संस्कृत शिक्षा कए बढावा देबा लेल 66 लाख क दान

दरभंगा । संस्कृत शिक्षा कए बढावा देबा लेल सुलभ आंदोलनक जनक डॉ बिंदेश्वर पाठक 66 लाख टका दान करबाक घोषणा केलथि अछि। दान क पहिल खेप क रूप मे 22 लाख टका क चेक सोमदिन कामेश्वनर सिंह संस्कृघत विश्वविद्यालय क कुलपति कए सौंप देलथि । बाकी खेप पहिल खेप क उपयोग क बाद प्रदान कैल जायत । एहि दान क रकम स प्रति वर्ष एक सौ छात्र कए प्रति माह 500 टका क छात्रवृति प्रदान कैल जायत । डॉ पाठक इसमाद स कहला जे एहि छात्रवृति पर प्रतिवर्ष कुल छह लाख टका खर्च होएत। ताहि लेल हम 60 लाख टका संस्थान कए देबाक घोषणा कैल अछि । एहि मे स पहिल खेप 22 लाख टकाक चेक संस्थान कए प्रदान क देल, जाहि मे स 20 लाख बैंक मे फिक्स भ जाएत आ 2 लाख छात्रवृतिक रूप मे पहिल खेप वितरित होएत । एहिना 66 लाख टकाक सूद करीब 6 लाख टका होएत जाहि स प्रति वर्ष इ छात्रवृति प्रदान कैल जाएत । डॉ पाठक कहला जे मिथिला संस्कृत शिक्षाक केंद्र रहल अछि । आइ एहि ठामक युवा एहि विषय स विमुख भ रहल छथि । संस्कृत क रक्षा लेल महाराजा कामेश्विर सिंह एहि संस्थाक स्थापना केने छथि, एहन मे हमर सबहक कर्तब्य बनैत अछि जे संस्कृत शिक्षा कए प्रोत्साहन देबा लेल किछु न किछु योगदान दी । हमरा जखन एहि गपक भान भेल जे एहि संस्था न मे छात्र क संख्या लगातार कम भ रहल अछि आ छात्रवृति क घोर अभाव अछि त एक पंथ दू काज क करैत विभिन्न विषयक 100 गोट छात्र कए प्रति मास 500 टकाक छात्रवृति प्रदान करबाक फैसला लेलहुं अछि। उम्मीद करैत छी एहि स किछु ने किछु संस्कृत शिक्षा क प्रति हम अपन दायित्व  क निर्वाह क सकब । उल्लेखनीय अछि जे दरभंगा स्थित कामेश्वर सिंह संस्कृ्त विश्वविद्यालय देश क पहिल दान प्रदत्तव विश्वविद्यालय छी। महाराजा कामेश्वर सिंह 1962 मे इ विश्वविद्यालय बिहार सरकार कए दान केने छथि। डॉ पाठक एहि संस्थान कए किछु दान केनिहार दोसर व्यक्ति भ गेलाह अछि । पिछला 50 साल मे कामेश्वर सिंह क बाद एहि संस्था‍न कए कियो किछु दान नहि केने छल । उम्मीद कैल जा सकैत अछि जे डॉ पाठकक एहि दान क सदुपयोग होएत ।

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1 टिप्पणी

  1. संस्कृत शिझा के बढ़ावा देने बिना भारतक संस्कृति अझुण नहि रहि सकैत अछि . एतेक बृहत भाषा धर्मनिर्पेझता क भेंट भ रहल अछि . धर्म ,विज्ञानं ,चिकिस्ता ,दर्शन , मीमांसा , न्याय ,युद्ध ,कोनो एहन विधा नहि जाहिमे एकर योग्यदान के नाकारल जा सकैत अछि . मिथिला त एकर प्रमुख झेत्र रहल अछि .कामेश्वर सिंह क बाद डा . पाठक सन सपूत के पैब हम सब कृतार्ध भेलोइंह .समाद लेल धन्यबाद .

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