शाही नहि आब जैव लीची कहियउ महाराज

मुजफ्फ़रपुर। मुजफ्फरपुर क लीची एकटा आओर मुकाम हासिल केलक अछि। आब इ देश मे पहिल जैव उत्‍पाद बनि गेल अछि। इंटरनेशनल पाइनेसिया लिमिटेड (आइपीएल) एहि पर मुहर लगा देलक अछि। सरकार सेहो एहि ठामक लीची कए जैव उत्पाद घोषित केने अछि। एहि उपलब्धि क बाद आब एहि ठामक लीची क पैकिंग थर्मोकोल क बक्‍सा मे कैल जाएत, जाहि पर ‘जैविक’ लिखल रहत। मुजफ्फ़रपुर क लीची अपन गुणवत्ता क कारण केमिकल उत्पाद क बदला मे जैव उत्पाद बनि कए अंतरराष्ट्रीय मार्केट मे उभरल अछि।

दिल्ली, मुंबई, पुणे, हैदराबाद, हरियाणा आ लखनऊ क संग आब एहि ठामक लीची अंतरराष्ट्रीय मार्केट मे सीधा जा सकत। इ काज आइपीएल आ उद्यान निदेशालय करत। अंतरराष्ट्रीय बाजार क आधार पर मुजफ्फ़रपुर क लीची क दाम तय होएत। अनुमान अछि जे जैविक गुण क कारण लीची क दाम मे पांच गुना तक वृद्धि भ सकैत अछि। यूएनओ सेहो मुजफ्फरपुर क जैविक लीची कए प्रोत्साहन द रहल अछि। संगठन क सलाहकार डॉ विक्टर गैलन कए भारत पठा एकर जायजा लेल गेल छल। डॉ गैलन कहने छलाह जे अंतरराष्ट्रीय बाजार मे जैविक लीची क काफ़ी मांग अछि। आपूर्ति नहि हेबाक कारण लोक दोसर किस्म क लीची कीनैत छथि। जैविक श्रेणी मे मुजफ्फ़रपुर क लीची फ़िट बैसैत अछि।

आइपीएल, दिल्ली क तकनीकी निदेशक, प्रोजेक्ट डॉ डी के मिश्रा क कहब अछि जे लीची क पैकिंग एखन धरि कूट आ लकड़ी क डिब्‍बा मे होइत छल मुदा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता क बाद एकर पैकिंग क विधि सेहो बदलि जाएत। जे लीची देश क बाहर जाएत ओकरा थर्मोकोल क डिब्‍बा मे पैक कैल जाएत। डिब्‍बा पर स्पष्ट रूप स जैविक उत्पात क टैग लागल रहत।

जिला कृषि पदाधिकारी विजय कुमार कहला जे मुजफ्फरपुर क कांटी, मोतीपुर आ मीनापुर मे लीची क खेती जैविक विधि स कैल जा रहल अछि। एकर अलावा मुशहरी, बोचहां, गायघाट, कुढ़नी आदि प्रखंड मे खेती भ रहल अछि। कुल मिला कए 79 गामक 2100 किसान 1260 हेक्टेयर मे लीची क जैविक खेती करि रहल छथि। एकर उत्पादन अंतरराष्ट्रीय स्तर जैविक मानक कए पूरा करि रहल अछि। ज्ञात हुए जे बिहार क अलावा पंजाब, हरियाणा, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, झारखंड, असम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश आ ओड़िशा मे सेहो लीची क खेती होइत अछि।एहि सालक मौसम लीची क अनुकूल रहल। एहि स लीची क सेल्फ लाइफ बढ़ि‍ गेल अछि।

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