हल होएत अपराधीकरण क पहेली

आब जखन कानून क शासन भरसक स्थापित भ रहल अछि त हेबाक इ चाही जे सबटा दल राज्य क हित लेल आब बाहुबली कए बिसरी नीक लोक कए टिकट द लोक लग चुनावी विकल्प प्रस्तुत करथि। यदि चुनाव आयोग आ शासन एहि बेर सेहो शांतिप्रिय मतदाता क संग द दिए त एहि चुनाव मे सचमुच रहल-सहल बाहुबली आ माफिया क सेहो राजनीति स सफाया भ जाएत आ अपराध क पक्ष लेनिहार नेता क हार होएत।

सुरेंद्र किशोर
बिहार विधानसभा क एहि चुनाव मे एकटा महत्वपूर्ण सवाल क जवाब भेटबाक उम्मीद अछि। एहि बेर इ साबित भ जाएत जे राजनीति क अपराधीकरण क लेल जनता यानी मतदाता जिम्मेदार अछि या विभिन्न दल क नेता। एखन धरि जनता नेता कए, आ नेता मतदाता कए एकरा लेल जिम्मेदार मानैत रहला अछि। हालांकि निष्पक्ष प्रेक्षक क इ राय रहल जे एकरा लेल अधिकतर मामला मे किछु प्रमुख नेता जिम्मेदार छथि। मुदा आब नतीजा पर पहुंचबाक मौका आबि गेल अछि। इ मौका बिहार क चुनाव द रहल अछि। बिहार ओहि किछु राज्य मे शामिल अछि जे राजनीति क अपराधीकरण क लेल चर्चित रहल अछि।
बिहार स चुनल गेल दूटा परस्पर-विरोधी बाहुबली सांसद जखन लोकसभा मे मारिपीट करि लेने छलाह त एहि घटना स मर्माहत संसदक विशेष अधिवेशन भेल छल। 1997 क ओहि अधिवेशन मे राजनीति क अपराधीकरण पर गंभीर चिंता प्रकट कैल गेल। फेर संसद सर्वसम्मत संकल्प केलक जे ‘राजनीति कए अपराधीकरण स मुक्त करब आ भ्रष्टाचार कए समाप्त करबा लेल राष्ट्रीय अभियान चलाउल जाएत।’ एहि संकल्प क दोसरे दिन बिसरा देल गेल। मुदा बिहार मे हाल क वर्ष मे राजनीति क अपराधीकरण क समस्या मे काफी कमी आईल अछि। एहन मौजूदा राज्य सरकार आ न्यायपालिका द्वारा किछु ठोस उपाय करबा स भेल अछि। अगिला चुनाव एहि उपाय कए अंजाम तक पहुंचेबाक अवसर बनि सकैत अछि।
इ स्थिति पहिल बेर पैदा भेल अछि जे एकटा चुनाव मे सब किछु साबित भ जाए। गत विधानसभा चुनाव मे बाहुबली हिंसा क तहत कोनो मौत नहि भेल छल। ओ हिंसामुक्त चुनाव नवंबर 2005 मे भेल छल। मुदा ओहि स पहिने जखन फरवरी 2005 मे राज्य विधान सभा क चुनाव भेल छल त चुनावी हिंसा मे  27 लोक क जान गेल छल। फरवरी 2005 मे एकटा मंत्रिमंडल कार्यरत छल आ नवंबर 2005 मे राष्ट्रपति शासन छल।
एकटा आओर गप देखबा मे भेटल । नवंबर 2005 क चुनाव मे ओहिस पहिलका चुनाव क अपेक्षा कम बाहुबली विजयी भ सकलाह। सन 2009 क लोकसभा क आम चुनाव मे सेहो बिहार मे कोनो  बाहुबली-प्रेरित हत्या नहि भेल। किछु नक्सल प्रेरित हत्या जरूर भेल। ओ सेहो पहिनेक अपेक्षा काफी कम। सन 2009 क लोक सभा चुनाव मे सेहो 2005 क विधानसभा चुनाव क अपेक्षा कम बाहुबली चुनाव जीतलाह । यानी बिहार क राजनीति क अपराधीकरण किछु आओर कम भेल। यानी गत दो आम चुनाव मे चुनावी हिंसा लगभग नहि कए बराबर भेल। सन 2005 क नवंबर मे त पैघ संख्या मे अर्धसैनिक बल तैनात छल, मुदा 2009 मे त अधिकतर मतदान केंद्र पर त होम गार्ड क जवान तैनात छलाह। फेर बाहुबली, चुनावी हत्या करबाक  हिम्मत नहि जुटा सकलाह। इ सेहो महत्वपूर्ण गप अछि जे 2005 आ 2009 मे जखन जनता कए भयमुक्त वातावरण मे मतदान करबाक मौका भेटल त  ओ राज्य क अधिकतर ओहन बाहुबली कए सेहो अपन मत क जरिए हरा देलक जेे गत कई चुनाव स लगातार जीत दर्ज करि रहल छलाह। यानी आम मतदाता क लेल बाहुबली जरूरी नहि छल अगर कानून अपन काम करै त। याद रहए जे अदालत गत करीब चार साल मे लगभग 49 हजार अपराधी कए सजा सुना चुकल अछि। भयमुक्त माहौल बनेबा मे एहि अदालती निर्णय सब महत्वपूर्ण भूमिका निभेलक अछि। एहि स पहिने एकटा नेता कहैत छल जे हम कोनो बाघ क खिलाफ बकरी कए त चुनाव मैदान मे नहि आनि सकैत छी। मुदा जनता बाघ कए सेहो पराजित करि देलक।
पहिने बिहार क कईटा बाहुबली कए इ लगैत छल जे चाहे ओ जाहि ठाम स जेकर हत्या करि दथि, किछु राजनीतिक शक्ति हुनका अंततः बचा लेत। मुदा आब एहन स्थिति नहि अछि। कानून अपन काज करि रहल अछि, एहि लेल मतदान केंद्र पर हिंसा आ जोर-जबर्दस्ती करनिहार बाहुबली क काफी कमी होइत जा रहल अछि। विधानसभा क अगिला आम चुनाव अक्टूबर-नवंबर मे हेबाक अछि। यदि गत दू चुनाव क भांति एहि बेर सेहो शासन आ चुनाव आयोग मतदाता कए भयमुक्त माहौल प्रदान करत त बचल-खुचल बाहुबली सेहो बिहार क विधायिका स बाहर भ जेताह।
जनता क रुख देखि कए त यैह लगैत अछि। एहि अनुभव कए झुठलेबा मे लागल किछु नेता एखनो  डाकु कए वाल्मीकि’ बनेबा लेल प्रयत्नशील छथि। ओे एखनो मानैत छथि जे बाहुबली कए टिकट देब जरूरी अछि। अगर खूंखार बाहुबली एहि बीच सजायाफ्ता भ चुकल अछि त किछु खास क्षेत्र स चुनाव जीतबा लेल ओकर संबंधी कए टिकट देब  जरूरी अछि। की बिहार क बदलल राजनीतिक माहौल मे आब इ करब जरूरी अछि?
जनता त नीक चरित्र क उम्मीदवार चाहैत अछि। इ त दल आ ओकर नेता छथि जे जनता क लेल इ स्थिति पैदा करि दैत छथि जे दूटा खराब मे स एकटा नीक कए चुनाव करू। उम्मीद अछि जे आम जनता एहि बेर बचल-खुचल बाहुबली कए राजनीति स बाहर करि देत। एहन सचमुच भ जाए त लोक इ अंतिम तौर स देख लेत जे कोना जनता नहि बल्कि किछु सत्ताकामी स्वार्थी आ माफियापक्षी नेता बिहार क राजनीति क अपराधीकरण क लेल जिम्मेदार छलाह।
बिहार मे जखन पहिल बेर राजनीति क अपराधीकरण शुरू भेल छल तखन सेहो ओकरा लेल तखुनका सत्ता पक्ष क किछु स्वार्थी नेता जिम्मेदार छलाह। ओ स्थानीय थाना आ  अंचल कार्यालय कए घूसखोरी आ अन्याय क अड्डा बना देलाह। जखन जनता कए थाना आ अंचल कार्यालय स न्याय नहि भेटल तखन ओ स्थानीय बाहुबली क शरण मे जेबा लेल मजबूर भ गेल। बाहुबली कए तखने स सत्ता क संरक्षण छल। ओ बाहुबली कम स कम एक तरफ क लोक कए न्याय देबा मे सक्षम छलाह। एहि स माफिया क ताकत बढ़ल। फेर किछु पैघ दल क खास नेता टिकट द कए हुनका विधायक आ सांसद बना देलथि। टिकट द देला स कोनो बाहुबली कए ओहि दल क वोट बैंक सेहो हासिल भ गेल। आब जखन कानून क शासन भरसक स्थापित भ रहल अछि त हेबाक इ चाही जे सबटा दल राज्य क हित लेल आब बाहुबली कए बिसरी नीक लोक कए टिकट द लोक लग चुनावी विकल्प प्रस्तुत करथि। यदि चुनाव आयोग आ शासन एहि बेर सेहो शांतिप्रिय मतदाता क संग द दिए त एहि चुनाव मे सचमुच रहल-सहल बाहुबली आ माफिया क सेहो राजनीति स सफाया भ जाएत आ अपराध क पक्ष लेनिहार नेता क हार होएत।

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