विदेश नीति मे राज्‍यक हिस्‍सा

प्रीति सिंह
गठबंधन सरकारक असर कही या केंद्र क दिशाहीन विदेशनीतिक नतीजा, लेकिन इ जरूर देखा रहल अछि जे विदेशनीति मे राज्‍यक हिस्‍सा बढेबाक दबाव बढि रहल अछि। ओनाओ उदारिकरणक बाद आब नेहरू आ इंदिरा क दौर नहि रहल जखन दिल्ली एहि मसला पर अपन मर्जीक करि लैत छल। ओना ओहि समय मे सेहो राजीव गांधी श्रीलंका नीति पर तमिलनाडु कए नजरअंदाज नहि कए सकलाह, मुदा आब कोनो राज्‍य कए केंद्र आसानी स नजरअंदान नहि करि सकैत अछि। इ अगल गप अछि जे संविधान क तहत विदेश नीति निर्धारण पूर्णरूपेण केंद्र सरकार क जिम्मा अछि जाहि मे राज्य सरकार क कनियो टा भूमिका नहि अछि। मुदा जखन विदेश नीतिक असर कोनो विशेष राज्‍यक अर्थव्‍यवस्‍था पर पडत त व्‍यावहारिक तौर पर राज्‍य ओकर विरोध करत। जे भारत-बांग्लादेश तीस्ता नदी जल समझौता पर देखार भ गेल अछि। पश्चिम बंगाल क मुख्यमंत्री आ एकटा क्षेत्रीय दल तृणमूल कांग्रेस क मुखिया ममता बनर्जी केंद्र सरकार क प्रस्तावित समझौता पर अपन रजामंदी देबा स इनकार करि देलथि। इ त शुरुआत छी। तीस्ता पर बनर्जी क अड़ंगा पर राजनीति विज्ञानी, विदेश नीति आओर अंतरराष्टïरीय संबंध क विशेषज्ञ क अलावा भारतीय रणनीतिकार आ राजनयिक कए सक्रिय हेबाक चाही। विदेश नीति निर्माण आ ओकर कार्यान्वयन मे राज्य सरकार क भूमिका पर एक बेर फेर स विचार हेबाक चाही। जखन विदेश नीति कोनो राज्‍यक विकास कए प्रभावित करि रहल अछि त ओहि राज्‍यक राय महत्‍वपूर्ण भ जाइत अछि आ एहन मे अहां ओकरा नजरअंदान नहि कए सकैत छी। हम सब इ जनैत छी जे भारत सन संघीय आ महाद्वीपीय स्वरूप वाला देश मे जतए अलग-अलग क्षेत्रीय अतीत आ राजनीति रहल अछि, उपमहाद्वीप क इतिहास आ एहन दौर मे जतए क्षेत्रीय दलक समर्थन पर गठबंधन राजनीति क दौर जारी अछि ओहि ठाम विदेश नीति विशुद्घ रूप स कोनो एक दल केंद्रित सरकार क बपौती नहि अछि। पड़ोसी देश क संग द्विपक्षीय संबंध तय करबा मे सीमावर्ती राज्‍यक सेहो हिस्‍सा हेबाक चाही-श्रीलंका क संग तमिलनाडु, पाकिस्तान क संग पंजाब जम्मू-कश्मीर, बांग्लादेश क संग पश्चिम बंगाल, असम, मेघालय आ त्रिपुरा, त नेपाल क संग संबंध तय करबा मे उत्तर प्रदेश आओर बिहार क पक्ष सुनलाक बाद कोनो अंतिम फैसला हेबाक चाही।
केंद्रक सर्वाधिकार सिद्घांतत: ठीक अछि मुदा व्यावहारिक रूप स नहि। खास कए उदारिकरणक एहि दौर मे जखन गरीब आ विकासशील राज्‍य विकसित हेबा लेल प्रयासरत अछि। एहन परिस्थिति मे विदेश नीति पर एक बेर प्रभावित राज्‍यक विचार जरूर लेबाक चाही। किछु राज्‍यक अर्थव्यवस्था दूरस्थ देश पर निर्भर अछि। किछु राज्‍य अपन पर्यटनक विकास लेल कई देश स संबंध प्रगाढ करबाक प्रसास मे जुटल अछि। बुद्ध धर्म वाला देश स जेना संबंध स्‍थापित करबा काल बिहार कए नजरअंदाज करि देल जाइत रहल अछि ओना फारस/अरब क खाड़ी संग संबंध कए तय करबा काल केरल क हित क अनदेखी नहि होइत रहल अछि। मुदा आब बुद्ध धर्म वाला देश सने सेहो विदेश नीति तय करबा मे केंद्र अपन एकाधिकार क आड़ नहि ल सकैत अछि। सिंद्धांत जे कहे मुदा व्यावहारिक तौर पर केंद्र कए एहन मामला मे आब राज्‍य संग परामर्श करबाक चाही, संबंधित आ प्रभावित राज्‍य कए सूचित करबाक चाही। एक अधिक परामर्शीय प्रक्रिया हरदत मुश्किल राह आसान करैत अछि। वैश्‍वीक मंदीक एहि दौर मे राज्‍य स इतर केंद्र कए विदेश नीति क संदर्भ मे घरेलू कारोबार, विभिन्न हित समूह क प्रतिनिधि आओर अन्य मामला कए सेहो देखबाक चाही। भारतीय विदेश नीतिक मे राज्‍यक हिस्‍सा एहि लेल सेहो बढबाक चाही जे भारत विदेश नीति अमेरिका आ पाकिस्‍तान तक सिमटि कए रहि गेल अछि। राज्‍य संग मंथन आ विचार स भारतीय विदेशनीतिक दायरा सेहो दू देश स आगू बढत।

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