सोचने नहि रही पुरस्‍कार भेटत : माया नाथ

ले.क. मायानाथ झा कए हुनक पहिल पुस्‍तक ”जेकर नारी चतुर होई” लेल एहि साल क साहित्य अकादेमी क बाल साहित्य पुरस्कार देबाक घोषणा कैल गेल अछि। मधुबनी जिलाक भराम गाम क रहनिहार माया नाथ झा सेना डाक सेवा कोर स सेवानिवत्‍त भ गाम मे रहैत छथि। बाल कथा स अपन रचनाशीलता कए दुनियाक समझ अननिहार माया बाबू क एहि उपलब्धि पर इ’समाद क संपादक कुमुद सिंह आ पत्रकार आशीष झा हुनका स लंबा चर्च केलथि। प्रस्‍तुत अछि ओकर किछु अंश:-

प्र : माया बाबू सबस पहिने एहि पुरस्‍कार लेल अहां कए बधाई आ शुभकामना।
उ : धन्‍यवाद, हम अहांक इ बधाई स्‍वीकार करैत छी, मुदा एखन धरि हमरा आधिकारिक रूप स एहि संबंध मे कोनो सूचना नहि अछि। मीडिया क माध्‍यम स आइ भोर मे हमरा इ पता चलल अछि।

प्र : एहि पुस्‍तक स पूर्व सेहो कोनो रचना केने छी अहां।
उ : नहि, इ हमर पहिल किताब छी, एकर बाद जरूर हम कईटा किताब लिखलहुं अछि। एहि साल हमर किताब आयल अछि ‘ईजोत’। इ किताब सेहो हम बच्‍चा कए ध्‍यान मे राखि कए लिखने छी।

प्र : सेना क नौकरी क बाद एहि प्रकारक साहित्‍य यात्रा पर कोना निकललहुं।
उ : सेना क नौकरी त अहां जनैत छी केतबा व्‍यस्‍त आ अनुशासित होइत अछि। सेवा काल समाप्‍त हेबा स किछु दिन पहिने 2005 मे दरभंगा आयल रही। सेवा काल क बाद आगूक जिनगी क कोनो योजना ता धरि नहि बनल छल। एक दिन बच्‍चा सब कए खिस्‍सा सुनबैत रही, तखने हमर एकटा जेठ संबंधी हमरा एहि खिस्‍सा सब कए लिखबाक आइडिया देलथि। हमरा खिस्‍सा सुनैत आ खिस्‍सा कहैत सब दिन नीक लागल, मुदा सिस्‍सा लिखबाक विचार कहियो नहि केने रही। अपन संबंधी क एहि विचार कए तत्‍काल मानि हम अपन पहिल कथा संग्रह लेल सिस्‍सा लिखब शुरु केलहुं। 2006 मे जखन रिटार्यड भ गाम एलहुं त इ पुस्‍तक कए संपूर्ण केलहुं।

प्र : इ किताब लिखबा काल उम्‍मीद छल जे एकरा साहित्‍य अकादमी पुरस्‍कार भेटत।
उ : उम्‍मीद त नहि छल, मुदा जखन प्रूफ पढबा लेल एकटा मित्र कए देलहुं त ओ इ कहला जे किछु खिस्‍सा अगर आर जोडि देल जाए त इ किताब 120 पेजक भ जाएत। एहि कारण स किछु खिस्‍सा हम बाद मे लिखने रही। पुरस्‍कार भेटत से त नहि हां पुस्‍तक पुरस्‍कारक मानक जोकर जरूर लिखने रही।

प्र : किताब लिखबा मे अहांक परिवार केतबा मदद केलक।
उ : हमर परिवार क जहां धरि प्रश्‍न अछि त हमर कनिया आ खास कए हमर पुत्र अंकित हमरा हरदम मदद केलथि अछि। किताब क मुख्‍य खिस्‍सा ‘जेकर नारी चतुर होई’ कए आवरण बनेबाक विचार भेल त सबस पैघ संकट छल बग्‍गी वाला फोटो। दरभंगा मे एहन कोनो फोटो उपलब्‍ध नहि भेल। ओहि समय मे हमर पुत्र लंदन मे छलाह। ओ ओहि ठाम स फोटो मेल केलथि जे किताब क आवरण बनल।

प्र : मैथिली मे नव लेखक क भविष्‍य केहन।
उ : उत्‍तम, एहि स बेसी आर की कही, हमर पुस्‍तक कए पुरस्‍कार आब भेटल अछि मुदा जेतबा छपेने रही लगभग सबटा बिका गेल। फेर स छपेबा लेल विचार कए रहल छी। मैथिली मे पाठक कम अछि, मुदा नीक किताब लोक कीन रहल अछि। नीक लेखक सामने आबि रहल अछि। किछु नवतुरिया नीक लिख रहल छथि, ओना हमहुं त एहि दलान पर नवतुरिये छी।

प्र : एहि पुरस्‍कार क बाद हम सब अहां कए अगिला कथा संग्रह कहिया धरि पढब।
उ : हमर सतत लिख रहल छी, हिंदी, अंगरेजी आ मै‍थिली मे हमर कईटा पुस्‍तक अंकित प्रकाशन स बाजार तक पहुंच चुकल अछि। निश्चित रूप स इ पुरस्‍कार भेटला स मैथिली मे लिखबाक उत्‍साह बढत आ हमर नव रचना शीघ्र अहां सबहक हाथ मे रहत।

प्र : माया बाबू इ’समाद स गप करबा लेल बहुत बहुत धन्‍यवाद।
उ : अहूं दूनू गोटे कए बहुत बहुत आशीष।

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comments

3 टिप्पणी

  1. वाह.. ई भेल प्रत्रकारिता… ई-समादक माध्यमे पहिल बेर नीक जेना परिचित भेलहुँ माया बाबू स’. अहाँ दुनू गोटे के बहुत बहुत धन्यवाद.

  2. Bal sahitya puraskar lel maya babu de badhaai. Maithili me bal sahitya ke abhav achhi, ehi tarhak puraskar sa ar lekhak sabh bal sahitya dis unmukh hetah se hamra biswas achhi.

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