विविकर्मी क लेल अलग न्यायाधिकरण

पटना। विश्वविद्यालय क शिक्षक आ शिक्षकेतरकर्मी कए वेतन, पेंशन क लाभ आ प्रोन्नति क मामला मे न्याय क लेल हाईकोर्ट क दरवाजा नहि खटखटाबे पड़त। राज्य सरकार नव वर्ष क तोहफा क तौर पर हुनका लेल केन्द्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण क तर्ज पर अलग न्यायाधिकरण क स्थापना करै जा रहल अछि। मानव संसाधन विकास विभाग वित्त विभाग क आपत्ति क निराकरण करि प्रस्ताव कैबिनेट क मंजूरी लेल भेज देलक अछि। राजगीर क विश्वशांति स्तूप पर 29 दिसंबर कए प्रस्तावित कैबिनेट क बैठक मे प्रस्ताव कए मंजूरी भेटबाकआसार अछि। प्रस्ताव क मुताबिक न्यायाधिकरण क अध्यक्ष पटना उच्च न्यायालय स कोनो मौजूदा आ सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति होइत। प्रस्ताव कए विधि विभाग क सहमति भेट चुकल अछि। अखन तक वेतन-पेंशन आ प्रोन्नति क मामला क ल कए सूबा मे 9 टा विश्वविद्यालय क अधीन 250 टा अंगीभूत कॉलेज मे काज क रहल कर्मी अक्सर अदालत क शरण मे चलि जाएल छल। सरकार द्वारा विश्वविद्यालय कए वेतन-पेंशन मद मे नियमित भुगतान भ रहैत अछि, तखिनों राशि क विचलन क चलते यदि वेतन-पेंशन क भुगतान नहि भेल त संबंधित व्यक्ति कोर्ट चलि जाइत अछि। एहन मामला मे गलती विश्वविद्यालय कए रहैत अछि, मुदा अदालत मे सरकार कए फजीहत क सामना करै पड़ैत अछि। लिहाजा विश्वविद्यालय स संबंधित बढ़ैत केस क त्वरित निष्पादन करि अवमानना क लटकैत तलवार स निजात क लेल विभाग विश्वविद्यालय क लेल अलग न्यायाधिकरण कए प्रस्ताव तैयार केलक अछि। ओना न्यायाधिकरण क फैसला स असंतुष्ट कर्मी क लेल हाईकोर्ट जाए कए रास्ता खुलल रहत। न्यायाधिकरण बनला स विश्वविद्यालय आ कॉलेज क पीडि़त कर्मी कए कम खर्च पर त्वरित न्याय भेटत।

नीक वा अधलाह - ज़रूर कहू जे मोन होय

comments