वैश्विकग्राम मे बदलि गेल दुनिया, संस्कृत साहित्य लेल समस्त पृथ्वी परिवार : कुलाधिपति

कामेश्वर नगर लिखलक इतिहास, एक दिन मे दू ठाम दीक्षांत
एलएमएनयू मे छठम त केएसडीएसयू में पांचम दीक्षांत समारोह संपन्न
ज्योति श्रीवास्तव/सावित्री कुमारी 
LNMU Dikshantदरभंगा । कामेश्वर नगर बुधदिन इतिहास लिख देलक। एकहि परिसर मे एकहि दिन राज्यपाल सह कुलाधिपति रामनाथ कोविंद दोटा विश्व विद्यालयक छात्र कए दीक्षांत आशिर्वाद देलथि। एहि अवरसर पर ललितनारायण मिथिला विश्व विद्यालय मे केंद्र सरकार क नव शिक्षा नीति क अध्यक्ष प्रो जगमोहन सिंह राजपूत दीक्षांत भाषण देलथि त कामेश्चर सिंह संस्कृत विश्व विद्यालय मे सम्पूर्णानन्द संस्कृत विवि, वाराणसी क पूर्व कुलपति प्रो0 अभिराज राजेन्द्र मिश्र दीक्षांत भाषण देलथि।
देश क कईटा शहर मे अनेक विश्वविद्यालय अछि मुदा वार्षिक दीक्षांत समारोह एक संग सब विश्वविद्यालय मे हो, एहन प्राय: नहि होइत अछि। दरभंगा मे सेहो एहि स पूर्व ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय मे पांचटा आ कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय मे चारिटा दीक्षांत समारोह भेल अछि। मुदा एकहि दिन दूनू ठाम दीक्षांत समारोह क आयोजन पहिल बेर भेल। इ रिकार्ड दूनू विश्वविद्यालय एक राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा मे आनि देलक अछि। एकहि परिसर मे दूटा विश्वविद्यालय आब पटना मे सेहो अछि, मुदा देश मे इ पहिल परिसर अछि। दरभंगा महाराज डा कामेश्वर सिंह क सदाशयता आ हुनकर अनन्य शिक्षा प्रेम क परिणाम अछि जे एक किलोमीटर क विशाल परिधि मे दूनू विश्वविद्यालय अछि।
बुधदिन कुलाधिपति सह राज्यपाल करीब पांच घंटे क दरभंगा प्रवास क दौरान दूनू विश्वविद्यालयों मे आयोजित दीक्षांत समारोह क साक्षी बनलाह। ओ विश्वविद्यालय दिस स कैल जा रहल कार्य क सराहना करैत लोकोपयोगी आ युगानुकूल बच्चा कए प्रशिक्षित करबाक आह्वान केलथि।
कामेश्वरसिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविधालय मे आयोजित पञ्चम वार्षिक दीक्षान्त समारोह 2016 कए संबोधित करैत कोविन्द कहला जे संस्कृत शिक्षा आइ सेहो प्रासंगिक अछि एहि मे स्वरोजगार क संभावना व्याप्त अछि। आवश्यक्ता अछि संस्कृत शिक्षा कए सरल, सुबोध आ सर्वजन संवेद्य बनेबाक। ओ कहला जे हिन्दी, अंग्रेजी आ अन्य क्षेत्रीय भाषा क माध्यम स एकरा लिपिबद्ध कैल जाये, ताकि एकर महत्वपूर्ण तथ्य स जन मानस परिचित भ सकए। ओ कहला जे इ तकनीकि तथ्य अछि जे संस्कृत भाषा कम्प्यूटर क सुविधा क दृष्टि स सेहो अत्यंत वैज्ञानिक आ उपयोगी पाउल गेल अछि। हमर भारतीय संस्कृति क संपूर्ण जीवन क प्रतिनिधत्व करनिहारि संस्कृत भाषा विश्व क सर्वाधिक संपन्न भाषा अछि। विश्व क ज्ञान आ विज्ञान स संपूर्ण विषय संस्कृत-साहित्य मे समाहित अछि। संस्कृत साहित्य समस्त पृथ्वी कए परिवार मानलक अछि। इतिहास साक्षी अछि जे चारित्रिक शिक्षा आ शांति लेल समस्त विश्व, भारत दिस देखैत रहल अछि।
कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविधालय के कुलपति डॉ0 देव नारायण झा कहला जे 1556 ई0 मे मुगल शासक अकबर स दान स्वरूप प्राप्त भेल एहि भूमि पर महाराजाधिराज कामेश्वर सिंह संस्कृत विद्या कए संरक्षण आ संबर्धन लेल जमीन आ भवन दान देलथि। तत्कालीन राज्यपाल डॉ0 जाकिर हुसैन आ मुख्यमंत्री श्रीकृष्ण सिंह 30/03/1960 कए एहि दान कए स्वीकार केलथि आ एहि विवि क स्थापना भेल। इ विवि प्राच्य विद्या क क्षेत्र मे विस्तृत काज केलक अछि। नौटा छात्र कए कुलाधिपति स्वर्ण पदक प्रदान केलथि। जाहि मे विनित कुमार झा, रमेश कुमार, कुमार गौरव, राजीव कुमार रंजन, कृष्णानंद झा, पिन्टू कुमारी, गोविन्द झा, कुन्दन कुमार शामिल छथि। कार्यक्रम क प्रारंभ मे कुलाधिपति सहित मंचस्थ अतिथि सब महाराजा डॉ0 कामेश्वर सिंह क तैल चित्र पर माल्यार्पण केलथि।
एहि स पूर्व ललित नाराययण मिथिला विश्वविधालय मे आयोजित दीक्षांत समारोह मे अध्यक्षीय संबोधन मे कुलाधिपति रामनाथ कोविन्द कहला जे संस्कृति आ परम्परा स प्राप्त ज्ञान आ प्रज्ञा कए पुन: प्रतिष्ठापित करब हमर सबहक दायित्व अछि। हम सब तकनीकि विकास क दौड़ स गुजरि रहल छी। पूरा दुनिया वैश्विक ग्राम मे बदलि चुकल अछि। जरूरत एहि गप क अछि जे हमरा सब कए निश्चित रूप स तकनीकि दक्षता विकसित करबाक चाहि। संगहि परस्पर सूचना क अदान-प्रदान सेहो।  आइ औद्योगिक समाज मे सूचना महत्वपूर्ण बनि गेल अछि। एहन मे हमरा सब कए ध्यान देबाक अछि जे कहीं हमर प्रज्ञा आ ज्ञान सूचना क अम्बार हेरा नहि जाये।
मिथिला क प्राचीन इतिहास क चर्च करैत कुलाधिपति कहला जे इ भूमि आदि काल स दार्शनिक, संत आ विद्ववान क कर्म भूमि रहल अछि। पिछला 45 साल मे इ विवि सर्वतोमुखी विकास केलक अछि। महिला प्रौद्योगिकी संस्थान क स्थापना विश्वविधालय लेल उपलब्धि अछि। आधुनिक्तावाद क एहि युग मे विश्वविधालय आ कॉलेज क कामकाज क कम्प्यूट्रीकरण आवश्यक अछि। ई-लाईब्रेरी आ ई-लनिंज़्ग समय क मांग अछि। ओ अपन संबोधन मे पारम्परिक शिक्षा प्रणाली क परिध स आगू व्यावसायिक शिक्षा पर सेहो बल देबा पर जोर देलथि।
राज्य क भूमि सुधार आ राजस्व मंत्री डॉ0 मदन मोहन झा कहला जे एहि संस्थानक शिक्षा क क्षेत्र योगदान बहुत सराहनीय रहल अछि। कुलपति डॉ0 साकेत कुशवाहा प्रतिवेदन पेश करैैत कहला जे विवि क विशिष्ट पहचान कायम करबाक दिशा मे प्रशासन प्रयत्नशील अछि। विभिन्न व्यावसायिक पाठ्क्रम क गुणवत्ता कए स्तरीय बनेबाक प्रयास जारी अछि। एहि अवसर पर ओ दरभंगा महाराज क शिक्षा प्रेम क सेहो चर्चा केलथि। संगहि नैक ग्रेडेशन आ सूचना क अधिकार मे भेटल प्रमाण पत्र क सेहो जिक्र केलथि। ओ कहला जे जे बिहार आ झारखंड मे केवल लनामिविवि कए इ पुरस्कार भेटल अछि।
एहि अवसर पर कुलाधिपति क हाथ स 23गोट छात्र-छात्रा कए गोल्ड मेडल स पुरस्कृत कैल गेल। जाहि मे बॉयोटेक्नोलॉजी क ट्विंकल, रसायन शास्त्र क आनंद मोहन झा, गणित क हंस के सरी गुडकेस, फि जिक्स क नवीन कुमार सिंह, जूलोजी क चित्रा भारद्वाज, अंगरेजी क शालिनी चौधरी, हिंदी क आरके कॉलेज मधुबनी क अमित कुमार,एहि कॉलेज स मैथिली क गोपाल कुमार, पीजी म्युजिक क मुकुल आनंद, फिलॉसाफी क मनीष कुमार रस्तोगी, संस्कृत क ज्योत्सना कुमारी, उर्दू क रिफत जहां, अर्थशास्त्र क दीपक कुमार राय आ अंकिता कुमारी, भूगोल क ईशा झा, इतिहास क अनुराधा कुमारी, गृह विज्ञान क दिलीप कु मार ठाकुर, राजनीति विज्ञान क आरबी कॉलेज दलसिंहसराय क विवेक कुमार चौधरी, मनोविज्ञान क समस्तीपुर कॉलेज समस्तीपुर क अमित कुमार, समाज शास्त्र क फातमा नुजहत, एमबीए क त्रिलोक कुमार, एमएड क मो. शमीम हैदर आ रसायन शास्त्र क आनंद मोहन झा शामिल छथि। बॉटनी क सीएम साइंस कॉलेज क सुप्रिया आ कॉमर्स क जीडी कॉलेज बेगूसराय क श्रृष्टि अनुपस्थित छलीह।

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