हमर फैसला ककरो गला स नीचा नहि उतरि रहल छल : अरुणा

अरुणा मिश्र आइ बोक्सिंग क दुनिया मे कोनो परिचय क मोहताज नहि छथि। मिथिलाक सामाजिक बंधन कए तोडि कए विश्व पटल पर मिथिला आओर भारत क नाम रोशन करबा लेल अरुणा कए काफी कठिन बाट तय करए पडल अछि।‍ जखन बोक्सिंग बिहार क युवक लेल सेहो अन्‍यभिज्ञ खेल छल तखन अरुणा एहि खेल मे अपन भविष्‍य तकबाक कोशिश शुरू केलथि। ओ आन धीया जेकां घर मे नहि रहलीह, घर स बाहर निकलि बोक्सिंग क रिंग मे कूदि विश्व पटल पर मिथिला क नाम रोशन केलथि। 32 वर्षीय मिथिलाक एहि मुक्‍केबाज बेटी स इसमाद लेल समदिया सुनील कुमार झा आओर अनित कुमार झा लंबा चर्च केलथि। प्रस्‍तुत अछि ओकर किछु खास अंश:-
प्रश्न – अरुणा जी नमस्कार
उत्तर – नमस्कार.
प्रश्न – सबस पहिने त इ कहू जे मिथिलाक बेटी आ मुक्‍केबाजी, कोनो भेल की मेल।
उत्तर – देखल जाए त नैनपन मे एहि मेल क शुरुआत भेल। हमर पिताजी स्वर्गीय केके मिश्र एकटा एथिलिट छलाह। ओ विश्व स्‍तर पर कई बेर भारत कए प्रतिनिधित्‍व क चुकल छथि। अपन पिता स खेल क प्रति रुझान हमरा मे आयल। परिवार स सहयोग भेटल त हम अपन ध्यान खेल दिस आओर मोडि देल।
प्रश्न – मिथिला मे एखनो इ खेल महिला लेल असंभव आओर अजीब सन अछि, एखन मे अहां बोक्सिंग कए कॅरियर बनेलहुं। केहन मुश्किल आयल।
उत्तर – मुश्किल त सच मे बहुत आयल। सच पूछू त ककरो इ गप गला स नीचा नहि उतरि रहल छल। हमर एहि फैसला पर किछु लोक अजीव टिप्‍पणी सब करए लागल। मोहल्‍ला मे त नहि पूछू लोक इ तक कहए स नहि चूकल जे एहि तरहक खेल मे जेबा स बेटीक ब्‍याह तक नहि होएत। परिवार सेहो एकमत नहि छल, लोक की कहत, समाज मे बदनामी होएत, आर न जाने की की। मुदा एहि कठिन परिस्थिति मे हमर पापा आ बाद मे पति संग देलथि आ आइ हम एहि ठाम छी।
प्रश्न – अपन रोमांचकारी सफ़र क बारे मे किछु बताउ।
उत्तर – बोक्सिंग क प्रोफेशनल शुरुवात हम पंजाब मे केलहुं। भेल इ जे एक दिन हम सब पूरा परिवार क संग फुटबाल खेलाइत रही। फुटबाल खेलाइत काल हमर अचानक हमर पैर मे चोट लागल, चोट गंभीर छल, मुदा तखने हमर एसोसियेशन खबरि देलक जे हमर सेलेक्शन पंजाब स नेशनल गेम क लेल भ गेल अछि। सब मना करि रहल छल जे एहि हालत मे हिस्सा नहि लिय। जीन मे पहिल बेर एहन पैघ प्रतियोगिता मे हिस्‍सा लेबाक मौका भेटल छल। हमर विश्‍वास पर परिवार सेहो हौसला बढेलक आ हम नेशनल गेम मे सिल्वर मेडल जीत लेलहुं। इ हमरा लेल सबस महत्‍वपूर्ण रहल।
प्रश्न – अहां ब्‍याह क बाद सेहो एहि मे सक्रिय छी, कोना भेल संभव।
उत्तर – सच कहू त इ हम आइ धरि नहि बुझि सकलहुं अछि। एकरा संयोग कही या अपना नसीब। हमर पति श्री शिशिर झा बिरसा बोक्सिंग सेंटर क जेनरल सेक्रटरी छथि आओर ओ हमरा एहि लेल प्रोत्‍साहित करैत रहैत छथि। किया कि ओ अपने खिलाडी क बीच मे रहैत छथि ताहि लेल ओ भावनास अवगत छथि आ हुनका पता अछि जे खेल की होइत अछि।
प्रश्न – अहां लग पदक सूची त काफी लंबा अछि, ओना कौन कौन चैम्पियनशिप मे हिस्सा ल चुकलहुं अछि एखन धरि।
उत्तर – देश विदेश क कईटा चैम्पियनशिप मे भाग ल चुकलहुं अछि जाहि मे प्रमुख अछि
विश्‍व स्‍तररीय –
दोसर एशियन वीमेन बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘हिस्सार’ 2003 – स्वर्णपदक
वर्ल्ड बोक्सिंग वीमेन गेम ‘नोर्वे’ – स्वर्णपदक
ट्रेनिंग कम कॉम्पिटिशन इटली(रोम) 2002 – स्वर्णपदक
तेसर एशियन वीमेन बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘ताइवान’ 2005 – रजतपदक
एमिट कमेन्ट बोक्सिंग टूर्नामेंट 2005 – कांस्यपदक
वर्ल्ड बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘दिल्ली’ 2006 – कांस्यपदक
वीनस कप वर्ल्ड बोक्सिंग ‘डेनमार्क’ 2006 – रजतपदक
एमिट कमेन्ट बोक्सिंग टूर्नामेंट ‘टर्की’ 2003 – कांस्यपदक
वर्ल्ड बोक्सिंग वीमेन गेम ‘कजाकिस्तान’ 2009 – रजतपदक
वर्ल्ड पुलिस चैम्पियनशिप न्युयोर्क 2011 – स्वर्णपदक

देश स्‍तरीय-
दोसर इंटर जोनल वीमेन बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘गुंटूर. आँध्रप्रदेश’ 2011 – स्वर्णपदक और सर्वश्रेष्ठ बोक्सर
उंचासम आल इंडिया पुलिस मीट वीमेन बोक्सिंग ‘जम्मू’ 2011 – स्वर्णपदक
चौतिसम नॅशनल गेम ‘जमशेदपुर’ 2011 – स्वर्णपदक
एगाहरम वीमेन सीनियर नॅशनल बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘केरला त्रिशुर’ 2010 – स्वर्णपदक
इंटर जोनल वीमेन बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘त्रिपुर तमिलनाडु’ 2010 – स्वर्णपदक
अरतालिसम आल इंडिया पुलिस मीट वीमेन बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘जमशेदपुर’ 2009 – स्वर्णपदक
दस वीमेन सीनियर नेशनल बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘जमशेदपुर’ 2009 – स्वर्णपदक
तैतीसम नेशनल गेम ‘आसाम’ 2007 – स्वर्णपदक
सातम वीमेन सीनियर नॅशनल बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘विज़ाक’ 2006 – स्वर्णपदक
छठम वीमेन सीनियर नॅशनल बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘टाटानगर’ 2005 – स्वर्णपदक
पांचम वीमेन सीनियर नॅशनल बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘केरला’ 2004 – स्वर्णपदक
चारिम वीमेन सीनियर नॅशनल बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘आसाम’ 2004 – रजतपदक
तेसर वीमेन सीनियर नेशनल बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘मिजोरम’ 2003 – स्वर्णपदक
ईस्ट जोन वीमेन बोक्सिंग चैम्पियनशिप ‘कोलकाता’ 2002 – स्वर्णपदक और सर्वश्रेष्ठ बोक्सर
नेशनल गेम ‘पंजाब’ 2001 – रजतपदक

प्रश्न – मिथिला क बेटी सब स इसमाद क माध्यम स की कहै चाहब।
उत्तर – बेसी त नहि किछु, मुदा इ जरूर कहब चाहब जे सपना देखू आ तखन धरि देखैत रहू जखन तक ओ पूरा नहि भ जाए। बाट मे बहुत दिक्‍कत आउत, बहुत कठिनाइ अहां कए सपना कए तोडबाक कोशिश करत मुदा अहां घबरेने बिना अपन बाट पर आगू बढैत रहू एक दिन अहां मंजिल पर रहब आ अहांक सपना पूरा भ जाएत। अगर अहां अपन विश्‍वास बनेने रहब त एक दिन पूरा विश्व अहां कए सलाम करत, किया कि जे कठिनाइ कए पार जेबाक हिम्‍मत रखैत अछि ओ सिकंदर होइत अछि।
प्रश्न – इसमाद स गप करबा लेल बहुत बहुत धन्यवाद।
उत्तर – अहूं दूनू गोटे कए बहुत बहुत धन्यवाद।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

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