विश्व बैंक बिहार कए देलक 22 करोड़ डॉलर

पटना । विश्व बैंक बिहार मे वर्ष 2008 मे कोशी मे आयल विनाशकारी बाढ़ प्रभावित इलाक क पुनर्निमाण क लेल 22 करोड़ डॉलर क ऋण (क्रेडिट) कए अपन स्वीकृति प्रदान करि देलक अछि।
बिहार सरकार कोशी बाढ़ रिकवरी परियोजना लगभग एक लाख मकान, 90 हजार पुल आ 290 किलोमीटर ग्रामीण सड़क क पुनर्निमाण क जरिये बाढ़ क दुष्परिणाम स उबरबाक लेल वित्त मुहैया कराउत।
एहि परियोजना क उद्देश्य आकस्मिकता निधि क व्यवस्था क जरिये बाढ़ प्रबंधन क्षमता कए मजबूत बनाकए आजीविका कए बहाल करब आ बिहार क आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमता मे सुधार करैत भावी जोखिम कए कम करब अछि। उक्त ऋण विश्व बैंक क ऋण मुहैया करेनिहार सहायक संस्था इंटरनेशनल डेवलपमेंट एसोसिएशन (आईडीए) द्वारा उपलब्ध कराउज जाएत, जे ब्याज मुक्त ऋण मुहैया करौत।
एहि ऋण क भुगतान दस वर्षों क ग्रेस अवधि क बाद 35 साल मे कैल जाएत। वर्ष 2008 मे आयल बाढ़ स बिहार क पांच जिला मे लगभग 33 लाख लोक प्रभावित भेल छथि। लगभग दस लाख लोक कए सुरक्षित स्थान पर ल पहुंचैल गेल छल।
भारत मे विश्व बैंक क कंट्री डायरेक्टर रोबर्टाे जाघा कहला जे विश्व बैंक आपदा पर कारगर प्रतिक्रिया व्यक्त करबा मे भारत सरकार क पिछला एक दशक स बेसी समय स बदद करि रहल अछि। हम पिछला साल क अपन अनुभव कए बिहार मे कैल जा रहल प्रयास मे इस्तेमाल करब।
विश्व बैंक कए दिसम्बर, 2009 मे सहायता क लेल आधिकारिक अनुरोध भेटल आ बैक एहि पर आपातकालिक कार्यप्रणाली क तहत विचार केलक अछि। विश्व बैंक क परियोजना कार्य प्रबंधक मंदाकिनी कॉल कहलथि जे बिहार सरकार क लेल मकान आ बुनियादी ढांचा क पुनर्निर्माण आ लोक क रोजी-रोटी क व्यवस्था करब बेहद जरूरी अछि।
हमर उद्देश्य सम्भावित भावी आपदा पर प्रतिक्रिया व्यक्त करबाक स्थानीय क्षमता क गठन करब अछि। प्रस्तावित परियोजना क पहिल चरण मे जोखिम आ एकर सम्भावना मे कमी करबा लेल बिहार सरकार क संग मिलकए अनेक क्षेत्र मे पैघ पैमाना पर काज करब शामिल अछि। अगिला चरण मे राज्य क आपदा प्रबंधन स सम्बन्धित दीर्घकालिक आवश्यकता कए पूरा करबा लेल सहायता क अधिक विस्तृत कार्यक्रम पर अमल कैल जाएत, जाहि स बाढ़ प्रबंधन कनेक्टिविटी आ कृषि उत्पादकता सेहो शामिल हाएत।

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1 टिप्पणी

  1. इस कर्ज की कोई जरूरत ही नहीं थी ,क्योकि बिहार में बाढ़,नियंत्रण और आपदा प्रबंधन भ्रष्टाचार का खेल भर है और ये पैसा भी उसी भ्रष्टाचार के खेल में बह जायेगा और बिहार पानी के प्रचुरता के बाबजूद सूखे की मार झेलेगा तथा पानी का सही प्रबंधन नहीं होने से बाढ़ की भी मार ,शर्मनाक है बिहार में विकाश के नाम पर लूट का खेल …खासकर बाढ़ एवं आपदा प्रबंधन के नाम पर ,बिहार की जनता को इसकी जाँच सामाजिक जाँच के जरिये करने के लिए पूरे बिहार में एकजुट होना चाहिए …

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