सौ फीसदी कए पार करि गेल आठटा विभाग


पटना। बिहार सरकार पहिने टका खर्च करबा मे कंजूस छल। वित्तवर्ष क अंत मे कईटा विभाग आवंटित राशि लौटा दैत छल, मुदा आई हालात बदलल अछि। बिहार क आठटा विभाग खर्च करबाक पिछला सबटा रिकार्ड कए तोडि़ देलक अछि। हिसाब सौ फीसदी कए सेहो पार करि गेल। उद्योग विभाग त 155.67 प्रतिशत राशि खर्च करि दरियादिलीक एकटा नव रिकार्ड बना लेलक।
सरकार क अद्यतन रिपोर्ट मे मार्च 2010 तक क खर्च क व्यापक ब्योरा अछि। एकर अनुसार वाणिज्य कर विभाग (100 फीसदी), वित्त विभाग , मानव संसाधन विभाग (101.90), कार्मिक विभाग (100), पर्यटन विभाग (100), शहरी विकास (114.58) आ खाद्य आपूर्ति विभाग 100 प्रतिशत राशि खर्च केलक अछि। कोष्ठक मे खर्च भेल राशि क मात्रा अछि। एहि विभाग कए 2009-10 मे क्रमश: 398 लाख, 11115.97 लाख, 139443 लाख, 28222 लाख, 4400.37 लाख, 2978 लाख, 77213 लाख तथा 3484.67 लाख टका आवंटित भेल छल।
नब्बे स सौ प्रतिशत राशि खर्च करनिहार विभाग मे पशु आ मत्स्य संसाधन (92.58 प्रतिशत), भवन आ आवास (92.36), सहकारिता (92.75), आपदा प्रबंधन (98.10), ऊर्जा (97.91), पर्यावरण आ वन (91.23), स्वास्थ्य (97.18), गृह (99.64), कला संस्कृति आ युवा मामला (92.28), सूचना आ जनसंपर्क (94.06), राजस्व आ भूमि सुधार (94.08), लघु जल संसाधन (92.24), अल्पसंख्यक कल्याण (98.67), योजना आ विकास (99), पथ निर्माण (99.98), ग्रामीण विकास (98.95), ग्रामीण कार्य (95.54), निबंधन-उत्पाद आ मद्य निषेध (99), विज्ञान प्रौद्योगिकी (99.07), गन्ना उद्योग (90.15), परिवहन (99.91), जल संसाधन (97.92), पिछड़ा आ अति पिछड़ा कल्याण (96.22), अनुसूचित जाति जनजाति कल्याण (95.83), समाज कल्याण (92.67) आ विधान परिषद (94.79 फीसदी) शामिल अछि। कोष्ठक मे खर्च क राशि क ब्योरा अछि।
दस्तावेज गवाह अछि जे सबस कम राशि लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (पीएचईडी) खर्च केलक। 2009-10 मे एकरा 22700 लाख टका भेटल छल। मार्च 2010 तक मात्र 16258.51 लाख खर्च भेल। प्रतिशत मे मात्रा अछि-71.62 प्रतिशत। लगभग एतबे खर्च सूचना आ प्रौद्योगिकी विभाग क सेहो अछि-72.23 प्रतिशत। 2009-10 मे एकरा खर्च क लेल 5952 लाख देल गेल छल।
खर्च क मामला मे किछु विभाग अंतिम महीना मे रेस मे शामिल भेल। मसलन, फरवरी 2010 मे कृषि विभाग क खर्च क मात्रा सिर्फ 51.05 प्रतिशत छल। मुदा महीना भरि बाद, यानी मार्च 2010 मे इ बढि़कए 89.06 फीसदी भ गेल। एहन नमूना क कमी नहि अछि। हालांकि वित्त विभाग क एकटा वरीय अधिकारी एकरा मार्च लूट नहि मानि रहल छथि, हुनकर कहब अछि जे इ बिल्कुल स्वाभाविक अछि। कारण जे हमर वित्तीय वर्ष क तकनीकी पक्ष कए देखबा स इ असंगत नहि लागत। हुनकर कहब अछि, दरअसल वित्तीय वर्ष क समाप्ति क दौरान विभागीय खर्च क ब्योरा अद्यतन रहैत अछि। हां, मार्च महीना मे लगभग सब किछुअपडेट भ जाइत अछि। एहि स खर्च मे अचानक उछाल नजरि अबैत अछि।

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