सौ सालक बिहार आ नवजात बिहारियत

कुमुद सिंह
मंगल, शुभ मंगल। 22 मार्च, 1912, बिहार राज्यक निर्माण करि अंगरेज बंगाल स अलग एकटा नव पहचान चाहनिहार लोकक जिद पूरा केलक। आइ बिहार अपन 99 साल पूरा करि सौ साल लेल विदा भ गेल अछि, मुदा बिहारियत एखनो नवजात अछि। सौ सालक बाद एकरा युवा बनेबाक कोशिश शुरू कैल गेल अछि। जाहि बिहार लेल आंदोलन भेल, जाहि बिहार लेल लोक जीवनक त्याग केलक ओहि बिहार पर गर्व करबा लेल अपील भ रहल अछि। बिहार क गौरवशाली विरासत कए देखबा लेल बिहारी कतार मे ठार भ रहल छथि। अपन चेहरा आखिर आइ नव लगबाक पाछु कारण जानबाक कोशिश करबा लेल हमरा सब कए मंथन करबाक चाही। इ सच अछि जे जन्म क किछु साल बाद बिहार आधा टूटी गेल आ ओडिशा नव राज्य बनि गेल। बिहार लेल इ सदमा आ संदेश दूनू छल। सांस्कृतिक मजबूतीक कारण ओडिशा क निमार्ण बिहार लेल सांस्कृतिक विरक्त क कारण बनि गेल। अपना कए एक प्रकार स बचेबा लेल बिहार अपन पहचान कए कहियो खुली कए सामने अनबा स डराए लागल। देशक पहचान स जुडि ओ अपना कए सुरक्षित महसूस केलक आ धीरे-धीरे ओ अपन विरासत स विमुख होइत गेल। बिहार दरअसल भारतीय भ गेल। अपन भाषा, वेश-भूषा, खान-पान आ पर्व-त्योहार किछु अपन कहबा लेल नहि रखलक। कहियो पंजाबी त कहियो बंगाली त कहियो उत्तरप्रदेशक लोक जेकां व्यवहार करबा मे अपना कए दक्ष बना लेलक। जहिया भारत क एक-एक टा राज्य अपन पहचान लेल संघर्ष करैत छल, बिहार अपना कए भारतक एकटा राज्य स बेसी कोनो परिचय देबा लेल तैयार नहि छल।
एहन नहि जे बिहारियत कए जगेबाक बीच बीच मे प्रयास नहि भेल, भेल मुदा दबा देल गेल। संविधानसभा मे महाराज दरभंगा कामेश्वर सिंह बिहार स संबंधित एकटा विधेयक प्रस्तुत केने छलाह, मुदा ओ विधेयक एहि लेल नामंजूर भ गेल जे बिहार क सांस्कृतिक पहचान एकर मजबूती स बेसी देशक कमजोरी बनि सकैत छल। आजादी क बाद दामोदर घाटी परियोजनाक बिहार मे विरोध शुरू भेल। कारण साफ छल एहि स बंगाल कए फायदा आ बिहार कए घाटा होइत छल। विधानसभा मे विपक्षक संग सत्ता पक्षक किछु सदस्य सेहो एहि पर विरोध जतेलाह। बहस कए गरम होइत देखि श्रीबाबू कहला जे बिहार देशक हिस्सा अछि आ बंगाल देशक एकटा प्रमुख राज्य अछि, हमरा सब कए देशक विकास लेल किछु कष्ट उठेबा लेल हरदम तैयार रहबाक चाही, नहि त देशक विकास संभव नहि अछि।
भाषाक रूप मे मजबूत बिहार कए सेहो भाषाई रूप स दरिद्र बना देलक गेल। मैथिली, मगही आ भोजपुरी कए कात करि हिंदी कए प्रथम भाषा बना एकरा हिंदीभाषी राज्‍य बना देल गेल, जेकर ओहि समय मे सेहो विरोध भेल छल आ विरोध कए दबेबा लेल राजभाषा परिषद कए दू लाख टकाक आवंटन कैल गेल छल। एकर बावजूद जखन बिहार मैथिली, भोजपुरी आ मगहीक अस्तित्‍व नहि खत्‍म भेल त धर्मक आधार पर एकरा तोडल गेल। 70 क दशक मे जतए एक दिस पूर्वी बंगालक मुसलमान बांग्लाक स्थान पर उर्दू लिखबा लेल तैयार नहि भेलाह आ अलग देशक मांग पर अडि गेल छल। ओहि ठाम पश्चिम बंगालक भाग रहल बिहार मे देशक नाम पर उर्दू कए दोसर राज भाषाक दर्जा द मुसलमान कए मैथिली, भोजपुरी आ मगही स अलग करि देल गेल। एहन अनेक उदाहरण अछि, जाहि मे बिहारियत कए पैदा करिनिहार कारक कए समय समय पर खत्‍म कैल जाइत रहल। दरअसल अपना कए मिटा कए देश क निर्माण मे लागल बिहार कए अपना दिस तकबाक कहियो मौके नहि भेटल।
झारखंड क गठन क बाद बिहार क एकटा पैघ भ्रम टूटल। बिहारक ओहि डर कए दूर करि देलक जे ओडिशाक गठन स पैदा भेल छल। झारखंड क गठन मे सांस्कृतिक मजबूती स बेसी आर्थिक पक्ष रहल। बिहार कए इ बुझबा मे आबि गेल जे टूटबा लेल केवल सांस्कृतिक मजबूती एकटा कारण नहि अछि, विकास एकर मूल मे आबि चुकल अछि। आओर बिहारियत विकास लेल जरूरी अछि। मुदा बिहारक गठन संग पैदा भेल बिहारियत तखन धरि समाप्त भ चुकल अछि। बिहार कए इ आभास भ गेल छल जे ओकर सांस्कृतिक दरिद्रता बिहारियत कए खत्म कए चुकल अछि। एक बेर फेर ओकरा पैदा करबाक प्रयास शुरू भेल अछि। मुदा इ एतबा आसान नहि अछि। जाहि चीज कए बिहार 99 साल तक अपना स दूर रखलक ओ एतबा आसानी स कोनो ओकरा लग आबि सकैत अछि।
सबस पहिने त बिहारियत कए बुझबा लेल कए तैयार अछि। देखल जाए त देश विदेश मे बिहारियत जगेबा लेल कार्यक्रमक आयोजन भ रहल अछि। मुदा राज्यक राजधानी मे आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रम मे दरभंगा आ बेतिया घरानाक कोनो कलाकार नहि देखा रहल छथि। तहिना राजधानी दिल्ली मे जे समापन समारोह आयोजित भ रहल अछि ओहि मे प्रस्तुति देनिहार कलाकारक सूची मे बिहारक कलाकार नदारद छथि, गायिका मालनी अवस्थी आ मशहूर कथक नृत्यांगना शिखा खरे प्रस्तुति स्वागत योग्य अछि, मुदा आयोजनकर्ता कए बिहारक कलाकार क अनुपस्थिति खटकबाक चाही। देखल जाए त अगर 99 साल मे बिहार एकटा एहन कलाकार पैदा नहि करि सकल जे दिल्ली मे एहि असवर पर कार्यक्रम करि सकए त इ बुझबा मे देर नहि हेबाक चाही जे बिहार जरूर 99 साल पूरा करि लेलक मुदा बिहारियत एखनो नवजात अछि।

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1 टिप्पणी

  1. बिहारियत नामक कोनो चीज अछी आ ने बनी सकत
    की बिहारक लोक ओतक बहुसंख्यक भाषा मैथिलि माने लेल तैयार हेताह
    तखन कियैक नहीं मिथिला , भोजपुर(यु पीक पूर्वांचल मिला वा अलग) आ केन्द्रशाषित मगध बनी जाय
    बिहार दिवसक केवल कलाकार में नहीं सब विग्यपन्मे सेहो मिथिला प्रायः नदारत अछि ओना कुमुदजी मधुबनी पेंटिंग देखि खुश भय सकैत छठी मुदा मिथिला ओतबही नहीं छैक?
    डॉ धनाकर ठाकुर

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