शुरुआती झटका स पछुआ गेल मैथिली फिल्म : कमलनाथ

मैथिली फिल्‍म क 50 साल पूरा भ रहल अछि। मैथिली फिल्‍म बनायब एखनो शिवक धनुष उठाएब जेकां अछि। पहिल फिल्‍म स एखन धरि मैथिली फिल्‍म संसार अपना कए स्‍थापित करबा मे लागल अछि। मैथिली फिल्‍म इतिहास आ एकर वर्तमान पर पहिल मैथिली फिल्‍मक खलनायक आ पूर्व विधान पार्षद कमलनाथ सिंह ठाकुर स इसमाद लेल गप केलथि अछि वंदना झा आ रमण दत्‍त ।प्रस्‍तुत अछि ओहि गपशपक किछु खास अंश।

किछु लोक क कहब अछि जे मैथिली फिल्‍म बनब त 1964 मे शुरू भेल।
उत्‍तर – देखू, फिल्‍म बनब की ओकरा कहल जाइत अछि जहिया कैमरा आन भेल, या फेर फिल्‍म ओहि दिन स बनि रहल अछि जहिया एकरा लेल काज शुरू भेल। निश्चित रूप स 1964 मे जखन पहिल बेर कैमरा चालू भेल छल ओहि स पहिने फिल्‍म क अधिकतर गीत रिकार्ड भ चुकल छल। ताहि लेल फिल्‍म क काज त 1962 शुरू छल।

कोना आयल एकर निर्माण क योजना।
उत्‍तर – एहि फिल्‍म क निर्माता छलाह मदन मोहन दास। दास जी बहुत दिन स मैथिली फिल्‍म बनेबाक सोचि रहल छलाह। एहि दौरान 1962 मे परमानंद चौधरी स राजनगर मे हुनक भेंट भेल। दूनू क बीच समझौता भेल आ फिल्‍म बनेबाक योजना कए अंतिम रूप देल गेल। कहानी आ पटकथा गीत लिखबाक भार रविंद्र ठाकुर देल गेल। कहानी आ पटकथा मे हम हुनकर संग रही। संगीतकार लेल श्‍यामा शर्मा स गप कैल गेल। ओ एचएमवी कंपनी लेल काज करैत छलाह आ गायक महेंद्र कपूर क मित्र छलाह।

परमानंद चौधरी कए एहि स पूर्व कोनो फिल्‍म बनेबाक अनुभव छल।
उत्‍तर – सी परमानन्द बहुत काबिल निर्देशक छलाह। ओ आओर राजेंद्र कुमार दूनू गोटे विख्यात निर्देशक एसएन
त्रिपाठी क संग सहायक निर्देशक क रूप मे काज करैत छलाह। राजेंद्र कुमार बाद मे हीरो भ गेला आ सी परमानन्द निर्देशन मे संघर्ष करैत रहलाह। ओहि जमाना मे सहायक निर्देशक कए बहुत कम टका भेटैत छल। गुजारा लेल ओ एकटा गुजराती क बच्‍चा कए पढबैत छलाह। ओ गुजराती परमानंद क पहिल फिल्‍म क निर्माता बनल। ओहि जमाना मे फिल्म 2 लाख मे बनैत छल। घर घर दीप जले नामक एहि फिल्‍म मे पहिल बेर धर्मेंद्र कए हीरो आओर कामिनी कदम कए हिरोइन क रूप मे मौका देल गेल छल, मुदा परमानंद कए निर्माता स झंझट भ गेल आ फिल्‍म एक रील पहिने बंद भ गेल। बाद मे धर्मेन्द्र क दोसर फिल्म हिट क गेल आओर कामिनी कमल तलाक फ़िल्म मे चमैक गेलीह।

इ फिल्‍म बनल बा नहि।
उत्‍तर – कोशिश बहुत भेल, एक दिन हम सब मुंबई मे पैदल जाइत रही तखने बगल में एकता इम्पल्ला रुकल ओहि मे धर्मेन्द्र छलाह। ओ हमरा सबकए डेरा जे बांद्रा मे छल छोडबाक आग्रह केलथि। ओ परमानन्द स कहलथि जे गुरुजी हमर पहिल फिल्म अहिंक संग छल। अहि हमरा मौका देलहुं। जेना पहिल बच्‍चा होइत अछि तहिना हमरा लेल ओ फिल्‍म अछि। हम अहां फिल्म मे निःशुल्क काज करबा लेल तैयार छी। मात्र एक शूट फिल्‍मक बाकी अछि ओ पूरा करि लेल जाए। मुदा निर्माता तैयार नहि भेल।

परमानंद जी एकर बाद मैथिली क योजना तैयार केलथि।
उत्‍तर – नहीं, गोनू झा नाम स फिल्म शुरू भेल। संयोग एहन जे ओ सेहो पूरा नहि भेल। ममता गाबय गीत शरू भेल त ओकरो इ बीमारी लागल। सच कहू त परमानंद जी आ मैथिली दूनू क भाग्‍य एक रंग रहल। दूनू मे क्षमता रहैत धन क अभाव देखल गेल।

1962 स 1964 तक कौन कौन काज भेल।
उत्‍तर – एहि दौरान मुख्‍य रूप स कहानी, पटकथा, संवाद आ गीत संगीत पर काज भेल। कलाकारक चयन आ तकनीकी टीम बनेबा क काज एहि दौरान भेल। 1963 मे एहि फिल्‍म अधिकतर गीत रिकार्ड भ गेल छल। श्‍यामा शर्मा क संगीत एतबा मधुर छल जे आइ धरि लोक ओकरा सुनबा लेल तैयार अछि। महेंद्र कपूर त गेबा लेल एक टका नहि लेने छलाह।

जखन एतबा तेजी स काज भ रहल छल त फेर ठमकल कोना।
उत्‍तर – एहि फिल्‍म कए झटका 1964 मे तखन लागल जखन शुटिंग क दौरान एकटा सडक दुर्घटना मे कईटा कलाकार घायल भ गेलाह। एहि हादसा क बाद शुटिंग बंद करि देल गेल आ पूरा यूनिट बॉम्‍बे चल गेल। इ फैसला एहन रहल जे फिल्‍म क बजट आ भविष्‍य दूनू कए गडबडा देलक। 1965 मे जखन फिल्‍म फेर स शुरू भेल त बढल बजट लेल मदन मोहन दास तैयार नहि भेलाह आ फिल्‍म लटकी गेल। अगर ओहि समय मे परमानंद चौधरी आ मदन मोहन दास मे झंझट नहि भेल रहिते त इ फिल्‍म ओहि साल प्रदर्शित भ गेल रहिते। मुदा एहन नहि भ सकल आ कन्‍यादान प्रदर्शित भ गेल।

कन्‍यादान किया नहि चलल।
उत्‍तर – कन्‍यादान संग संवाद क दिक्‍कत छल। कन्‍यादानक संवाद मैथिली आ हिंदी मे छल। लोक एकरा स्‍वीकार नहि केलक। मैथिली फिल्‍म संग इ बडका दिक्‍कत रहल जे ढंग स फिल्‍म बनबे नहि कैल अछि।

एहि फिल्‍म क नाम ममता गाबै गीत कोना भ गेल।
उत्‍तर – 1962 मे जखन फिल्‍म निर्माण फैसला भेल छल तखन एकर नाम परमानंद चौधरी नैहर भेल मोर सासुर रखने छलाह। तखने बहुत लोक हुनकर एहि फैसला पर सवाल उठेने छल जे मैथिलीक पहिल फिल्‍म छी आ इ नाम नकारात्‍मक अछि आ मिथिलाक संस्‍कृतिक खिलाफ सेहो अछि। फिल्‍म निर्माणक दौरान हिंदी फिल्‍म ‘’गीत गाया पत्‍थरों ने’’ प्रदर्शित भेल। एहि फिल्‍म क नाम हमरा बड नीक लागल आ एहि स प्रेरित भ हम परमानंद जी लग फिल्‍म क नवका नाम ममता गाबै गीत रखबाक प्रस्‍ताव राखल जे मानि लेल गेल।

पिछला 50 साल मे मैथिली फिल्‍म निर्माण मे किया शिथिलता रहल।
उत्‍तर – फिल्‍म कोना बनत। के देखत। समस्‍या बहुत अछि। जे समाज ढंग स पत्रिका नहि चला सकल ओ फिल्‍म कोना चला सकैत अछि। मैथिली जे जनैत अछि ओ हिंदी सेहो जनैत अछि। एहन मे ओकरा लग विकल्‍प क अभाव नहि अछि। मैथिलीक फिल्‍म क विषय सेहो पारिवारिक रखबाक मजबूरी अछि। आन विषय मैथिली मे चलबे नहि करत। एखन जे समय अछि ओहि मे पारिवारिक फिल्‍म हिंदी मे सेहो कम बनि रहल अछि।

मुदा भोजपुरी त खूब हिट अछि।
उत्‍तर – भोजपुरी क मामला हिंदी स ठीक उलटा अछि। सच कहू त भोजपुरी क बाजार त गंगा-जमुना बना देलक। ओ फिल्‍म कहबा लेल हिंदी अछि मुदा पूरा हिंदी दर्शक कए भोजपुरी स परिचित करा देलक। आइ भोजपुरी बुझबा मे हिंदी क दर्शक कए कठिनाई नहि होइत अछि, मुदा मैथिली हुनका बुझबा मे नहि अबैत अछि, जखन कि मैथिली दर्शक कए हिंदी सेहो बुझबा मे अबैत अछि ताहि लेल भोजपुरी आ मैथिली मे कोनो तुलना आब नहि भ सकैत अछि।

अहां मैथिली क अलावा दोसर भाषाक फिल्‍म मे सेहो काज केलहुं।
उत्‍तर – हम एकता भोजपुरी फिल्म लेल सेहो ओडिशन देने रही। हमरा भोजपुरी बजैत देख कए निर्देशक कहलक जे अहां मैथिल भ कए कोना एतेक सुंदर भोजपुरी बाजि लैत छी। खैर 70 क दशक मे हम राजनीति मे सक्रिय भ गेलहुं आ एहि दुनिया स कटल रहलहुं। ओना ममता गाबै गीत कए पूरा करबा प्रदर्शित करेबा मे रविंद जी आ महेन्द्र जी कए जहां धरि भ सकल मदद कैल। ममता गाबै गीत क पटनाक वीणा मे लागल छल। अगर ओ फिल्‍म समय पर प्रदर्शित भ जइते त जरूर हिट होइते, मुदा जखन हॉल मे लागल तखन तक बहुत किछु बदलि गेल छल। तखनो फिल्‍म अपन लागत निकाली लेने छल। किया कि तकनीकि टीम छोडि अधिकतर लोक बिना टका कए एहि मे काज केने छल।

ममता गाबै गीत मे अहां एकटा अहम रोल केने छी, मैथिलीक कोनो आन फिल्‍म मे अहां नहि देखेलहुं।
उत्‍तर – कियो संपर्क नहि केलथि। दोसर जे हम राजनीति मे एलाक बाद एहि क्षेत्र मे सक्रिय नहि रहलहुं।

मैथिली फिल्‍म हाल मे किछु बनल अछि, अहां कोनो देखलहुं अछि।
उत्‍तर – ममता गाबै गीत क अलावा सस्‍ता जिनगी महग सेनूर देखने छी। बाकी फिल्‍म देखबाक मौका नहि भेटल। पटना मे मैथिली फिल्‍म लगैत नहि अछि।

मैथिली फिल्‍म कए त मधुबनी मे सेहो हॉल नहि भेटैत छैक।
उत्‍तर – देखू, जखन निर्वाध गति स फिल्‍म निर्माण नहि होएत त इ समस्‍या रहबे करत। दोसर जे जा धरि नीक फिल्‍म नहि बनत, वितरक आ हॉल मालिक कए फायदा लायक नहि लागत ता धरि इ समस्‍या ढार रहत। केवल मैथिलीक नाम पर अहां कए हॉल नहि भेट सकैत अछि। मैथिली फिल्‍म कए अपन स्‍तर स इ साबित करबाक अछि जे ओ दर्शक कए हॉल तक आनि सकैत अछि। वितरक मे इ विश्‍वास एखनो स्‍थापित नहि भ सकल अछि।

सरकार सेहो मैथिली कए मदद नहि क रहल अछि। कर मे छूट तक नहि भेटैत अछि।
उत्‍तर – एहन गप नहि अछि। मैथिली सरकार स मदद मंगबा लेल गेल अहां अछि। सरकार लग एहन कोनो कानून नहि अछि, जे कर मे छूट देल जाएत, मुदा बिहार मे शुटिंग, एहि ठामक लोक कए रोजगार आ पर्यटनक कए बढाबा सन मामला ल कए अगर कियो सरकार स मदद चाहता त जरूर भेटत। कर मे छूट त नहि मुदा फिल्‍म बनेनिहार आन आन मद मे कर छूट पाबि सकैत छथि, मुदा ओकरा लेल प्रयास करबाक जरूरत अछि जे मैथिली मे एखनो नहि भ रहल अछि।

इ विश्‍वास कोना आ कहिया आउत।
उत्‍तर – फिल्म बन‍ि रहल अछि मुदा एखनो निर्माता कए निर्देशक पर भरोस स्‍थापित नहि भ सकल अछि। जाधरि निर्माता कए अपन निर्देशक पर भरोस नहि होएत ता धरि नीक फिल्‍म नहि बनि सकैत अछि। अधिकतर मामला मे देखल गेल अछि जे टका लगेनिहार फिल्‍म क अंतिम रील मे अपन हाथ खींच लैत छथि। एहन मे निर्देशक लेल ओकरा दर्शक तक पहुंचायब मुख्‍य मसला भ जाइत अछि। ताहि लेल आन काज जे बहुत पहिने भ जेबाक चाहैत छल आइ धरि नहि भ सकल अछि।

त की मैथिली फिल्‍म एहिना रहत।
उत्‍तर – नहि, शुरुआत मे मैथिलि फिल्म क निर्माण मे लागल झटका स मैथिलि फिल्म पछुआ गेल, मुदा आब ओ गप नहि अछि। नीक आ युवा निर्देशक सब सामने आबि रहल छथि। तकनीक सेहो बेहतर भ गेल अछि। हमर शुभकामना अछि जे मैथिली फिल्म खूब आगू बढे।

इसमाद स गप करबा लेल धन्‍यवाद।
उत्‍तर – अहां सब सेहो नीक काज क रहल छी। धन्‍यवाद।

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2 टिप्पणी

  1. आइयो जखनि लोक मैथिली फिल्म ममता गाबए गीत देखैत अछि ओहि आदरणीय कमलनाथजी अभिनयक प्रशंसा करैत अछि आ दुःख होइत छैक जे जखनि एहन कलाकार राजनीतिमे आबि जाइछ। मुदा ई तँ समयक गप्प छियैक। यदि आदरणीय कमलनाथजी चाहथि तँ पुनः मैथिलीक अपन हेरायल बाट भेंट जेतैक कारण मैथिलीकेँ चाहि एकटा अदम्य योग्य पुरूष जे हुनकर भीतर जीबि रहल अछि। आशा नहि पूर्ण विश्वास अछि मिथिलाक युवाकेँ ओ अपन चिंतन सँ एकटा नव बाट देखयबाक प्रयास करताह। हुनका सुस्वास्थय कामना करैत , एतेक पैघ जानकारीक लेल धन्यवाद।

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