‘कॉरपोरेट पार्ट-टू’

सुशांत झा
एकटा ग्लैमरस स्टोरी अछि जेकर अहम किरदार छथि- अनिल अग्रवाल, मुकेश अंबानी, चिदंबरम आ जयराम रमेश।
चलू अनिल अग्रवाल स शुरुआत करैत छी। उदार भारत क डॉलर अरबपति मे दोसर पायदान पर छथि बिहार मे जनमल ‘वेदांता रिसोर्स’ क मालिक अनिल अग्रवाल। अनिल अग्रवाल क जन्मस्थली पटना अछि। एहि हिसाब स अहां हिनका पहिल बिहारी डॉलर अरबपति सेहो कही सकैत छी! अग्रवाल पटना क मिलर स्कूल मे पढ़ाई केलथि, जतए लालू प्रसाद हुनकर सहपाठी छलाह। अग्रवाल एखन चर्चा मे एहि लेल छथि किया कि ओ तेल आ ऊर्जा क क्षेत्र क पैघ कंपनी केर्न इंडिया पर 9.6 अरब डॉलर क बोली लगा देलथि अछि आ अगर ओ इ कंपनी कीन कैत छथि त देशक सबसे अमीर उद्योगपति भ जेताह। ओना अग्रवाल मुकेष अंबानी स बहुत पाछु छथि, मुदा बिहार मूलक एहि उद्योगपतिक चमत्कारिक ग्रोथ रेट गुजराती उद्योगपति मुकेश अंबानी क लेल यकीनन चिंता क गप अछि। ज्ञात हुए जे साल 2009 मे हिनकर रैंकिंग पांचम छल।
अनिल अग्रवाल क पिता पटना मे धातु क एकटा छोट सन कारोबारी छलथि, जे बिजली विभाग क लेल एल्यूमिनियम क कंडक्टर बनबैत छल। सन् ‘76 मे अनिल अग्रवाल स्टरलाइसट इंडस्ट्रीज नाम क कंपनी बनेलाह, जेकरा धातु कारोबार क फील्ड मे आसमान छुबाक छल। जी हां, इ वैह स्टरलाइट छल जे भाजपा क राज मे बाल्को कए भारत सरकार स कीनने छल। बाद मे साल 1986 मे अग्रवाल ‘वेंदांता रिसोर्स’ नाम क कंपनी क नींव रखलथि। साल 2002 मे अग्रवाल हिंदुस्तान जिंक लिमिटेड कए सेहो कीन लेलथि। मुदा कहानी एहिठाम खत्म नहि होइत अछि।
अनिल अग्रवाल आ हुनकर वेदांता पर भ्रष्टाचार आ धांधली क कईटा आरोप लागल। बाल्को अधिग्रहण क समय सेहो आ हाल मे नियामगिरी हिल्स मे बाक्साइट क खदान हथियेबाक कोशिश कए लकए सेहो । एनसी सक्सेना कमेटी ओहि ठाम चलि रहल माईनिंग कए अवैध करार द देलक अछि। वेदांत पर जमीन हड़पबा, फर्जी दस्तावेज क आधार पर लंजीगढ़ (उड़ीसा) मे एल्यूमिनियम रिफाइनरी खोलबा आरोप लगाउल गेल।
बहुत दिन नहि भेल अछि जखन अपन सबहक गृहमंत्री पी चिदंबरम वेदांता क एकटा डायरेक्टर छलाह। बाद मे जखन ओ गृहमंत्री बनलाह त अरुंधती राय कहलथि जे ओ त वेदांता क खनन हित क सुरक्षा क लेल चौकीदार बनलाह अछि।
बहरहाल, वेदांता ओहि समय विवाद मे फंसल जखन उड़ीसा क नियामगिरी क पहाड़ी मे बाक्साइट क खदान क लेल उड़ीसा सरकार आदिवासी कए उजाड़बा पर आमादा भ गेल छल। पुनर्वास लेल आदिवासियों कए 30 किलोमीटर दूर बनल अपार्टमेंटनुमा मकान मे बसा देबाक योजना छल! मुदा जहिया वेदांता केर्न इंडिया पर दावा ठोकलक, ओहि दिन पर्यावरण मंत्री जयराम रमेश वेदांता क नियामगिरी प्रोजेक्ट पर पाइन फेर देलथि। बहरहाल, तेज रफ्तार स दौड़ रहल अनिल अग्रवाल, जयराम रमेश क देल घाव कए सहला रहल छथि आ अगिला वार क तैयारी मे छथि।
एहि ठाम किछु पेंच अछि जेकरा बुझब जरूरी अछि। अनिल अग्रवाल जइसन लोक दिल्ली समेत छोट-छोट राजधानी मे डीलमेकर क जे जाल बिछेने अछि ओहि मे कई बेर अपने मे टकराव भ जाइत अछि। भाजपा क राज मे ओकर काज मजे स चलल आओर कांग्रेस मे चिदंबरम हुनकर पुरान यार छलाह। केर्न इंडिया कए अगर ओ खरीद लैत छथि त ओे आहि स्थिति मे आबि जेताह, जतए स हुनका टकराव मुकेश अंबानी क रिलांयस स होएत। एहि लेल आब ओ मुकेश क आंखि मे चुभ रहल छथि। तेल रिफाइरनी क मामले मे ओ मुकेश अंबानी स पंगा ल रहल छथि त बिजली क सुपर प्रोजेक्ट क घोषणा करिकए ओ अनिल अंबानी कए सेहो चुनौती द देलथि अछि। अग्रवाल एक बेर रिफाइनरी क धंधे मे हाथ जरा चुकल छथि, मुदा पुरान इरादा खतम नहि भेल अछि। अगिला साल क शुरुआत मे ओ बिजली क 11टा सुपर प्रजेक्ट क लेल तैयार छथि जाहि मे हरेक कम स कम 4,000 मेगावाट क अछि। एहि ठाम रिलांयस क दूटा दिग्गज स हुनकर टकराव शुरू होइत अछि।
सूत्र क मुताबिक कांग्रेस क भीतर क सत्ता समीकरण मे चिदंबरम, मनमोहन सिंह आ मोंटेक एकटा ‘कोटरी’ क छथि जे धुर उदारवादी मानल जाइत छथि। दोसर दिस एक खेमा ओ अछि जे पार्टी आलाकमान क हिसाब स पार्टी क समाजिक चेहरा बनै चाहैत अछि। एकर नव अगुआ बनलथि अछि दिग्विजय सिंह, जयराम रमेश आ सीपी जोशी। इ कांग्रेस आलाकमान क समाजिक चेहरा छथि, बिल्कुल सौम्य, सरल आ निश्चल! एहि खेमा कए ‘आम आदमी’ क ‘सरोकार’ क सुतैत जागैत चिंता रहैत अछि। ओ सरकार क कॉरपोरेट लॉबी क सामने हरदम बयानवाजी करैत अछि आ जनता कए आश्वस्त करैत अछि। सूत्र क मानि त रिलांयस एहि खेमा कए सधलक अछि। एकर अलावा मुरली देवड़ा आ रिलायंस क संबंध सेहो चर्चा मे अछि। केर्न इंडिया कए निगलबाक फिराक मे लागल वेदांता क बाक्साइट खदान पर ताला जड़बाक घटना कए एहि संदर्भं मे देखल जा रहल अछि। ओना हम सब इ नहि बिसरलहुं अछि जे कोना 1994 मे पर्यावरण मंत्री राजेश पायलट कए रातोराति तबादला करि देल गेल छल जखन ओ चंद्रास्वामी स पंगा लेने छलाह। मुदा एहि बेर जयराम रमेश क पाछु मुकेश अंबानी छथि जिनकर कांग्रेस क पैघे नेता मे आकंठ घुसपैठ अछि। एहि लेल फिलहाल हुनकर नौकरी सुरक्षित लगैत अछि।
एहि कात जाहि हिसाब स माओवाद क बहाने दिग्विजय सिंह, चिदंबरम पर निशाना साधि रहल छथि ओहि स कई बेर लगैत अछि जे चिदंबरम क नौकरी खतरा मे अछि। जाहिर अछि, दिग्गी राजा क इ माओवाद प्रेम महज दिखावा अछि, खेल त कतहु आओर स खेलल जा रहल अछि।
देखल जाए त वेदांता जाहि बाट पर आगू बढै़त एहि मुकाम पर पहुंचल अछि, लगभग रिलांयस सेहो एहने बाट स एहि ठाम धरि पहुंचल अछि। धीरुभाई अंबानी आ हुनकर सुपुत्र अंबानी बंधु- अपन कारोबार मे आगू बढ़बा लेल हर उपलब्ध तरीका अख्तियार केलथि। एहन मे इ कॉरपोरेट वार कौन मंत्री कए हलाल करत इ आगू देखब।
दुर्भाग्य स हम एकटा एहन युग क गवाह छी जतए ठेकेदार, दलाल आ खनन माफिया सरकार पर कब्जा करि लेने अछि। हिंदुस्तान मे आर्थिक सुधार(?),खान माफिया क उदय, आदिवासी क पैघ पैमाना पर विस्थापन आओर माओवाद क उदय क कालक्रम लगभग एकहि अछि। एहि हिसाब स अहां कर्नाटक क रेड्डी बंधु कए अनिल अग्रवाल आ अंबानी बंधु क लघु रूप मानि सकैत छी। दुनिया क विशालतम लोकतंत्र मे अहांक तहियो स्वागत अछि! चलू कॉमनवेल्थ गेम्स मे अतिथि क स्वागत करि! चुप रही आओर देश क लाज बचाबी!

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