शुष्क शौचालय क कलंक स मुक्ति नहि

पटना। इ अजीब संयोग अछि, जाहि मामला मे प्रदेश प्रथम साबित भेल, ओहि मामला मे फिसड्डी भ गेल। गप भ रहल अछि केन्द्र प्रायोजित समेकित अल्प लागत स्वच्छता अभियान (आईएलसीएस) क। एहि योजना क तहत शहरी इलाका मे शुष्क शौचालय कए जलवाही शौचालय मे बदलबाक छल। जाहि ठाम शौचालय नहि अछि ओतहि शौचालय क निर्माण कराउल जेबाक छल। दस हजार टका क दर पर बनेवाला शौचालय क लेल 75 फीसदी केन्द्रीय मदद क प्रावधान अछि। बिहार एहि मामला मे अव्वल रहल जे पायलट प्रोजेक्ट क तहत ओ पटना जिला क चारिटा नगर निकाय क लेल 10 करोड़ क योजना बनाकए भारत सरकार स मंजूरी ल लेलक। टका सेहो भेटि गेल। मुदा दोसर पक्ष इ रहल जे पिछला साल जून महीना मे नगर विकास एवं आवास विभाग क तत्कालीन मंत्री भोला सिंह एलान केलथि जे प्रदेश कए शुष्क शौचालय क कलंक स मुक्त कराउल जाइत। गांधी जयंती यानी 2 अक्टूबर, 2009 तक एकर उन्मूलन भ जाइत। एकर बाद एकोटा शुष्क शौचालय प्रदेश मे नहि रहत। निराशाजनक पक्ष इ अछि जे भोला बाबू बिहारक भोला-भाला जनता कए बेवकूफ बनेबाक काज मे लागल रहलथि आ एखन धरि पूरा बिहार त दूर एकटा निकाय तक एकरा स पूर्णत: मुक्त नहि भ सकल अछि।
प्रथम चरण मे पटना जिला मे चारिटा निकाय (दानापुर, फुलवारी, खगौल आ मनेर) क लेल स्वीकृत 9808 शौचालय मे स मात्र 701 क एखन धरि पूरा निर्माण भ सकल अछि। हालांकि नगर विकास क प्रभार लेलाक बाद उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी एहि दिशा मे पहल केलथिअछि। मोदीक कहबा अछि जे करीब 90 हजार शौचालय क निर्माण क प्रस्ताव कए मंजूरी भेटल अछि। चंद औपचारिकता क बाद चरणबद्ध तरीका स निर्माण क काज प्रारंभ भ जाइत। एकरा लेल पूरा राज्य मे सबटा स्थानीय शहरी निकाय स एहि प्रमाण पत्र लेल जाइगा जे हुनकर क्षेत्र मे शुष्क शौचालय नहि अछि।
ज्ञात हुए जे सुलभ आंदोलनक जन्म भेलाक बाद प्रदेश मे माथ पर मैला ढोबाक प्रथा संज्ञेय अपराध बनि चुकल अछि आ शुष्क शौचालय एहि स जुड़ल अछि। उच्चतम न्यायालय एहि मामला क मानीटरिंग सेहो करि रहल अछि। विडंबना इ अछि जे एहि सिलसिला मे किछु वर्ष पूर्व राज्य क सबटा नगर निकाय क कार्यपालक पदाधिकारी प्रतिशपथ पत्र दाखिल करि चुकल छथि जे हुनकर निकाय मे एकोटा कमाऊ शौचालय नहि अछि। एहन मे सर्वोच्च न्यायालय अगर नजर टेढ़ केलक त शपथ पत्र दाखिल करैवाला तत्कालीन अधिकारी क खाट ठार भ सकैत अछि। किया कि अनेक निकाय क ताजा सर्वेक्षण स साफ भ गेल अछि जे ओहि ठाम भारी संख्या मे कमाऊ शौचालय अछि, जेकरा जलवाही शौचालय मे बदलबाक योजना अछि।

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