुनियादी ढांचा मे सराहनीय काज कैल गेल अछि। इंडिया टुडे द्वारा कराउल गेल एकटा अध्ययन क अनुसार बिहार प्राथमिक स्वास्थ्य क क्षेत्र मे सबस तेज विकास वाला राज्य अछि। पिछला पांच वर्ष मे सड़क निर्माण पर 15,700 करोड़ खर्च कैल गेल अछिं। विकास क संकेत स जनता धर्म आ जाति स ऊपर उठि कए विकास क नाम पर वोट देलक। नीतीश सत्ता मे लौटलाह आ बेहतरी दिस डेग बढ़बैत अपन दोसर पारी क सौ दिन पूरा सेहो करि लेलथि। दोबारा मुख्यमंत्री बनलाक बाद नीतीश भ्रष्टाचार क खात्मा लेल महत्त्वपूर्ण आ साहसिक कदम उठेलाह। अपन संपत्ति क खुलासा केलथि। मंत्री कए सेहो एहन करबा लेल प्रेरित केलथि। आब सरकारी अधिकारी आ कर्मचारी कए अपन संपत्ति क ब्योरा सावर्जनिक करबा लेल कहलथि अछि। एहि प्रक्रिया मे एखन विधायक, नगर निकाय आ पंचायत क जनप्रतिनिधि कए शामिल कैल जेनाइ बाकी अछि। नीतीश क सौ दिन क कार्यकाल क सबस पैघ उपलब्धि विधायक निधि कए समाप्त करब अछि। विकास क नाम पर बनल एहि कोष स प्रतिवर्ष करोड टकाक बंदरबांट होइत रहल अछि। नीतीश स्पष्ट संकेत देलथि अछि जे सरकारी धन लुटनिहार अधिकारी होइत कर्मचारी, ककरो कोनो कीमत पर बख्शल नहि जाएत। भ्रष्टाचारी कए कालाधन कए वापस सरकारी खजाना मे आनब हमर प्राथमिकता अछि। एहि बीच आइबीएन 7 आ आउटलुक क तेसर डायमंड स्टेट अवार्ड मे बिहार कए स्पेशल ऐचीवमेंट अवार्ड देल गेल अछि। इ महज एकटा शुरुआत अछि। एखन बहुत किछु करब बाकी अछि। बिहार क विकास मे सबस पैघ बाधा भ्रष्टाचार अछि। सड़न पूरा व्यवस्था मे अछि। नगर निकाय आ पंचायत जतए जनता क सीधा सरकार स संबंध हुए ओतहु भ्रष्टाचार कए रोकए पडत। जिला पंचायत सदस्य स लकए ग्राम प्रधान तक भ्रष्टाचार क घेरा मे छथि। ग्रामीण विकास क अधिकतर काज क जिम्मा पंचायत क लग मे अछि। पंचायत भ्रष्टाचार आ लूट खसोट क केंद्र बनल अछि। सरकार क दिस स बनैवाला सड़क, नाली आ अन्य विकास कार्य क लेल आयल धनराशि मे सेहो लूट होइत अछि। यदि भ्रष्टाचार कए मिटेबाक अछि त ग्राम पंचायत स्तर स शुरुआत करए पडत। सरकार कए मनरेगा आ अन्य कल्याण कार्यक्रम क क्रियान्वयन मे पारदर्शिता आनए पडत। ट्रांसपरेंसी इंटरनेशनल इंडिया सेंटर फॉर मीडिया स्टडीज क एकटा अध्ययन क अनुसार गरीबी रेखा क नीचा जीवन व्यतीत करनिहार परिवार कए मूलभूत आ जरूरी 11 सरकारी सेवा कऐ प्राप्त करबा लेल भारी रिश्वत दिए पडैत अछि। इ रिपोर्ट 2007 क अछि। एहि रिपोर्ट स इ तथ्य सामने अबैत अछि जे सार्वजनिक वितरण प्रणाली, ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना, मध्याह्नन भोजन, खाद्य सुरक्षा, पोलियो उन्मूलन क संग स्वास्थ्य लाभ आ भोजन क अधिकार संबंधी योजना कौन हद तक जमीनी स्तर पर लूट आ भ्रष्टाचार क हिस्सा बनल अछि।
रिपोर्ट क अनुसार भ्रष्टाचार क सबस गंभीर मामला वाला पांचटा राज्य मे बिहार सेहो शामिल अछि। सरकारी खजाना क लाभ जे कियो उठा रहल अछि, चाहे ओ एनजीओ हुए, ठेकेदार हुए, राशन दुकानदार हुए, सब पर निगरानी जरूरी अछि। राजनीतिज्ञ, कारोबारी, ठेकेदार आ सरकारी अधिकारी क गठजोड़ क कारण स भ्रष्टाचार क समस्या विकराल रूप मे हमर सामने अछि। चुनाव मे बहाउल जा रहल टका क सीधा संबंध नेता, अफसरशाह आ पंूजीपति क एहि भ्रष्ट गठजोड़ स अछि। टैक्स क चोरी, मिलावट, जमाखोरी, रिश्वतखोरी आ दलाली भ्रष्टाचार क अलग-अलग रूप अछि। कर्त्तव्य क प्रति लापरवाही, भाई-भतीजावाद, सिफारिश, कामचोरी भ्रष्टाचार क मान्य व्याख्या मे नहि अबत अछि, एहि पर निगरानी जरूरी अछि। पांच वर्ष विधायक रहबा पर कुनबा धनवान भ जाइत अछि। जीबा क शैली मे गुणात्मक परिवर्तन आबि जाइत अछि। इ देख कए कौतूहल होइत अछि जे जतबा वेतन आ भत्ता पर आम आदमी कए रोजर्मरा क परेशानी उठबै पडेत अछि ओतबा मे जनप्रतिनिधि आ सरकारी कर्मचारी एतबा समृद्धि कतए स भ जाइत छथि। मंत्री क संपत्ति क घोषणा केतबा सही अछि, इ देखए पडत। निजी बैंक, बीमा आ चाटर्ड कंपनी नाजायज संपत्ति कए जायज बनेबाक कारोबार मे शामिल अछि। पेट्रोल पम्प, गैस आ मटिया तेल क एजेंसी क सेहो जांच हेबाक चाही जे बो कनकर नाम पर अछि। अक्सर राजनीतिक कार्यकर्त्ता आ नेता क संबंधी एहन आबंटन मे तरजीह ल लैत छथि।
जतए उम्मीद होइत अछि, ओहि ठाम अपेक्षा सेहो बढ़ि जाइत अछि। बदलाव क बयार गाम तक नहि पहुंचल अछि। गाम क लोक विकास क आस लगेने बैसल छथिं। राज्य क ग्रामीण आबादी क विशाल भाग प्रति वर्ष बाढ़ि क चपेट मे आबि जाइत अछि। राहत संबंधी व्यापक प्रयास क बावजूद आइ सेहो कोसी क
बाढ़ पीड़ित अस्थाई शिविर मे रहि रहल छथि। सड़क आ पुल कए नष्ट भ जेबा स ओ अलग-थलग पड़ल छथि। प्रत्येक वर्ष बाढ़ि क आशंका बनल रहैत अछि। कोसी पीड़ित क पुनर्वास क लेल जे करार कैल गेल अछि ओकरा सख्ती स जमीनी स्तर पर उतारल जाए। कृषि आ सड़क क संग-संग बाढ़ि प्रबंधन आ आपदा स निपटबाक तैयारी हेबाक चाही। बंद पड़ल कारखाना क पुनरूद्धार करबाक चाही । क्षयग्रस्त भ चुक राज्य ट्रांसपोर्ट क बस, बिजली बोर्ड आ कॉऑपरेटिव कए सुधारबाक जरूरत अछि। किसान क लेल बहुत योजना शुरू त कैल गेल अछि मुदा जरूरतमंद किसान कए ओकर लाभ नहि भेट रहल अछि। भ्रष्टाचार पर पहल करैत नीतीश मिसाल पेश केलथि अछि। स्पेशल कोर्ट क तहत भ्रष्ट तरीका स अर्जित धन कए सरकार जब्त करि रहल अछि। सरकार नौकरशाही कए साफ-सुथरा बनेबाक कोशिश मे जुटल अछि। विकास मे सबस जरूरी अछि सरकार आ जनता क बीच पारदर्शिता बनल रहए। सरकारी कार्य मे गलती, लापरवाही आ भ्रष्टाचार करनिहार क विरू़द्ध त्वरित कार्रवाई भ रहल अछि। एहन संभव नहि जे रातो-रात स्थिति बदलि जाएत। भ्रष्टाचार पर पूरा रोक लागि जाएत। मुदा नीतीश क रूख स एहिपर लगाम जरूर लागत। संगहि बिहार स पूर्णतः खारिज भ चुकल विवेक क स्वर समय-समय पर सुनाई पडै़त रहत।

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