रामलीला मे मिथिला क लोक संस्कृति

पटना। उत्‍तर प्रदेशक कईटा लोक दरभंगा क नाम ओहि ठामक रामलीला पार्टी कए ल कए जनैत छथि। आइ मिथिलाक सांस्‍कृतिक अवसान एहन भ चुकल अछि जे मैथिली लोक कला मे किर्तनिया नाच एकटा इतिहास बनि चुकल अछि। इ शैली मृत प्राय भ गेल अछि, मुदा मिथिला क मोदलता, स्नेहलता, प्रेमलता, कनकलता, सीताराम शरण, प्रभृत लोक श्रीराम विवाह क माध्यम स एहि शैली कए पुनर्जीवित करबाक प्रयास क रहल छथि। एहि क्रम मे श्री सीताराम विवाह मंडली (मधुबनी) क स्थापना भेल, जेकर ख्याति भारत आ नेपाल मे सामान रूप स अछि। इ मंडली भारतीय नृत्य कला मंदिर मे रामलीला क मंचन केलक। एहि मे मिथिला क लोक संस्कृति क पूरा रंग देखबा मे भेटल। कला, संस्कृति आ युवा विभाग, बिहार सरकार आओर संगीत नाटक अकादमी, दिल्ली दिस स आयोजित शताब्दी रामायण महोत्सव क दोसर दिन पं. ब्रज बिहारी मिश्र क निर्देशन मे मिथिला लोक शैली मे रामलीला क सराहनीय प्रस्तुति स दर्शक सेहो मंत्रमुग्ध भ गेलाह। श्री सीताराम विवाह क विभिन्न प्रसंग कए बड अजगुत अंदाज मे कलाकार पारंपरिक मिथिला लोक शैली मे मंच पर उतारलथि।

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1 टिप्पणी

  1. मिथिलाक लोक नाट्यक भूमिका ठीके मे महत्वपूर्ण छैक , मुदा हमर सभक शिथिलता आ बजारवादक चकाचौंध मे ओकरा बिसरि रहल छियैक। किन्तु ई प्रयास पुनः मिथिलाक अस्मिता के जगाओत आ हम सभ सेहो एहि परम्पराकें जिएबाक लेल आत्मसात होयब। ओना हेरायल लोक कतेक जल्दी घुरैत छथि से कहब कठिन अछि तथापि आशा तं नीकें करब ने।

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