मैलोरंग लेल त नाटक अछि ”ललका पाग”

सुनील कुमार/ कुमुद सिंह
मैलोरंग एक बेर फेर इ साबित करबा मे सफल रहल जे मैथिली मे प्रयोगात्‍मक नाटक करबा मे ओ सक्षम अछि। एहि स पहिने सेहो मैलोरंग कईटा शानदार नाटकक मंचन क चुकल अछि। मुदा मिथिलोत्‍सव2011 आन आयोजन स अलग रहल। मिथिलोत्‍सव 2011 मे मैलोरंग मंच कला क सब विधा कए एक ठाम अनबा मे सफल रहल।
मिथिलोत्‍सव 2011 मे राजकमल चौधरी क ‘ललका पाग’ क प्रस्‍तुति स निर्देशक प्रकाश झा एक बेर फेर अपन निर्देशन स मैथिली रंगमंच कए प्रकाशमय केलथि। राजकलम चौधरी द्वारा लिखित नाटक “ललका पाग” मे मैथिल स्त्रीक संस्कार आ चरित्रक सम्पूर्ण विवरण अछि। ताहि लेल ललका पाग’ नाटक क कथानक पर गप नहि भ सकैत अछि आ ओकरे प्रभाव रहल जे कलाकार सब कसल आ परिपक्‍व प्रस्तुति देलथि। निर्देशन कमाल क रहल आ अभिनय सराहनीय कहल जा सकैत अछि। तिरू क रूप म ज्योति, राधा चौधरीक रूप मे मुकेश’ एक बेर फेर अपन धमक मंच पर देखा देलथि। दीपक आ नीरा सेहो पात्र संग न्‍याय करबा मे सफल रहलथि। हिनकर सबहक अभिनय मे पहिने स काफी परिपक्‍वता आयल अछि। नाटकक अंत प्रभावकारी रहल। राधा चौधरी बनल मुकेश क कनबाक दृश्य जीवंत भ उठल छल, हुनक ओ भोकरी दर्शक लोकनि कए स्‍तब्‍ध क देलक। बिना गिलिसरीन क बहुत गोटेक आंखि नोरा गेल। देखल जाए त पार्श्‍व संगीत मे सुधारक जरूरत छल। प्रकाश व्‍यवस्‍था ठीक ठाक छल, मुदा वस्त्र विन्यास खटकैत रहल। ‘तीरू’ क वस्‍त्र शुरू स अंत तक एकहि रंगक देखाउल गेल, जखन कि ओकर मनोभाव आ जीवन क रंग बदलैत रहल। कुल मिलाकर ‘ललका पाग’ क प्रस्‍तुति कए अभिनय आ निर्देशन नजरि स अदभुत कहल जा सकैत अछि।
कार्यक्रमक मध्‍य तक जे स्‍तर आ समायोजन छल ओ अंत जाइत जाइत छिडिया गेल। तीन भाग मे बंटल एहि कार्यक्रमक तेसर भाग जे गीत संगीत क छल ओ मैलोरंग क स्‍थापित स्‍तर स मेल नहि खेलक। एकदिस कार्यक्रम पहिल भाग जतए प्रयोगवादी रंगमंचक धमकदार प्रस्‍तुति स सभागार मे दर्शक कए जकडने रहल, ओतहि घिसल-पिटल भजनक प्रभावहीन आ स्‍तरहीन गायकी स सभागार खाली होइत गेल। गायिका अंशुमाला झा क पिया मोरा बालक आ झूमना बरद संग क प्रस्तुति आ नेहा वर्मा क नृत्य छोडि इ खंड अपन कोनो प्रभाव छोडबा मे असफल रहल। मैथिली ठाकुर प्रभावहीन प्रस्‍तुति देलथि त कल्पना मिश्रा क गायन स्तरहीन छल। पुरुष गायक सेहो मंच पर अपन प्रस्‍तुति स कोनो कमाल नहि देखा सकलाह। संजय झा जोगिया रूप हम देखलो गे माई, भाष्कर क हेरोउ उगना, करुणा क दर्शन दिय माँ दुर्गा भवानी आ पुष्‍पा क मोरा रे अंगनवा कार्यक्रम मे कोनो छाप नहि छोडि सकल। निश्चित रूप स कार्यक्रमक इ खंड अंशुक मंच पर वापसी लेल उल्‍लेखनीय रहल। बहुत रास विधा कए एक संग परोसबा मे मंच संचालक भूमिका महत्‍वपूर्ण भ जाइत अछि आ इ भूमिका सोम्या झा बहुत नीक जेकां निभेलथि। हुनक मधुर आवाज आ अंदाज कार्यक्रम कए एकटा लय मे रखबा मे सफल रहल।
कुल मिला कए मिथिलोत्सव 2011 अपन छाप छोडबा मे सफल रहल। गीतक कमजोर पक्ष नाटकक मजबूत पक्ष कए नुका नहि सकल। निश्चित रूप स सब विधा मे समान प्रस्‍तुति संभव नहि अछि, मुदा मैलोरंग कए एहि प्रयास लेल साधुवाद देबाक चाही जे एक संग कलाक सब विधा कए मंच प्रदान केलक। आयोजन शानदार छल आ जार क बावजूद भीड अपार छल। अंत मे कहबा लेल विवश छी जे पुरूष लेल जेना ललका पाग स्‍त्री होइत अछि तहिना मैलोरंग लेल त ”ललका पाग” नाटक छी जे ओकरा लग कमाल क अछि।

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