रेड लेबल क विज्ञापन आ मैथिलक विवाह


समस्तीपुर । संस्कृति मरैत नहि अछि। समस्तीपुर मे भेल एकटा घटना इ साबित करि देलक। किछु साल पहिने रेड लेबल चाहक एकटाविज्ञापन आयल छल- ‘तमिल लोगों की शादी मे नाच-गाना नहीं होता है।Ó बिहार पिछला किछु दशक स सांस्कृतिक रूप स पंजाबी संस्कृति कए आत्मसार करि लेबाक प्रयास मे अपन पहचान गवां चुकल अछि। एहन मे विवाहक दौरान नाच-गाना, शराब, मौगी बरियाती आदि एहन परिपाटी आम भ गेल जे पहिने एहि क्षेत्र मे नहि होइत छल। गरीबी आ पलायन स जेना पूरा समाज अपन संस्कृति कए ल कए ग्लानी मे डूबि गेल छल। कोई इ कहबाकहिम्मत नहि जुटा पाबि रहलछल जे तमिल नहि मैथिल लोकक विवाह मे सेहो नाच-गाना नहि होइत अछि। मुदा समस्तीपुर क एकटा ‘विदेहीÓ इ कहबाक हिम्मत टा नहि केेलथि, बल्कि अपन संगी संग नचनिहार वर स विवाह करबा स मना करि देलथि। पेशा स होम्योपैथिक डॉक्टर रवि कुमार वर्ष 2005 स बैंक मे काज करिनिहारि सरिता कुमारी स प्रेम करैत छलाह। दूनू परिवारक रजामंदी स विवाह तय भेल, मुदा आधुनिक बनबाकचक्कर मे रवि स एकटा गलती भ गेल, ओ मैथिल क बजाए पंजाबी जेकां विवाह करबा लेल सरिताक दुहारि पर आबि गेलाह। जाहि स ओ अपन प्रेमिका स दूर भ गेलाह।
बरियाती जखन सरिता क दुहारि लागल, त रवि दोस्तक संग नाचए लगलाह। एकर सूचना सरिता तक पहुंचल। इ दृश्य नहि त राम सन छल, न महादेव सन। अपन विवाह मे नहि सरिता क बाप नाचल छलथि आ नहि रविक बापक नचबाक कोनो चर्चा अछि। तखन शराब मे डूबल रवि सरिता संस्कारहीन युवकक अलावा किछु नहि रहल वरमाला क दौरान रविक सामना केलाक उपरांत सरिताक फैसला अटल भ गेल। रवि जहिना सरिता क मांग मे सेनुर दिए लागल सरिता सेनुर लगेबा स मना करि देलथि आ कहलथि जे हमरा मैथिल संस्कार वाला वर चाही, आधुनिकताक नाम पर संस्कारहीन वर हमरा नामंजूर अछि।
अपन बेटीकफैसला पर गर्व करैत सरिता क पिता कहैत छथि जे लड़का बरियाती संग शराब क नशा मे नचैत अछि। एहन लड़का क संग बेटी क विवाह कोना कैल जा सकैत अछि। सरिता आ हुनक पिता कए रवि क पिता बुझेबाक बर प्रयास केलथि, मुदा कोनो फायदा नहि भेल। रवि समेत पूर बरियाती वापस लौट गेल। आशा अछि एहि घटनाक बाद लोक अपन संस्कृति कए अपना मैथिल बनि विवाह करबा लेल प्रेरित भ सकत। ओ दिन दूर नहि जहिया कोनो चाह क विज्ञापन मे सुनबा मे भेटत,’मैथिलों के विवाह मे नाच-गाना नहि होता।Ó त भ जाए एहि गप पर एक लोटा चाह…..

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2 टिप्पणी

  1. सरिता जी बहुत निक केलैथि , ओ अपन जीवन से निक अपन संस्कृति के मन देलैथि , आखिर हम मैथिल छी

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